By अनन्या मिश्रा | Apr 07, 2026
असम विधानसभा चुनाव के लिए सभी सियासी दल जोर-शोर से चुनावी रैलियां कर रहे हैं। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी सत्ता के वनवान का अज्ञातवास खत्म होने की आस लगाए बैठी है। बता दें कि साल 2016 में राज्य में पहली बार भाजपा जीत हासिल कर सत्ता में आई थी। ऐसे में विपक्षी दल लगातार सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मुद्दे उठाकर पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में असम चुनाव के यह मुद्दे सत्ता दल के लिए टेंशन बढ़ा सकते हैं।
जरूर चीजों के लगातार दाम बढ़ते जा रहे हैं। जोकि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ असम में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में खाद्य महंगाई में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित हैं।
राज्य के अन्य सियासी दल महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। जिसको सत्ता विरोधी लहर के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सत्ताधारी दल ने आरोपों को सिरों से खारिज कर दिया है और अपनी 'विकास परियोजनाओं' पर ध्यान केंद्रित किया है।