By अभिनय आकाश | Mar 05, 2026
दुनिया में सिर्फ पांच देश ही ऐसे हैं जो मिसाइल से धरती के किसी भी कोने को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। यह देश हैं अमेरिका, रशिया, चाइना, ब्रिटेन और फ्रांस। अगर इंडिया की बात करें तो हमारी मिसाइलों की रेंज में लगभग सभी स्ट्रेटेजिक एनिमीज़ आते हैं। बाकी देशों की बात करें तो पाकिस्तान की मिसाइलें भी तमाम अन्य देशों के कई शहरों तक पहुंच सकती हैं। भारत के भी कई शहरों तक इसकी रेंज है। इजराइल की बात करें तो ज़ेरिको 3 जैसी मिसाइलें 4800 किमी दूर बैठे टारगेट को भी निशाना बना सकती हैं। इन्हीं मिसाइलों के दम पर मिडिल ईस्ट में ईरान ने वो कर दिखाया जिसकी अमेरिका को उम्मीद तक नहीं थी। पिछले 24 घंटे में ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी एंबेसी पर ड्रोन से अटैक किए। साथ ही गल्फ देशों के ऊर्जा ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इस हमले से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और तमाम आशंकाएं भी पनपी हैं। ईरान ने कुवैत और दुबई में अमेरिकी मिलिट्री बेसिस को निशाना बनाया है। ईरान ने एक ड्रोन हमले में सऊदी अरब स्थित अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के स्टेशन को उड़ा दिया है। यह हमला ऐसे समय में किया गया है जब पता चला है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ईरान में विद्रोह भड़काने के लिए कुर्द लड़ाकों को हथियार देने की योजना बना रही है। मतलब साफ है कि 4 दिन पहले शुरू हुई यह जंग अब लंबी खींचती दिख रही है। ऐसे में ईरान की ताकत का आकलन भी करना जरूरी है।
मध्य पूर्व में एक छोटे से ईरानी आत्मघाती ड्रोन द्वारा सऊदी अरब में किए गए हमले ने क्षेत्रीय राजनीति को नई दिशा दे दी है। इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या हजारों किलोमीटर दूर स्थित पाकिस्तान भी इस संघर्ष में खिंच सकता है। दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के 132 दिन बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 17 सितंबर को एक डिफेंस डील साइन की है। डिफेंस अग्रीमेंट ये भी कहता है कि अगर एक देश पर हमला हुआ तो दूसरा देश उसे खुद पर भी हमला मानेगा। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या पाकिस्तान इस समझौते के तहत सऊदी अरब की मदद के लिए युद्ध में उतरने को तैयार होगा। यदि पाकिस्तान इस समझौते को पूरी तरह लागू करता है, तो इसका मतलब होगा कि दोनों देश मिलकर संयुक्त और समन्वित जवाबी कार्रवाई करेंगे। हालांकि इस समझौते में यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी स्थिति में परमाणु हथियारों के उपयोग की संभावना भी शामिल होगी या नहीं। पाकिस्तान का फैसला न केवल मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और शक्ति संतुलन को भी तय कर सकता है। यदि इस समझौते के तहत संयुक्त कार्रवाई होती है, तो यह संघर्ष सीमित क्षेत्रीय विवाद से बढ़कर बड़े भू-राजनीतिक टकराव का रूप भी ले सकता है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार द्वारा अपने ईरानी समकक्ष को सऊदी अरब पर हमला न करने के संदेश से पाकिस्तान की मंशा का एक मोटा-मोटा अंदाजा लगाया जा सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष को सऊदी अरब पर हमला न करने की चेतावनी दी। डार ने कहा कि मैंने ईरान को समझा दिया है कि हमारा ईरान के साथ रक्षा समझौता हुआ है।' यह पहली बार है जब पाकिस्तान का कोई बड़ा अधिकारी साफ-साफ बता रहा है कि ईरान युद्ध में यह रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है। डार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान-सऊदी अरब सुरक्षा समझौता रियाद के लिए ढाल बना और वहां कोई बड़ा हमला नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'सभी दूसरे देशों के मुकाबले सऊदी अरब पर सबसे कम हमले हुए।' साथ ही डार ने बताया कि ईरान ने इस्लामाबाद से गारंटी मांगी कि सऊदी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए न किया जाए।
