क्या 2036 का ओलंपिक भारत में होगा? मेजबानी का भारतीय इतिहास, चुनौतियां और संभावनाओं पर एक नजर

By अभिनय आकाश | Aug 26, 2021

2024 का ओलंपिक फ्रांस के पेरिस में होगा तो 2028 में अमेरिका का लांस एंजेलिस ओलंपिक की मेजबानी करेगा। 2032 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन का दावा सबसे मजबूत है। 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी पर निर्णय नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा है कि भारत उन कई देशों में शामिल है जो 2036, 2040 और इसके बाद होने वाले ओलंपिक की मेजबानी के इच्छुक हैं। आईओसी ने हाल में घोषणा की थी कि ब्रिसबेन 2032 ओलंपिक की मेजबानी करेगा। बता दें कि हाल के दिनों में खेलों की मेजबानी के लिए संभावित दावेदारों की संख्या में कमी आई है। इतने बड़े बहु-विषयक कार्यक्रम के आयोजन से जुड़ी बढ़ती लागत और विवाद से कई देशों की रूचि को कम किया है। 

थॉमस बाक ने क्या कहा?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ एक साक्षात्कार में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक के हवाले से कहा गया है कि पिछले महीने 2032 खेलों की मेजबानी के लिए आस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन को चुने जाने के बावजूद आईओसी के पास 2036, 2040 और इसके बाद होने वाले ओलंपिक खेलों की मेजबानी के इच्छुक देशों की कतार है। खबर के अनुसार मेजबानी के इच्छुक देशों में इंडोनेशिया, भारत, जर्मनी और कतर शामिल हैं। ‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ ने बाक के हवाले से कहा, ‘‘और ये सिर्फ वे नाम हैं जो मेरे दिमाग में आ रहे हैं। इसलिए हम काफी अच्छी दीर्घकालिक स्थिति में हैं।’’

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खेलों की मेजबानी करने में रुचि रखने वाले देश कौन से हैं?

बाक द्वारा उल्लिखित चार देशों में से तीन एशिया से हैं और उन्होंने पहले ओलंपिक की मेजबानी नहीं की है। मेजबानी के इच्छुक देशों में इंडोनेशिया, भारत, जर्मनी और कतर शामिल हैं। भारत ने अक्सर ओलंपिक की मेजबानी करने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन इस प्रक्रिया में कभी आगे नहीं बढ़ा। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) पहले कह चुका है कि वह अगले डेढ़ दशक में एशियाई खेलों, युवा ओलंपिक और ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी करना चाहता है। IOA के महासचिव राजीव मेहता ने पुष्टि की है कि वे इस विचार में रुचि रखते हैं। दिल्ली सरकार ने कहा है कि उसका लक्ष्य 2048 में भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में खेलों का मंचन करना है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस साल मार्च में कहा था कि वह स्वतंत्रता के 100 बरस के मौके पर 2048 खेलों की सफल बोली के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और बुनियादी ढांचे में सुधार करेंगे। कतर का छोटा खाड़ी राज्य अगले साल फीफा विश्व कप की मेजबानी करेगा। यह मैनचेस्टर सिटी जैसे क्लबों का अधिग्रहण करके और अन्य देशों के कुलीन खिलाड़ियों को नागरिकता प्रदान करके खेल जगत में अपने पदचिह्न का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। ओलंपिक उस प्रयास का एक स्वाभाविक विस्तार हो सकता है। भारत इसके अलावा 2030 एशियाई खेलों और 2026 युवा ओलंपिक खेलों की मेजबानी का भी इच्छुक था। एशियाई खेल 2030 और 2034 की मेजबानी दिसंबर में क्रमश: कतर और रियाद को सौंपी गई।

मेजबानी का भारतीय इतिहास 

भारत ने क्रिकेट विश्व कप, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और फीफा-यू 17 विश्व कप जैसे कई बहु-राष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी की है। ओलंपिक की मेजबानी के लिए तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक कर्मियों और सुविधाओं की आवश्यकता होती है। देश 2021 टी20 विश्व कप और 2023 क्रिकेट विश्व कप की मेजबानी करने वाला है। ये साबित करने के मौके हैं कि हम ऐसे बड़े आयोजनों को सुगम बना सकते हैं। 

चुनौतियां और संभावनाएं 

चुनौती: कोरोना वायरस की वजह से एक साल आगे खिसकाए जाने की वजह से हालिया सपन्न टोक्यो ओलंपिक इतिहास में सबसे महंगा आयोजनों में से एक था। मूल बजट में कई बार तब्दीली हुई और लगभग सभी स्थानों पर विदेशी आगंतुकों और दर्शकों पर प्रतिबंध से राजस्व में भी कमी आई थी। 2016 के रियो खेलों को जीका वायरस ने घेरा था। जबकि ग्रीस को 2004 के ओलंपिक की मेजबानी के आर्थिक प्रभावों का सामना करना पड़ा। टोक्यो खेलों के शुरू होने तक, अधिकांश जापानी आबादी इस आयोजन की मेजबानी के खिलाफ थी क्योंकि कोरोनो वायरस फैलने की चिंता थी। ओलंपिक के लिए बोली लगाना और पैरवी करना भी एक महंगा काम है। ओलंपिक से उत्पन्न होने वाला दीर्घकालिक आर्थिक बोझ कई देशों के लिए बहुत बड़ा हो सकता है। संभावनाएं: किसी भी देश के खेल इतिहास में ओलंपिक की मेजबानी एक ऐसा दुर्लभ अवसर होता है, जो उसे खेल तंत्र की मजबूती और पीढिय़ों को नित नई सफलताओं की ऊर्जा देते हुए दुनिया के नक्शे पर छा जाने की सौगात भी देता है। ओलंपिक के इतिहास को देखें, तो मेजबान बनने के बाद अमरीका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, कोरिया, जर्मनी, रूस, कनाडा और ब्राजील जैसे कई देशों में खेलों के संतुलित और सुदीर्घ विकास का स्थायी आधार तैयार हुआ है, जिसे पूरी तरह भुनाते हुए उन्होंने न केवल दुनिया में खेल शक्ति और महाशक्ति बनने की मंजिल तय की है, बल्कि आर्थिक-सामाजिक प्रगति के आयाम तय करते हुए चहुंमुखी विकास की संभावनाओं के द्वार भी अपने नागरिकों के लिए खोले हैं।  

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