Work from UK नहीं चलेगा; Vijay Mallya को Bombay High Court का सख्त संदेश, भारत आना ही होगा

By Neha Mehta | Feb 12, 2026

लंबे समय से ब्रिटेन में बैठे 'किंग ऑफ गुड टाइम्स' यानी विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कड़ा संदेश दे दिया है। गुरुवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस ने साफ कर दिया कि अगर माल्या को भारतीय अदालतों से कोई राहत चाहिए, तो उन्हें पहले भारत की जमीन पर कदम रखना होगा। कोर्ट का मिजाज देखकर तो यही लगता है कि अब "वर्क फ्रॉम होम" (या कहें कि "वर्क फ्रॉम यूके") वाली दलीलें कानून के सामने नहीं टिकेंगी।


"कानून से भागना और फायदा उठाना, दोनों साथ नहीं चलेंगे"-सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने काफी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि माल्या एक तरफ तो भारतीय कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं और दूसरी तरफ उसी सिस्टम से अपने लिए राहत की उम्मीद कर रहे हैं—ऐसा नहीं हो सकता।


अदालत ने सीधे शब्दों में कहा कि आपको वापस आना ही होगा। अगर आप लौटकर नहीं आ सकते, तो हम आपकी इस याचिका पर सुनवाई भी नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि माल्या को सुनने के लिए उनकी शारीरिक मौजूदगी (Physical Presence) पहली शर्त है। आप देश से बाहर रहकर केवल याचिकाएं फाइल करके सिस्टम का फायदा नहीं उठा सकते।


क्या है पूरा मामला?

70 वर्षीय शराब कारोबारी विजय माल्या साल 2016 से ब्रिटेन में हैं। उन पर भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दो मुख्य याचिकाएं लगा रखी हैं:


  • उन्हें 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' (FEO) घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती।
  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEO Act) की संवैधानिक वैधता पर सवाल।

दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि माल्या ने इस कानून को चुनौती तभी दी जब उन्हें खुद 'भगोड़ा' घोषित कर दिया गया।


कोर्ट ने दिया आखिरी मौका

चीफ जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी के लिए टाल दी है। लेकिन, जाते-जाते माल्या को एक होमवर्क भी दे दिया है। कोर्ट ने उनके वकील से कहा कि वे एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करें जिसमें साफ़-साफ़ लिखा हो कि माल्या भारत कब लौट रहे हैं।


कोर्ट ने नरमी दिखाते हुए कहा, "हम अभी आपकी याचिका खारिज नहीं कर रहे हैं, बल्कि आपको एक मौका और दे रहे हैं। हमें यह रिकॉर्ड न करना पड़े कि आप कोर्ट की प्रक्रिया से भाग रहे हैं।"हालांकि, माल्या के सीनियर वकील अमित देसाई ने दलील दी कि पुराने कानूनी उदाहरणों के हिसाब से याचिकाकर्ता की फिजिकल मौजूदगी के बिना भी सुनवाई हो सकती है, लेकिन कोर्ट फिलहाल इस मूड में नजर नहीं आ रहा।


अब देखना यह है कि 18 फरवरी तक क्या विजय माल्या भारत आने का मन बनाते हैं या फिर उनके वकील कोई नई कानूनी पैंतरा ढूंढ निकालते हैं। फिलहाल तो बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपनी लकीर खींच दी है—राहत चाहिए तो स्वदेश वापसी अनिवार्य है।

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