क्या गैर मुस्लिमों को प्रबंधन सौंप देंगे? सुप्रीम कोर्ट का वक्फ संशोधन कानून पर बड़ा सवाल

By अभिनय आकाश | Apr 16, 2025

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक संयुक्त संसदीय समिति थी, जिसने 38 बैठकें कीं। इसने कई क्षेत्रों और शहरों का दौरा किया, परामर्श किया और लाखों सुझावों की जांच की। फिर यह दोनों सदनों में गया और फिर कानून पारित किया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुझे नहीं पता कि ये शब्द क्यों आए हैं। उस हिस्से को अनदेखा करें। मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग है जो नहीं चाहता कि मुस्लिम बोर्ड द्वारा शासित हो। अगर कोई मुसलमान दान करना चाहता है, तो वह ट्रस्ट के माध्यम से ऐसा कर सकता है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्ट का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से पूछा कि वक्फ बाय यूजर का पंजीकरण कैसे किया जाएगा, क्योंकि दस्तावेजों का अभाव हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्फ बाय यूजर को रद्द करने" से समस्या पैदा होगी, इसका कुछ दुरुपयोग भी हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 100 साल पहले का इतिहास फिर से नहीं लिखा जा सकता। सीजेआई संजीव खन्ना ने तुषार मेहता से कहा जहां पब्लिक ट्रस्ट को वक्फ घोषित किया गया है, मान लीजिए 100 या 200 साल पहले, आप पलटकर कहते हैं कि इसे वक्फ बोर्ड ने ले लिया है। मेहता ने तर्क दिया कि अगर आज वे मुसलमान होते, तो उन्हें वक्फ बनाने की जरूरत नहीं होती। वे ट्रस्ट बना सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि आप 100 साल पहले के इतिहास को फिर से नहीं लिख सकते!

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