By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? यह सवाल दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट पर पूछा है। इससे पहले 7 अक्टूबर को एलन मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट किया था। इसमें मस्क ने लिखा था कि भारत के कुछ बड़े बिजनेसमैन नहीं चाहते कि स्टारलिंक का सेटेलाइट इंटरनेट भारत में आए। क्योंकि ऐसा होने से उनका एक छत्रुराज खत्म हो सकता है। हालांकि तब एलन मस्क ने किसी का नाम नहीं लिया था। लेकिन 8 अक्टूबर को मस्क का एक और पोस्ट आया है और इस बार उन्होंने सीधे अंबानी का नाम लिया। भारत की बढ़ती वैश्विक साख और तेजी से मजबूत होती अर्थव्यवस्था को देखकर अब सिर्फ देश के अंदर बैठे विरोधी ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क के पेट में भी मरोड़ उठने लगी है और वो भी अब मोदी सरकार और अंबानी के खिलाफ खतरनाक खेल खेलने की फिराक में लग गए हैं। दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत के सेटेलाइट इंटरनेट मार्केट में पैर पसारने की फिराक में थी। लेकिन जब भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के मनमानी के आगे झुकने से इंकार कर दिया और देश के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया तो मस्क का असली रूप दुनिया के सामने आ गया। पहले मस्क ने भारत की कमर्शियल प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। फिर उन्होंने भारतीय उद्योगपतियों के लिए दिलचस्प शब्द का इस्तेमाल किया ऑलिगार्क। ऑलिगार्क का मतलब सिर्फ धन सेट नहीं होता है। कैमब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक ऑलिगार्क एक ऐसा धन्ना सेट होता है जो अपने कनेक्शन और अकूत दौलत के बल पर सरकार और समाज को इन्फ्लुएंस करता है। तो ऑलिगार्क एक नेगेटिव कनोटेशन वाला लफ्ज़ है। रूस में पुतिन जिन 10-12 धन्ना सेठों के बल पर पूरे देश को कंट्रोल करते हैं उन्हें रशियन ऑलिगार्क कहा जाता है। पूरी दुनिया जानती है कि किस तरह पुतिन के आशीर्वाद से इन्हें ठेके मिलते हैं और बदले में यह लोग पुतिन के कामों में पैसा लगाते हैं। पुतिन के जो दुश्मन है उनको परेशान करते हैं। सेठ भी खुश, नेता भी खुश और जनता जनता के लिए इस गेम में कोई जगह नहीं है। कुल मिलाकर कहे तो ऑलिगार्क एक नेगेटिव कनोटेशन वाला शब्द है। अकूत पैसा, पावरफुल कनेक्शन और ऐसा कोई शख्स जो ऐसे बिजनेस में हो जहां स्टार्लिंग उसका डायरेक्ट राइवल हो। सोशल मीडिया एक स्वर में मुकेश अंबानी का नाम ले रहा है। हालांकि जब भारत सरकार ने मस्क के तमाम बेबुनियादी आरोपों को खारिज कर दिया तो बौखलाहट में मस्क ने सीधे भारत के स्वाभिमान पर हमला बोलते हुए एक ट्वीट कर दिया और छूटते ही पूछा क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं। तुरंत ही उनके ट्वीट पर राहुल गांधी ने ऐसा रिएक्ट किया कि पूरा देश पूरे खेल को ही समझ गया कि ये दोनों मिलकर भारत में क्या खतरनाक खेल खेलने की कोशिश में लग गए हैं। लेकिन ठहरिए मस्क का यह बयान सिर्फ एक कारोबारी खीज नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बहुत खतरनाक क्रोनोलॉजी छिपी है। जैसे ही मस्क ने भारत और भारतीय कारोबारियों के खिलाफ जहर उगला वैसे ही देश के अंदर बैठे राहुल गांधी और उनका पूरा इकोसिस्टम मस्क के समर्थन में पलकें बिछाकर खड़ा हो गया। राहुल गांधी ने तुरंत सोशल मीडिया पर मस्क का स्वागत करते हुए भारतीय उद्योगपतियों और मोदी सरकार के खिलाफ तंज कस डाला। जिस पर मस्क ने भी राहुल को धन्यवाद दे दिया। सोचिए जो राहुल गांधी दिल्ली की सड़कों पर तांडव मचा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मोहल भड़का रहे हैं। वही राहुल गांधी अब भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले विदेशी अरबपति के सुर में सुर मिला रहे हैं।
