By दिव्यांशी भदौरिया | Feb 04, 2026
कैंसर एक घातक और जानलेवा बीमारी है। कैंसर का नाम सुनते ही हर एक व्यक्ति डरने लगता हैं। अगर सही समय पर कैंसर का पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव वरना इसे बचना नामुमकिन। आमतौर पर इसका इलाज भी काफी महंगा है, कई बार होता है कि पैसे के अभाव के कारण मरीज का सही से इलाज नहीं हो पाता है। एनसीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें कैंसर सेल्स तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने लगते हैं। ये सेल्स शरीर में गांठ बना सकती और आसपास के हेल्दी टिश्यूज को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। हालांकि, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसे कुछ कैंसरों में गांठ नहीं बनती। दरअसल, हर साल लाखों की संख्या में लोग कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इसी कारण से कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल विश्वभर में कैंसर दिवस मनाया जाता है। हर साल 4 फरवरी को कैंसर दिवस मनाया जाता है। जानें इसका इतिहास, थीम और महत्व।
क्यों मनाया जाता है विश्व कैंसर दिवस?
गौरतलब है कि कैंसर का लाइलाज नहीं है, अगर समय पर पहचान और सही इलाज हो। इसके साथ ही यह मरीजों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक समर्थन देने का संदेश भी देता है। हर साल 4 फरवरी को कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए World Cancer Day मनाया जाता है।
वर्ल्ड कैंसर डे की थीम
आपको बता दें कि, हर साल अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ द्वारा कैंसर दिवस को मनाए जाने के लिए एक विशेष थीम नियुक्त की जाती है। इस साल की थीम है 'United by Unique'। इस थीम का उद्देश्य कैंसर से पीड़ित हर व्यक्ति के निजी यात्रा, जरुरतें और अनुभवों को जोड़ना है। इसे सरल शब्दों में समझें कि यूनाइटेड बाय यूनिक का अर्थ है कि कैंसर से पीड़ित हर मरीज की अपनी कहानी होती है, हालांकि इसके लिए हमें बीमारी पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के अनुभवों और जरुरतों पर ध्यान देना जरुरी है।
वर्ल्ड कैंसर डे का इतिहास
विश्व कैंसर दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में पेरिस से हुई थी। 4 फरवरी 2000 को पेरिस में “वर्ल्ड समिट अगेंस्ट कैंसर” का आयोजन किया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) ने यह विचार रखा कि साल में एक दिन ऐसा निर्धारित होना चाहिए, जब पूरी दुनिया में कैंसर की रोकथाम, उसके लक्षणों और उपचार के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। इसी सोच से विश्व कैंसर दिवस की नींव पड़ी। आज भी कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगातार अभियान चलाए जाते हैं।