GDP का Base Year बदला, भारत की Economy को मिलेगा बड़ा बूस्ट? नए आंकड़े होंगे जारी

By Ankit Jaiswal | Feb 12, 2026

गुरुवार को सरकार नई महंगाई सीरीज जारी करेगी, जो बदलते खर्च के पैटर्न को दर्शाएगी और वास्तविक कीमतों के दबाव की बेहतर तस्वीर पेश करेगी। वहीं 27 फरवरी को नए सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के आंकड़े सामने आएंगे, जिनमें अर्थव्यवस्था के आकार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।

नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI में कई अहम बदलाव किए गए हैं। इसमें भोजन जैसी अस्थिर श्रेणियों का वजन करीब 50 प्रतिशत से घटाकर लगभग 36.8 प्रतिशत किया गया है और बेस ईयर को 2012 से बदलकर 2024 किया गया है। इसके अलावा कीमतों का संग्रह पूरे देश से किया गया है और ग्रामीण आवास किराया तथा ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसी नई श्रेणियों को भी जोड़ा गया है।

गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब भारतीय रिजर्व बैंक की महंगाई अनुमान प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लगातार अधिक अनुमान के चलते मौद्रिक नीति सख्त बनी रहने की चर्चा रही है। ऐसे में नया CPI डेटा ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा बदल सकता है, खासकर तब जब विदेशी निवेश नीति संकेतों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

सरकार गुरुवार शाम चार बजे यह महंगाई आंकड़ा जारी करेगी, जिसमें 2025 के आंकड़े भी नए वजन के आधार पर शामिल होंगे। इससे सालाना तुलना करना आसान हो जाएगा।

सचिव सौरभ गर्ग के अनुसार भारत की खपत टोकरी में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार अनाज जैसे चावल और गेहूं पर कम खर्च कर रहे हैं, जबकि फल, सब्जी, दूध और मांस जैसे उत्पादों पर खर्च बढ़ा है। यह बढ़ती आय और बेहतर जीवन स्तर का संकेत माना जा रहा है।

भारत की अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि भारत जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

भोजन के अलावा नया CPI ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाने, अमेज़ॅन और नेटफ्लिक्स जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाले खर्च को भी ट्रैक करेगा। गौरतलब है कि पिछला CPI अपडेट 2015 में हुआ था, जबकि वैश्विक मानकों के अनुसार हर पांच साल में ऐसा किया जाना चाहिए। कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया टलती रही।

साथ ही सरकार GDP के बेस ईयर को भी 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रही है, ताकि अर्थव्यवस्था की नई संरचना को बेहतर ढंग से दिखाया जा सके। जीएसटी डेटा, इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण, असंगठित क्षेत्र और बागवानी से जुड़ी जानकारी को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा एक नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स तैयार किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में कीमतों के दबाव को समझना आसान होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मई में आने वाले अस्थायी GDP अनुमानों में इस सूचकांक का इस्तेमाल किया जा सके।

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