Papmochani Ekadashi 2026: इस खास Vidhi से करें पूजा, श्रीहरि विष्णु दूर करेंगे सभी कष्ट और संकट

By अनन्या मिश्रा | Mar 15, 2026

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं। एक एकादशी कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में पड़ती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से जातक को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा करने का विधान है। तो आइए जानते हैं पापमोचनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में..

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। फिर एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर श्रीलक्ष्मीनारायण की के विग्रह की स्थापना करें और शालिग्राम शिला स्थापित करें। गंगाजल से लक्ष्मीनारायण और पंचामृत से शालिग्राम भगवान का अभिषेक करें। चंदन और सुगंधित फूलों से श्रृंगार करें और तुलसी दल चढ़ाएं। मौसमी फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं और आरती करें। इसके बाद ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की माला जाप करें और विष्णु चालीसा का पाठ करें। पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।

महत्व

धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से जाने-अंजाने में हुए पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। मृत्यु के बाद प्रेत योनि में नहीं भटकना पड़ता है। इस एकादशी व्रत का फल यदि अपने पितरों को दिया जाता है कि वह भी प्रेत योनि से मुक्त हो सकते हैं। इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकट और बाधाएं समाप्त होती हैं।

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