भारत के आंतरिक मामलों में किस अधिकार से हस्तक्षेप कर रही हैं विदेशी सरकारें?

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Dec 08, 2020

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो, ब्रिटेन के 36 सांसदों और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुतरोस ने भी भारत में चल रहे किसान-आंदोलन से सहानुभूति व्यक्त की है। उन्होंने यही कहा है कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने देना चाहिए और उनकी कठिनाइयों को सरकार द्वारा दूर किया जाना चाहिए। इस पर हमारे कुछ सरकारी और भाजपा-प्रवक्ता भड़क उठे हैं। वे इन लोगों से कह रहे हैं कि आप लोग हमारे अंदरुनी मामलों में टांग क्यों अड़ा रहे हैं ? उनका यह सवाल रस्मी तौर पर एकदम ठीक है। वह इसलिए भी ठीक है कि भारत सरकार के मंत्रिगण किसान नेताओं के साथ बहुत नम्रता और संयम से बात कर रहे हैं और बातचीत से ही इस समस्या का समाधान निकालना चाहते हैं।

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हालांकि उनका यह तमाचा त्रूदो पर सही बैठा है कि विश्व-व्यापार संगठन में जो त्रूदो सरकार किसानों को समर्थन मूल्य देने का डट कर विरोध कर रही है, वह किस मुंह से भारत सरकार पर उपदेश झाड़ रही है ? भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा कनाडा द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद का भी बहिष्कार कर दिया गया है। उन्होंने ऐसा ही अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल के एक बयान पर आपत्ति दिखाने के लिए किया था। उन्हें अपने गुस्से पर काबू करना चाहिए, वरना ये छोटी-छोटी लेकिन उग्र प्रतिक्रियाएं हमारी विदेश नीति के लिए हानिकर सिद्ध हो सकती हैं। आधुनिक दुनिया बहुत छोटी हो गई है। विभिन्न देशों के राष्ट्रहितों ने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। इसीलिए देशों के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप अपने आप हो जाता है।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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