स्टारलिंक भारत में सेटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए कई सालों से कोशिश कर रहा है। कंपनी को जून 2025 में जीएमपीसीएस लाइसेंस और जुलाई 2025 में आईए स्पेस से अनुमति मिल चुकी है। कंपनी ने भारत में ग्राउंड स्टेशन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना लिया है। लेकिन अभी भी सिक्योरिटी असेसमेंट, विदेशी निवेश की मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन बाकी है। आसान भाषा में समझे तो स्टार्लिंग को भारत में काम करने की इजाजत मिल चुकी है। लेकिन सर्विस शुरू करने के लिए जरूरी आखिरी हरी झंडी अभी नहीं मिली है। और इसी देरी को लेकर एलन मस्क अब खुलकर सवाल उठा रहे हैं। स्टार्लिंग ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय की सरकारों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट भी साइन किए हैं। बहरहाल मस्क के इस बयान के बाद भारत सरकार ने भी जवाब दिया है। संचार मंत्रालय ने स्टारलिंग के साथ किसी तरह का भेदभाव किए जाने के आरोप को खारिज किया है। दरअसल सरकार ने तीन कंपनियों को भारत में सेटेलाइट इंटरनेट सर्विस देने का लाइसेंस दिया है। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंग, Reliance Jio की Jio सेट और भारती के समर्थन वाली यूटेल सेट वन वेब शामिल है। लेकिन लाइसेंस मिलने के बावजूद यह कंपनियां अभी भारत में अपनी सर्विस शुरू नहीं कर सकती। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी जांच और स्पेक्ट्रम की मंजूरी जरूरी है।
मस्क एक एक्टिव पॉलिटिकल माइंड रखते हैं। दुनिया भर की पॉलिटिक्स को लेकर उनकी एक राय है। उनके दिमाग में स्कीम्स हैं। जर्मनी में चुनाव होते हैं तो वह दक्षिणपंथी एएफडी की तरफदारी करते हैं। ब्रिटेन में एंटी मुस्लिम नैरेटिव को हवा देते हैं। रिस्टोर ब्रिटेन और रिफॉर्म यूके जैसी पार्टियों का समर्थन करते हैं। अपने खुद के देश साउथ अफ्रीका में सरकार को टारगेट करते हैं। वाइट सुप्रीममेसी की बातें करते हैं। अब अगर मस्क सिर्फ़ दक्षिणपंथी ही होते पॉलिटिकली तो कोई कह सकता था कि इस हिसाब से मस्क को भारत में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। भारत में भी दक्षिणपंथी सरकार अभी है। लेकिन दिक्कत यह है कि मस्क कब पाला बदलेंगे किसी को आईडिया नहीं है। कभी वो ट्रंप के दफ्तर में नजर आते हैं बच्चों के साथ। तो कभी ऐसे ट्वीट करते हैं कि ट्रंप को बताना पड़ता है कि भले तुमने पैसा लगाया हो कैंपेन में लेकिन राष्ट्रपति मैं हूं। मुझसे डर के रहो। मस्क आज किसी पार्टी का हाथ पकड़ कर दाखिल होंगे। कल उसी के दुश्मन भी बन सकते हैं और इसमें किसी को हैरानी भी नहीं होगी।
