क्या सचिन पायलट करेंगे नई पार्टी का गठन ? पुराने साथियों के साथ साध रहे संपर्क

By अनुराग गुप्ता | Jul 18, 2020

जयपुर। राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ जारी तनातनी के बीच अब सचिन पायलट अपनी नई शुरुआत करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। प्रदेश में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार को बचाने की हरमुमकिन कोशिश कर रहे हैं साथ ही साथ उन्होंने सचिन पायलट पर सरकार को अस्थिर करने का भी आरोप लगा दिया। दूसरी तरह कि क्या सचिन पायलट वापस कांग्रेस में शामिल होंगे ? इस सवाल पर उस वक्त पानी फिर गया जब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सचिन पायलट द्वारा कोर्ट का रुख किए जाने के बाद से इस बात ने जोर पकड़ ली कि अब वह नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सचिन पायलट अभी संभावनाओं को टटोल रहे हैं और इसके लिए वह अपने सहयोगियों से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे है। सचिन ने उन लोगों पर दांव खेलने का विचार बना है जो या तो कांग्रेस से अलग हो गए या फिर पार्टी ने जिन्हें हाशिए पर खड़ा कर दिया है। 

सचिन पायलट हाल ही कांग्रेस पार्टी से निलंबित किए गए संजय झा के संपर्क में है। इसके अतिरिक्त चर्चाएं हैं कि पायलट मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, प्रिया दत्त, अशोक तंवर और कुलदीप विश्नोई से बातचीत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का एक धड़ा पार्टी के आलाकमान से नाराज है और हाल ही में जिस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी छोड़ी फिर सचिन पायलट ने बागी रूख अख्तियार किया, ऐसी घटनाएं साफ-साफ बता रही हैं कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है।

हालांकि खबर ये भी है कि पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम सचिन पायलट को पार्टी में वापस लौटने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही साथ कहा जा रहा है कि पायलट के मुद्दे को भी सुलझाने का प्रयास भी किया जाएगा। 

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कांग्रेस खेमे के हैं सभी नाम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सचिन पायलट जिन लोगों से भी संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं वो तमाम लोग पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खेमे के हैं और जिनके संबंध कभी राहुल के साथ काफी अच्छे थे। बता दें कि राहुल गांधी द्वारा अध्यक्ष पद छोड़े जाने के बाद से उनके खेमे के नेताओं को एक के बाद एक साइड लाइन किए जाने का आरोप पार्टी पर लगते रहे है। ऐसे में अगर सचिन पायलट साइड लाइन किए गए युवा नेताओं को अपनी तरफ लाने में कामयाब होते हैं तो कांग्रेस पार्टी को टूट की कगार पर पहुंच सकती है।

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