By अभिनय आकाश | Jul 23, 2026
अमेरिका ने पहली बार अपने उस ब्रह्मास्त को जंग के मैदान में उतार दिया जिसके नाम मात्र से दुश्मन की सेना थर-थर कांपती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बी वन लैंसर लॉन्ग रेंज बॉम्बर की। मंगलवार को जब दुनिया सो रही थी तब इन आसमानी शिकारियों ने ईरान के ठिकाने पर वो भी हमला किया जिसने तेहरान से लेकर मॉस्को तक हड़कंप मचा दिया। मिलिट्री एक्सपर्ट्स इसे द बोन कहते हैं। यह अमेरिकी वायुसेना का वो बम वर्ष है जो सबसे भारी बम ले जाने में सक्षम है। अब B1 लेंसर बमबर अमेरिका का सबसे घातक संदेश है ईरान के लिए। इसकी खासियतों की बात करें तो सबसे पहले नंबर पर आता है रफ्तार। यह आवाज की गति यानी सुपरसोनिक स्पीड से भी तेज उड़ान भर सकता है। दूसरी खासियत है मारक क्षमता। यह दो दर्जन 2000 पाउंड से भारी भरकम बम या दर्जन क्रूज मिसाइलें एक साथ दाग सकता है। तीसरी खासियत है यह बहुत कम ऊंचाई पर उड़कर रडार को चकमा देने में माहिर है। और यह सबसे बड़ी खासियत है इसकी।
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है। साफ कर दिया है कि अगर अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप ने साफ चेतावनी दे दी है कल की अगर फोरमज स्टेट में जहाजों पर हमले जारी रहेंगे तो अमेरिका तेहरान के पुलों, बिजली घरों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। यानी कुल मिलाकर इसका मतलब समझिए अमेरिका अब टोटल वॉर की तरफ आगे निकल चुका है। अगर ईरान की बिजली काट दी गई और उसके पुल उड़ा दिए गए तो पूरे देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति सिचुएशन पैदा हो जाएगी। ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने पलटवार करते हुए धमकी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएंगे अपनी मिसाइलों से। यानी यह जंग अब केवल दो देशों की नहीं बल्कि पूरी खाड़ी देशों मिडिल ईस्ट को तबाह करने वाली आग बन सकती है। यही नहीं ईरान के इशारे पर यमन के हूं विद्रोहियों ने रेड सी में एक नया मोर्चा खोल दिया है। कल भारत तक पर हमने आपको खबर भी दिखाई थी कि उन्होंने सऊदी अरब के जहाजों पर हमला कर दिया है और बाप अलमदेव में नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। इसके डर से दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का एक नया खतरा मंडराने लगा है। एक तरफ बम बरस रहे हैं तो दूसरी तरफ क़तर और ओमान जैसे देश सुलह की कोशिशों में जुटे हैं।