SIR मॉडल से अमरीकी चुनाव सुधारेंगे डोनाल्ड ट्रंप? क्या भारतीय चुनाव प्रणाली से प्रेरित है 'सेव अमेरिका एक्ट'

By अभिनय आकाश | Aug 20, 2026

अमरीका की चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की अपनी मुहिम को धार देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली का हवाला दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने बताया कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने उनकी सरकार से यह सवाल किया था कि अमरीका बिना वैध फोटो आईडी के चुनाव कैसे करा सकता है। भारत में 64.6 करोड़ मतदाताओं वाले विशाल और सफल चुनाव की सराहना करते हुए ट्रंप ने अपने चुनावी सुधार के एजेंडे को आगे बढ़ाया और लिखा हमें तुरंत 'द सेव अमरीका एक्ट' (The SAVE America Act) पारित करने की आवश्यकता है। ट्रंप की यह टिप्पणी नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर के बीच हुई औपचारिक मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। अगर ज्ञानेश कुमार और ट्रंप का साथ आना हैरान करने वाला था, तो ट्रंप ने इसके ज़रिए जो घोषणा की, वह और भी अहम थी और हम भारतीयों के लिए भी उस पर गौर करना ज़रूरी है। ट्रंप का  सेव अमेरिका एक्ट बिल नागरिकता के सबूत और वोटर पहचान-पत्र के ज़रिए अमेरिका में वोटर की पात्रता के नियमों को सख्त बनाना चाहता है, साथ ही ट्रंप मेल से वोटिंग पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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'SAVE America' के लिए भारत का उदाहरण

ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट से ज़्यादा अहम बात वह है जो खुद व्हाइट हाउस कह रहा है। 'SAVE America Act' बिल के लिए अपनी दलील में वे साफ़ तौर पर भारत और ब्राज़ील की चुनावी प्रणालियों का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि अमेरिका के नियम बहुत ढीले हैं। उनका कहना है कि भारत और ब्राज़ील में "वोटर ID को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा जाता है", जबकि अमेरिका में नागरिकता के लिए सिर्फ़ खुद के दावे (सेल्फ़-अटेस्टेशन) पर भरोसा किया जाता है। सेव अमेरिका के तहत फ़ेडरल वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेज़ी सबूत देना ज़रूरी होगा और वोटर की पहचान से जुड़े नियम ज़्यादा सख़्त होंगे। ट्रंप की इस मुहिम का मकसद मेल वोटिंग पर भी कड़ी पाबंदियां लगाना है। अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 29% अमेरिकी वोटरों ने इसी तरीके को चुना था। 

भारत में SIR और ट्रंप के नए बिल में क्या एक जैसा?

मूल रूप से भारत का SIR मतदाता सूची के शुद्धिकरण की एक सघन प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल रहें, जबकि मृत, स्थानांतरित, फर्जी और अयोग्य मतदाताओं (जिनमें गैर-नागरिक भी शामिल हैं) के नाम सूची से हटा दिए जाएं।  वहीं, अमरीका का प्रस्तावित कानून इस प्रक्रिया को भले ही अलग तरीके से लागू करता हो, लेकिन उसकी मूल भावना में भी 'नागरिकता' ही केंद्र बिंदु है। यह बिल संघीय चुनावों में मतदान पंजीकरण के लिए अमरीकी नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण को अनिवार्य बनाने और वोटर लिस्ट से गैर-नागरिकों की पहचान कर उन्हें बाहर करने का प्रावधान करता है।  इसलिए, यह आम बात है। दोनों ही इस बात पर ज़ोर देते हैं कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने से पहले योग्यता और नागरिकता की कड़ी जांच होनी चाहिए। यही वजह है कि SAVE America को सिर्फ़ 'अमेरिका का SIR' कहना गलत होगा। SIR भारत के मौजूदा चुनावी ढांचे के तहत संवैधानिक रूप से अधिकार प्राप्त चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है। अमेरिका में चुनाव विकेंद्रीकृत होते हैं। इसमें राज्यों की अहम भूमिका होती है। ट्रंप ने Truth Social पोस्ट में भारत का ज़िक्र करते समय एक और अंतर को नज़रअंदाज़ कर दिया। भारतीय वोटरों को पोलिंग स्टेशन पर अपनी पहचान साबित करनी होती है, लेकिन वोटिंग के लिए सिर्फ़ EPIC वोटर कार्ड ही एकमात्र मान्य दस्तावेज़ नहीं है। इससे भी अहम बात यह है कि आधार खुद "नागरिकता का सबूत" नहीं है। इसलिए, भारत की व्यवस्था को आसानी से बायोमेट्रिक्स यानी नागरिकता की पुष्टि" के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

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