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ डिफेंस अग्रीमेंट ये भी कहता है कि अगर एक देश पर हमला हुआ तो दूसरा देश उसे खुद पर भी हमला मानेगा। कुछ वैसा ही समझौता जैसा नाटो के सदस्य देशों के बीच है। भले कहा जा रहा है कि ये समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे ऐतिहासिक रिश्तों का परिणाम है। लेकिन भारत के लिए ये डेवलपमेंट चिंता बढ़ाने वाला है। पाकिस्तान और सऊदी अरब की ओर से फिलहाल सैन्य करार के सभी प्रावधानों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पाक द्वारा सऊदी को एटमी सुरक्षा देने के सवाल पर एक सऊदी अफसर ने दावा किया कि करार में सभी सैन्य विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है। पाक और सऊदी अरब का कहना है कि पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच इस सैन्य करार के बारे में गहन विमर्श चल रहा था। अब डील को फाइनल किया गया है। पाक और सऊदी अरब का कहना है कि ये करार किसी भी तीसरे देश को मद्देनजर रखते हुए नहीं किया गया है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर 2025 में इज़राइल द्वारा दोहा और कतर पर हवाई हमले किए जाने के बाद सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा के लिए नए साझेदार तलाशने शुरू किए थे। उस घटना ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अमेरिका की क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद रियाद ने वैकल्पिक सुरक्षा विकल्पों की ओर ध्यान दिया। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के सीधे तौर पर मध्य पूर्व के युद्ध में कूदने की संभावना कम है। लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान की मौजूदगी सऊदी अरब की रणनीति को मजबूत कर सकती है। SMDA समझौते के कारण पाकिस्तान सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों को अतिरिक्त ताकत दे सकता है।
फिलहाल पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने केवल चेतावनी दी है और स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के लिए युद्ध में शामिल होगा या नहीं।
अमेरिका ईरान पर मिसाइल दाग रहा है। इजराइल तेहरान को धुआधुआ कर रहा है। बदले में ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेसिस और इजराइल पर सुपरसोनिक मिसाइल से हमले कर रहा है। लेकिन इस युद्ध का आफ्टर इफेक्ट पाकिस्तान में दिख रहा है। मुनीर को लग रहा है कि अब बहुत जल्द पाकिस्तान का नंबर आने वाला है। इस वक्त पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। जबरदस्त पैनिक है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कहा जा रहा है कि ईरान के बाद पाकिस्तान पर हमले की तैयारी शुरू हो गई। पाकिस्तान के पत्रकार कह रहे हैं कि मोदी ने नेतन्याह के साथ मिलकर मुनीर पर हमले का प्लान रेडी कर लिया। पाकिस्तान के फॉर्मर मेजर कह रहे हैं कि डर के मारे आसिम मुनीर बंकर में जा छिपा है। पाकिस्तान चारों तरफ से साजिशों से घिरा हुआ है और सिर्फ साजिशों से ही नहीं घिरा हुआ बल्कि कुछ ऐसी ताकतों के गिर्द भी पाकिस्तान घिरा हुआ है जो पाकिस्तान को नाकाम और नामुराद करना चाहते हैं। पाकिस्तान के अंदर दहशतगर्दी फैलाई हुई थी और जो ईरान के ऊपर इसराइल ने हमला किया है उसकी टाइमिंग को देखें। ये एक सिर्फ अफगानिस्तान, पाकिस्तान या ईरान की बात नहीं है। ये रीजनल डायमेंशन की बात हो रही है। और ये सिर्फ और सिर्फ ये जो प्लानिंग है वो पाकिस्तान के खिलाफ है।