By अभिनय आकाश | Sep 12, 2026
26 मई 2022 इंडियन एक्सप्रेस में तड़के सुबह 4:00 बजे एंड्र्यू एमसन की एक रिपोर्ट पब्लिश हुई। रिपोर्ट की हेडलाइन और इसकी कवर फोटो ऐसी जिसने सबका ध्यान खींचा। फोटोग्राफर अभिनव साह की इस तस्वीर के साथ जो रिपोर्ट थी उसकी हेडलाइन थी स्टेडियम इज एंप्टीड एथलीट्स टोल्ड टू लीव सो दैट आईएएस ऑफिसर कैन वॉक विद डॉग। रिपोर्ट के मुताबिक त्यागराज स्टेडियम में खिलाड़ी और कोच से शाम 7:00 बजे तक ट्रेनिंग खत्म करने को कहा जा रहा था। ताकि दिल्ली के तब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेवेन्यू वाले आईएएस संजीव खिरवार अपने कुत्ते को स्टेडियम में घुमा सकें। तस्वीर में संजीव खेरवार अपनी आईएएस पत्नी रिंकू डुग्गा और अपने कुत्ते के साथ स्टेडियम में टहलते हुए दिखाई दे रहे थे। उन दिनों रिंकू दिल्ली सरकार में सेक्रेटरी लैंड एंड बिल्डिंग थी। इस रिपोर्ट के आते ही विवाद खड़ा हुआ। राजनीतिक बयानबाजी भी हुई और मांग हुई। अफसर पर कारवाई की। रिपोर्ट पब्लिश होने के 18 घंटे के अंदर ही खबर आई कि स्टेडियम में कुत्ता टहलाने वाले अफसर को दिल्ली से लद्दाख भेज दिया गया और उनकी पत्नी जो खुद भी एक आईएएस अफसर हैं उन्हें अरुणाचल प्रदेश। हालांकि कुत्ता कहां भेजा गया? इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इस विवाद ने बड़े अफसरों के एडमिनिस्ट्रेटिव पावर के मिसयूज का मुद्दा उठाया था। हालांकि तबादला होने के बाद इस विवाद पर अल्पविराम भी लग गया था। लेकिन एक साल बाद ही खबर आई कि आईएस रिंकू के करियर रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट पर भेज दिया था। रिंकू दुग्गा ने इस फैसले को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल यानी कि सीएटी में चुनौती दी। 8 अगस्त 2025 को कैट ने उनका कंपलसरी रिटायरमेंट आर्डर रद्द कर दिया और उनकी बहाली का रास्ता साफ कर दिया। केंद्र सरकार इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची लेकिन 15 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कैट के फैसले को बरकरार रखा। यानी हाईकोर्ट के फैसले के बाद रिंकू दुग्गा की नौकरी में वापसी का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 7 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया और फिलहाल उनकी रीइस्टमेंट यानी कि बहाली पर रोक लगा दी। अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
7 अगस्त 2023 को रिंकू दुगा को कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया गया। रिंकू दुगा ने इसे कैट में चुनौती दी। 8 अगस्त 2025 को कैट ने सरकार का आदेश रद्द कर दिया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। 15 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने भी कैट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट की रीजनिंग भी काफी अहम थी। कोर्ट ने कहा कि रिव्यू कमेटी ने रिंकू दुग्गा के सर्विस रिकॉर्ड के कई अहम पहलुओं को ठीक से कंसीडर नहीं किया। उनके एपीएआर यानी कि एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट्स में एडवर्स रिमार्क नहीं था और कंपलसरी रिटायरमेंट से पहले के 5 सालों में उनकी ग्रेडिंग आउटस्टैंडिंग रही थी। कई डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटीज यानी कि डीपीसीएस ने भी उनकी इंटीग्रिटी को सर्टिफाइड माना था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपलसरी रिटायरमेंट का मकसद आमतौर पर ऐसे अधिकारियों को सर्विस से हटाना होता है जिन्हें सरकार आगे काम के लिए उपयोगी नहीं मानती। ऐसे अधिकारियों के लिए अक्सर डेड वुड शब्द इस्तेमाल किया जाता है। कोर्ट के मुताबिक रिंकू दुगा के मामले में रिव्यू कमेटी ने उनके रिकॉर्ड को बाकी अधिकारियों से अलग तरीके से स्क्रूटनाइज किया था। लेकिन इसका पर्याप्त कारण नहीं बताया गया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कंपलसरी रिटायरमेंट के फैसले को गलत माना और कैट के आदेश को बरकरार रखा।
केंद्र सरकार यहीं नहीं रुकी। सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अब 7 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रिंकू दुगा की बहाली पर रोक लगा दी है। यानी अभी रिंकू दुगा की सरकारी सेवा में वापसी नहीं होगी। अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। अब सबकी नजर 13 अक्टूबर की सुनवाई पर है। उस दिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है उससे तय होगा कि रिंकू दुगा की सरकारी नौकरी में वापसी का रास्ता खुलता है या कंपलसरी रिटायरमेंट का फैसला बरकरार रहता है।