By Ankit Jaiswal | Apr 07, 2026
आईपीएल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है और इस बार वजह है लीग के पूर्व आयुक्त ललित मोदी का बड़ा दावा। उन्होंने कहा है कि मौजूदा प्रारूप के कारण लीग हर साल हजारों करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व से वंचित हो रही है।
गौरतलब है कि आईपीएल की शुरुआत में हर टीम के लिए तय था कि वह बाकी सभी टीमों के खिलाफ दो-दो मुकाबले खेलेगी। अगर इसी मॉडल को लागू किया जाए तो लीग चरण में कुल मुकाबलों की संख्या करीब 90 तक पहुंच सकती है, जिसके बाद नॉकआउट मुकाबले होते हैं। लेकिन फिलहाल लीग 74 मुकाबलों के साथ ही चल रही है, जिससे कई संभावित मैच कम हो जाते हैं।
ललित मोदी का कहना है कि हर मुकाबले से मिलने वाली आय का बड़ा हिस्सा सीधे बोर्ड और टीमों को जाता है। ऐसे में जब मैच कम होते हैं तो सीधा असर टीमों की कमाई और उनकी वैल्यू पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ खेल का मामला नहीं बल्कि एक व्यावसायिक समझौता है, जिसमें टीमों को घरेलू और बाहरी दोनों तरह के मुकाबले मिलने चाहिए।
मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने अनुमान लगाया है कि अगर पूरा घरेलू-बाहरी प्रारूप लागू किया जाए तो केवल प्रसारण अधिकारों से ही हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। उनका दावा है कि इससे बोर्ड को बड़ा फायदा होगा और टीमों की कमाई भी बढ़ेगी, जिससे उनकी बाजार कीमत अपने आप बढ़ जाएगी।
आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीगों में से एक बन चुकी है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रारूप को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि भविष्य में लीग के ढांचे पर फिर से विचार किया जा सकता है। हालांकि, व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और खिलाड़ियों के कार्यभार जैसे मुद्दे भी इस फैसले को प्रभावित करते हैं।
कुल मिलाकर यह बहस अब सिर्फ मैचों की संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि लीग के आर्थिक मॉडल और दीर्घकालिक रणनीति से भी जुड़ गई है। आने वाले समय में इस पर क्या फैसला होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।