By अभिनय आकाश | Sep 23, 2026
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर कामकाज और पारदर्शिता को लेकर बड़ा अंदरूनी विवाद सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में बिना उनकी जानकारी के लिए गए कई बड़े फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर कड़ा ऐतराज जताया है। हालांकि चुनाव आयोग के सूत्रों ने उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के अंदर मतभेद हैं। सूत्रों ने कहा कि SIR से जुड़े फैसलों समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए थे। लेकिन अब इस पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को दिल्ली, हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल में फिर से चुनाव कराने की मांग की। यह मांग चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर हुए मतभेद के बीच की गई है।
कांग्रेस ने कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग में 'वोट चोरी' और राजनीतिक दखलंदाज़ी के अपने पुराने आरोपों को दोहराया। पार्टी ने कहा ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह ही तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए 'वोट चोरी' में लगे हैं। हमने पहले भी कहा है - मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्ज़ा कर लिया है। ज्ञानेश कुमार मोदी की कठपुतली हैं। इंडियन एक्सप्रेस की यह रिपोर्ट इस बात को साबित करती है। मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है। लेकिन याद रखें - जब समय आएगा, तो सभी को जवाबदेह ठहराया जाएगा, ज़िम्मेदारी तय की जाएगी। इस अपराध के लिए सज़ा ज़रूर मिलेगी। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रिपोर्ट को 'बेहद गंभीर' बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त अपनी सही ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभा पा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्य फ़ैसले लेने के लिए आज़ाद नहीं हैं या उनकी चिंताओं को नहीं सुना जाता है, तो इसके लोकतंत्र पर गंभीर असर पड़ेंगे।