थोड़ा पीछे चलते हैं, 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेता करीब आते हैं। डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी जीत का श्रेय एलन मस्क को ही एक्सपर्ट्स ने तब दिया था। उन्होंने ट्रंप का सिर्फ समर्थन ही नहीं किया बल्कि ट्रंप के प्रचार में लगभग सात करोड़ डॉलर खर्च भी किए। बात जब टाइमिंग की आती है तो राजनीति में कोई भी घटना इत्तेफाक नहीं होती है। एक तरफ जब विपक्ष एसआईआर के खिलाफ ज्ञानेश कुमार को मोहरा बनाकर सड़कों पर गदर काट रहा है। ठीक उसी वक्त एलन मस्क मोदी सरकार और भारतीय उद्योगपतियों को निशाना बना रहे हैं। अंबानी का नाम लेकर ना जाने क्या-क्या दिखाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जो मस्क आज भारत में कानून और नियमों की बात का रोना रो रहे हैं। क्या वो अमेरिका में भी इसी तरह की बयानबाजी करने की हिम्मत रखते हैं? जब ट्रंप प्रशासन ने चीन की दिग्गज इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी बीवाईडी पर 100 फीसदी तक भारी भरकम टेरिफ ठोक दिया था। तब तो मस्क की जुबान पर ताला लगा हुआ था। तब तो मस्क ने यह नहीं कहा कि अमेरिका में यह किसी से नहीं पूछा। क्या अमेरिका का बॉस एलन मस्क है? क्योंकि उन्हीं के कंपनियों की वजह से ट्रंप ने यह हरकत की थी। लेकिन जब भारत अपने सुरक्षा कारणों, राष्ट्रीय हितों, कानूनों का पालन करने के लिए निष्पक्ष नियम कानून लागू करता है तो मस्क को भारत में तानाशाही दिखने लगती है। भारत का बॉस अंबानी दिखने लगते हैं। सबसे अफसोसजनक बात तो यह है कि हमारे देश का विपक्ष यानी राहुल गांधी अपनी ही सरकार को घेरने के लिए ऐसे विदेशी कारोबारी के मोहरे बन जाते हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था और घरेलू कंपनियों की बढ़त से परेशान है। जबकि मोदी सरकार ने एकदम साफ कर दिया है कि देश का सेटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क एकदम निष्पक्ष और गैर भेदभाव वाला है। सरकार ने तीन कंपनियों के सुरक्षा और कागजी गाइडलाइंस पूरे ना करने पर प्रोसेस को रोका है। जिसमें स्टार्लिंग, Jio सेट और यूटिल सेट वनवे तीनों शामिल हैं। तीनों कंपनियां एक ही सुरक्षा जांच के चरण में है। लेकिन मस्क चाहते हैं कि उन्हें बिना सुरक्षा क्लीयरेंस के स्पेशल ट्रीटमेंट मिले। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने भारत को बदनाम करना शुरू कर दिया।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि एक खास कंपनी की काफी चर्चा हो रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि तीन कंपनियों को उपग्रह संचार (सैटकॉम) लाइसेंस मिल चुके हैं और वे सुरक्षा संबंधी शर्तों तथा निर्धारित लक्ष्यों को अलग-अलग पूरा करने के बाद परिचालन शुरू कर सकती हैं। उपग्रह संचार सेवाओं को लेकर जारी विवाद और अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के आरोपों के बीच उन्होंने यह टिप्पणी की है। मस्क ने दावा किया है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह उनकी कंपनी स्टारलिंक की उपग्रह संचार सेवाओं को शुरू होने से रोक रहे हैं। मस्क ने आरोप लगाया था कि ये समूह भारतीय लोगों पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। हमारा काम हर ग्राहक को सेवाओं के व्यापक विकल्प उपलब्ध कराना है। खुले बाजार में ग्राहक को यह चयन करना होगा कि वह कौन-सी सेवा पसंद करता है और उन विकल्पों में से किस कंपनी की सेवा लेना चाहता है। सिंधिया ने कहा कि मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो की उपग्रह सेवा इकाई जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को लाइसेंस मिल चुके हैं। वहीं, अमेजन की कुइपर ने इस क्षेत्र में रुचि दिखाई है और उसे निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। मंत्री ने कहा कि एक खास कंपनी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन सैटकॉम के लाइसेंस तीन सेवा प्रदाताओं को मिले हैं।