By नीरज कुमार दुबे | Oct 16, 2026
सऊदी अरब के साथ-साथ हूतियों ने अब यमन की सरकार पर भी भीषण हमला बोल दिया है। मिसाइलों और हवाई हमलों के बीच यमन की जनता ऐसी चक्की में पिसने को मजबूर है, जिसके एक पाट पर हूती विद्रोही हैं तो दूसरे पर सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन। हम आपको बता दें कि ईरान समर्थित हूतियों ने गुरुवार को यमन की अंतरिम राजधानी अदन स्थित अल-मआशिक राष्ट्रपति परिसर पर कई मिसाइलें दागकर पूरे देश में सनसनी फैला दी। इस हमले में पांच लोगों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए, जबकि प्रधानमंत्री शाया अल-जिंदानी बाल-बाल बच निकले। उनके दो अंगरक्षकों की मौत ने हमले की भयावहता और बढ़ा दी है। साथ ही सत्ता के केंद्र पर इस सीधे हमले ने साफ कर दिया है कि यमन का संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है, जहां आम जनता के लिए तबाही, असुरक्षा और अनिश्चितता के सिवा कुछ नहीं बचता दिखाई दे रहा।
हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने हमले का बचाव करते हुए दावा किया कि निशाना बनाया गया भवन सऊदी सैन्य अभियान केंद्र के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि यमन में सक्रिय सऊदी सैन्य और आर्थिक ठिकाने आगे भी हूतियों के निशाने पर रहेंगे। इसके उलट प्रधानमंत्री अल-जिंदानी ने हमले को ‘कायरतापूर्ण’ बताते हुए आरोप लगाया कि हूती देश की वैध सरकार को कमजोर करने और उसकी सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी बलों द्वारा सैन्य अभियान जारी रखने और देश के पूरे भूभाग पर नियंत्रण बहाल करने का संकल्प दोहराया।
हम आपको बता दें कि यह अदन स्थित सरकारी मुख्यालय पर हूतियों का पहला हमला है। वर्ष 2014 में हूतियों ने सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र अदन बन गया। अब अदन के सत्ता-केंद्र पर हमला इस बात का संकेत है कि संघर्ष केवल मोर्चों और सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा। यमन में व्यापक गृहयुद्ध और उसमें अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के खिंचने की आशंकाएं भी गहरा रही हैं।
दूसरी ओर, अदन पर हमले से पहले सऊदी अरब में भी हमलों और अवरोधन की घटनाएं सामने आई हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का दावा है कि रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले 11 दिनों में कम से कम 20 हूती हमले हुए हैं। गठबंधन के मुताबिक, हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों सहित कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में 17 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा भी किया गया है।
गठबंधन ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने, रियाद के उत्तर में तीन ड्रोन निष्क्रिय करने और मदीना क्षेत्र की ओर बढ़ रही एक मिसाइल को नष्ट करने की जानकारी दी। हालांकि हूती प्रवक्ता सरी ने मदीना को निशाना बनाए जाने से इंकार किया और सऊदी दावे को झूठा बताया। इस बीच, हूतियों ने सऊदी टोही विमान गिराने का दावा भी किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी गठबंधन ने पूर्वी प्रांत की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को भी नष्ट करने की सूचना दी, हालांकि उसके स्रोत का खुलासा नहीं किया।
उधर, यमनी सशस्त्र बलों ने हूतियों के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई को बड़े पैमाने पर जारी रखने का दावा किया है। सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, हाल में शुरू किए गए सैन्य अभियान के तहत 24 घंटे में 1,250 से अधिक सटीक हमले किए गए। इनमें लड़ाकू विमान, ड्रोन, फील्ड आर्टिलरी, रॉकेट लॉन्चर और स्नाइपर इकाइयों का इस्तेमाल किया गया। सेना ने लगभग 700 हूती लड़ाकों को निष्क्रिय करने तथा 150 से अधिक वाहनों और परिवहन एवं रसद साधनों को नष्ट या निष्क्रिय करने का दावा किया है। सेना के मुताबिक, हमलों का लक्ष्य अग्रिम मोर्चों की रक्षा व्यवस्था, किलेबंदी, खाइयां, निगरानी केंद्र, कमान एवं नियंत्रण ठिकाने और सैनिकों की तैनाती वाले क्षेत्र थे। ताइज प्रांत के मोर्चों पर विशेष कार्रवाई की जानकारी देते हुए सेना ने हूतियों के हमलों को विफल करने का दावा किया। सेना ने यह भी कहा कि कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुरूप और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियों के साथ की गई। इसी बीच, ताइज प्रांत में हूती ठिकानों पर दो हवाई हमलों की खबर भी सामने आई है।
हम आपको बता दें कि सऊदी अरब लंबे समय से ईरान पर हूतियों को हथियार और प्रशिक्षण देकर समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हूतियों के हमलों और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी के लिए पैदा किए गए खतरों की निंदा कर चुकी है। साथ ही, परिषद ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि की है।
बहरहाल, क्षेत्रीय तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। यमन में सत्ता की लड़ाई, सऊदी अरब पर हमले, ईरान की भूमिका और लाल सागर के समुद्री रास्तों पर मंडराता खतरा मिलकर पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर रहे हैं। यदि हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो यमन का संघर्ष और व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल सकता है जिसकी कीमत आम नागरिकों, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को चुकानी पड़ेगी।