By अभिनय आकाश | Jun 17, 2026
ईरान के साथ महीनों तक चले तनाव के बाद भी अमेरिका को वह नतीजा नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी। अपनी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव, महंगाई और तेल संकट की चिंता के बीच वाशिंगटन अब एक बार फिर रूस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में दिख रहा है। सवाल यह है कि जो अमेरिका अभी तक ईरान संकट के असर से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया है, वह अब रूस पर नए प्रतिबंधों का ऐलान क्यों कर रहा है? फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हमला हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर भारत की जेब और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
ऐसे भारत की मुश्किलें शुरू होती हैं। पिछले कई महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा है। यही वजह रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में तेल की कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा। लेकिन अगर अमेरिका रूस पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लागू करता है तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है। भुगतान से लेकर शिपिंग तक कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं। 17 जून की डेडलाइन पर सबकी नजर। सबसे अहम बात यह है कि रूसी तेल पर दी गई अमेरिकी छूट की समय सीमा 17 जून को खत्म हो रही है। अगर इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो दुनिया के तेल बाजार में फिर हलचल मच सकती है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। मोदी ने भी जताई चिंता। G7 सम्मेलन में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चैन प्रभावित हो रही है।