By Ankit Jaiswal | Aug 16, 2026
दिल्ली में सोमवार से शुरू होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में खिलाड़ियों की परीक्षा सिर्फ उनकी रफ्तार, स्मैश और नेट के पास की चाल से नहीं होने वाली है। इस बार मौसम, हवा की दिशा और उमस भी खेल का रुख बदल सकती है। दिल्ली में लगातार बदलते मौसम और 70 से 90 प्रतिशत तक पहुंच रही नमी के बीच खिलाड़ियों को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम की परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बैठाना होगा।
स्टेडियम में तापमान नियंत्रित रखने के लिए वातानुकूलन व्यवस्था लगातार चलानी पड़ सकती है। लेकिन यहां हवा का मामूली बहाव भी बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वातानुकूलन, पंखों, दरवाजों या हवा के आवागमन से पैदा होने वाली हल्की हवा भी शटल की दिशा बदल सकती है। इसका असर ऊंचे शॉट, ड्रॉप, लिफ्ट और स्मैश पर पड़ता है।
खिलाड़ियों ने अभ्यास के दौरान इन बदलावों को महसूस भी किया है। चीन की दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी वांग झी यी ने अभ्यास के बाद कहा कि कोर्ट पर उन्हें हल्की हवा महसूस हुई और खिलाड़ियों को इन परिस्थितियों का अभ्यस्त होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी माना कि स्टेडियम में काफी बदलाव किए गए हैं और आयोजन स्थल को बेहतर तरीके से तैयार किया गया है।
वहीं, टोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता चेन यू फेई ने कहा कि उन्हें अभी कोर्ट की परिस्थितियों को पूरी तरह समझने का पर्याप्त मौका नहीं मिला है। चेन कई बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं, लेकिन वह अब तक इस प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम नहीं कर पाई हैं।
दूसरी ओर, दुनिया के सातवें नंबर के खिलाड़ी ली शिफेंग कोर्ट की स्थिति से खुश नजर आए। उन्होंने आयोजन स्थल और कोर्ट की तैयारी की तारीफ करते हुए कहा कि हवा का बहाव और मौसम से जुड़ी परिस्थितियां अच्छी तरह संभाली गई हैं। उनका मानना है कि इस बार आयोजन स्थल पहले की तुलना में बेहतर तैयार है।
गौरतलब है कि यही जगह जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान भी खिलाड़ियों की मेजबानी कर चुकी है, लेकिन कुछ खिलाड़ियों का कहना है कि इस समय परिस्थितियां अलग महसूस हो रही हैं। इसका कारण दिल्ली का मौजूदा मौसम और वातावरण में मौजूद नमी है।
बैडमिंटन में शटल की गति पर हवा और वातावरण का सीधा असर पड़ता है। हवा की दिशा बदलने से एक ही शॉट अलग गति से आगे बढ़ सकता है। इसलिए खिलाड़ियों को अपनी ताकत, शॉट की ऊंचाई और समय के हिसाब से बदलाव करना पड़ता है। गर्मी और उमस के कारण ऊर्जा भी जल्दी खर्च होती है, जिससे लंबे मुकाबलों में अंतर पैदा हो सकता है।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में कबूतरों को दूर रखने के लिए लगाया गया विशेष गैर-विषैला जेल भी तापमान के प्रति संवेदनशील है। अगर स्टेडियम ज्यादा गर्म हुआ तो इसकी स्थिरता प्रभावित हो सकती है और यह नीचे रखी सीटों पर गिर सकता है। इससे भी आयोजन के दौरान तापमान नियंत्रित रखने की अहमियत समझी जा सकती है।
बता दें कि विश्व चैंपियनशिप में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी मौजूद हैं और यहां छोटी से छोटी परिस्थिति भी नतीजे पर असर डाल सकती है। इसलिए सोमवार से मुकाबले शुरू होने के बाद दर्शकों की नजर सिर्फ खिलाड़ियों के स्मैश और रैलियों पर नहीं, बल्कि दिल्ली की हवा, उमस और कोर्ट की परिस्थितियों पर भी रहेगी। इस प्रतियोगिता में परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बैठाने वाले खिलाड़ी बढ़त हासिल कर सकते हैं।