बप्‍पी लहिरी ने देश में डिस्को को किया था लोकप्रिय, हमेशा याद रहेगा उनका जिंदादिली स्वभाव

By टीम प्रभासाक्षी | Feb 16, 2022

सोने की मोटी जंजीरें और चश्मा पहनने के लिए पहचाने जाने वाले गायक-संगीतकार बप्‍पी लहिरी ने 70-80 के दशक में कई फिल्मों के लिए संगीत रचना की जिन्हें खासी लोकप्रियता मिली। इन फिल्मों में ‘‘चलते-चलते’’, ‘‘डिस्को डांसर’’ और ‘‘शराबी’’ शामिल हैं। बप्‍पी लहिरी के परिवार में उनकी पत्नी चित्राणी, पुत्री रीमा और पुत्र बप्पा लहिरी हैं। बप्‍पी लहिरी के दामाद गोविंद बंसल ने कहा, ‘‘अंतिम संस्कार जुहू के पवन हंस शवदाहगृह में किया जाएगा।’’ बप्‍पी लहिरी के परिवार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है ‘‘यह हमारे लिए अत्यंत दुखद समय है। हमारे प्रिय बप्पी दा बीती रात हमें छोड़ गए। हम उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहेगा।’’ बप्‍पी लहिरी ने आखिरी बार सितंबर 2021 में ‘‘गणपति बप्पा मोरिया’’ में काम किया था। उन्होंने अमेरिका स्थित भारतीय गायक अनुराधा जुजु पलाकुर्ती की आवाज वाले भक्ति गीतों के लिए भी संगीत दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हर कोई लहिरी के जिंदादिल स्वभाव को याद करेगा। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘बप्पी लाहिड़ी जी के संगीत ने विविध भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त किया। कई पीढ़ियों के लोग उनके संगीत से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। हर कोई उनकी जिंदादिली को याद करेगा। मैं उनके निधन से दुखी हूं। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। ओम शांति।’’ फिल्म इंडस्ट्री में भी कई लोगों ने गायक के निधन पर शोक व्यक्त किया है और उन्हें बॉलीवुड में संगीत का एक नया अंदाज पेश करने वाले कलाकार के तौर पर याद किया। लाहिड़ी को उनके प्रशंसक प्यार से ‘बप्पी दा’ बुलाते थे। 

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बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने कहा, ‘‘उन्होंने चलते चलते, सुरक्षा और डिस्को डांसर के साथ हिंदी फिल्म संगीत को अधिक समकालीन शैली दी। शांति दादा। आप याद आएंगे।’’ गायिका अनुराधा जुजु पलाकुर्ति ने कहा कि लाहिड़ी के निधन से उन्होंने एक मार्गदर्शक खो दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक मार्गदर्शक खो दिया, इंडस्ट्री ने एक दिग्गज को खो दिया, जिनका काम हमेशा चमकता रहेगा, दुनिया ने असाधारण अच्छाई और दयालु स्वभाव वाले ‘सात्विक’ व्यक्ति को खो दिया है तथा परिवार ने प्यार करने वाले पति, पिता और दादा को खो दिया है।’’ फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने बप्‍पी लहिरी को अद्भुत मधुर आवाज वाला और प्रतिभाशाली व्यक्ति बताया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘एक और दिग्गज चला गया।’’ लाहिड़ी का जन्म पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में संगीतकारों के एक परिवार में 1952 में हुआ। लाहिड़ी का संगीत के प्रति प्रेम तीन वर्ष की आयु में ही शुरू हो गया था जब उन्होंने तबला बजाना शुरू किया। उनके लिए ‘‘पग घुंघरू’’ और ‘‘चलते चलते’’ जैसे गीत गाने वाले मशहूर गायक किशोर कुमार उनके ‘‘मामा’’ थे। न केवल हिंदी फिल्मों में बल्कि लाहिड़ी बंगाली सिनेमा में भी लोकप्रिय नाम थे, जहां उन्होंने 1972 में आयी फिल्म ‘‘दादू’’ से अपने कॅरियर की शुरुआत की। बतौर संगीतकार उनकी पहली हिंदी फिल्म 1973 में आयी ‘‘नन्हा शिकारी’’ थी। ‘‘जख्मी’’ फिल्म के लिए गाना गाने और संगीत देने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ‘‘जख्मी’’ के बाद उन्हेांने ‘‘चलते चलते’’, ‘‘सुरक्षा’’ और अन्य फिल्मों में काम किया और उनका डिस्को संगीत युवाओं के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्हें भारत के ‘‘डिस्को किंग’’ की उपाधि दे दी गयी। गायक ने 2019 में एक साक्षात्कार में कहा था कि वह अपने युग के कुछ बड़े सितारों के लिए गाना गाने को लेकर खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे यह सफर तय करके और इंडस्ट्री में अत्यधिक प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करके काफी गर्व महसूस होता है। मैंने दिलीप कुमार से लेकर रणवीर सिंह तक के लिए काम किया। ‘धर्म अधिकारी’ से लेकर ‘गुंडे’ तक में काम किया है।

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