आर्द्रभूमि के वैश्विक महत्व को दर्शाता है ‘विश्व वेटलैंड्स दिवस'

By अमृता गोस्वामी | Feb 02, 2022

जल स्रोत जहां भी हों वह स्थल अनेक जीव-जन्तुओं, वनस्पतियों के लिए आश्रय स्थल होते हैं, ये स्थान वहां के जन-जीवन, जलवायु के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, यहां जीवन पनपते हैं। कुछ महत्वपूर्ण जल स्रोतों में ही ‘वेटलैंड्स’ का नाम भी प्रमुख है, वेटलैंड वह स्थल होते हैं जहां साल भर भूजल स्तर और नमी वाली जमीन की बहुतायत हो। दुनिया के ध्रुवीय क्षेत्र हों, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र या रेगिस्तानी इलाके सभी जलवायु क्षेत्रों में वेटलैंड्स यानि आर्द्रभूमियां पाई जाती हैं किन्तु विडंबना यह है कि अत्याधिक शहरीकरण विकास के चलते वनों का काटा जाना, वनस्पति नुकसान, जल प्रदूषण, लवणीकरण, बाढ़, औद्योगीकरण, रेल मार्ग निर्माण, सड़क-निर्माण इत्यादि आर्द्रभूमियों के लिए गहरे संकट बने हुए हैं।

रामसर कन्वेंशन संधि वाले दिन 2 फरवरी को हर साल दुनिया भर में ‘विश्व वेटलैंड्स दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमि के महत्व, मूल्यों और लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। पहली बार 'विश्व वेटलैंड्स दिवस’ साल 1997 में मनाया गया था। हर साल इसे एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। पिछले साल 2021 में विश्व वेटलैंड्स दिवस ‘वेटलैंड्स एंड वॉटर’ थीम पर मनाया गया था वहीं इस साल 2022 में थीम ‘वेटलैंड्स एक्शन फॉर पीपल एंड नेचर’ रखी गई है जो मनुष्यों और प्रकृति के स्वास्थ्य के प्रति आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालती है।

गौरतलब है कि वेटलैंड्स उन स्थानों को कहा जाता है जो नदियों के किनारे बसे होते हैं या जहां साल भर वर्षा जल संरक्षण भरपूर होता है, ऐसे स्थानों में तालाब, झीलें, बाड़, नदियाँ, बाढ़ के मैदान, दलदल, मुहाना, मैंग्रोव, लैगून और प्रवाल भित्तियाँ इत्यादि शामिल हैं। ये जगह जैव विविधता व जल समृद्ध होती हैं। कुछ वेटलैंड मानव निर्मित भी होते हैं जैसे फिशपाॅन्ड, धान के पौधे, सॉल्टपैन। ‘वेटलैंड्स’ धरा से जलनिकासी की पूर्ति करने, साफ पानी मुहैया कराने, बाढ़ के खतरे को कम करने, कार्बन भंडारण, स्वस्थ जलवायु प्रदान करने और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में मददगार होते हैं। उपयोगी वनस्पतियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन में भी वेटलैंड्स महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हमारी सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी ये अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महत्व के 1750 से अधिक वेटलैंड्स स्थल हैं। ऑस्ट्रेलिया का कोबॉर्ग प्रायद्वीप दुनिया का पहला नामित वेटलैंड्स है, जिसे 1974 में चुना गया था। कांगो का गिरी-तुंब-मेनडोंबे और कनाडा का क्वीन मौद ग्लफ दुनिया के सबसे बड़े वेटलैंड्स हैं, जो 60 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं। पैंटानल दुनिया का सबसे बड़ा आर्द्रभूमि दलदली भूमि वाला उष्णकटिबन्धीय प्राकृतिक क्षेत्र है। भारत की बात करें तो भारत में 42 मान्यता प्राप्त रामसर स्थल हैं जिसमें पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरवन वेटलैंड भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल है।

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रामसर वेटलैंड्स कन्वेंशन, वेटलैंड्स और उनके संसाधनों के संरक्षण और बुद्धिमतापूर्ण उपयोग के लिये कार्य करता है। वेटलैंड्स पर हुए रामसर कन्वेंशन के अध्यक्ष की रिपोर्ट के मुताबिक धरती पर जंगलों से भी तीन गुना तेजी से वेटलैंड्स में कमी आ रही है, जो चिन्ता का विषय है वहीं वैश्विक मूल्यांकन ने आर्द्रभूमि को सबसे अधिक खतरे वाले पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में दर्शाया है। यूनेस्को के अनुसार, यह दुनिया की 40 प्रतिशत वनस्पतियों और वन्यजीवों को प्रभावित करता है जो आर्द्रभूमियों में निवास या प्रजनन करते हैं।

रिपोर्टस के मुताबिक दुनिया के पारिस्थितिक सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले वेटलैंड्स जलस्रोत दुनिया भर में 12 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैले हुए हैं लेकिन साल 2000 के बाद इनकी संख्या में कमी होने की दर में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत में तो स्थिति और भी विकट है, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के मुताबिक भारत में आर्द्रभूमि सबसे अधिक संकटग्रस्त क्षेत्रों में से एक है। एक अध्ययन के मुताबिक करीब 20 साल पहले दिल्ली में 900 से अधिक वेटलैंड हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में केवल 400 के आसपास ही वेटलैंड बचे हैं। 

यह हम अच्छी तरह जानते हैं कि जल है तो जीवन है, वेटलैंड्स जन-जीवन के लिए जल आपूर्ति के साथ प्राकृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, यह हमारी विरासत हैं। वेटलैंड्स का संरक्षण वैश्विक स्तर पर तो अत्याधिक आवश्यक है ही, प्रत्येक व्यक्ति का यह फर्ज बनता है कि इनके महत्व को समझे और इनका ख्याल रखे। 

- अमृता गोस्वामी

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