By अभिनय आकाश | Jun 05, 2026
पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के दृढ़ रुख को दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का हथियार रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने जैसा कड़ा रणनीतिक कदम उठाया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई यह ऐतिहासिक जल-बंटवारा संधि अब पाकिस्तान के आतंकवादी रवैये के कारण पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में है।
भारत और पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे के समझौते सिंधु जल संधि (IWT) पर 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सिंधु नदी प्रणाली में तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास और सतलुज और उनकी सहायक नदियाँ) और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम और चिनाब और उनकी सहायक नदियाँ) शामिल हैं। संधि के अनुसार, भारत सिंधु प्रणाली के कुल जल का लगभग 20% नियंत्रित करता है, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% मिलता रहा था। 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने प्रतिक्रिया में कई सख्त उपायों की घोषणा की, जिसमें सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना भी शामिल है। दरअसल, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत पाकिस्तान को 6 बेसिन नदियों में से 3 का पानी मिला। सिंधु, झेलम और चिनाब जबकि भारत को रावी, व्यास और सतलुज का पानी मिला। लेकिन अब जब भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने का फैसला किया तो सबसे पहला कदम सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती और 30 प्रतिशत पावर प्रोजेक्ट सिंधु जल पर टिके हैं। पानी रुकने पर पाकिस्तान की कमर टूट गई।