जिनपिंग की बड़ी साजिश एक्सपोज! जहां भारत ने तानी ब्रह्मोस, वहीं भूतिया चीज बना रहा था चीन

By अभिनय आकाश | Jun 06, 2026

आसमान से गुजरते लड़ाकू विमान, समंदर का सीना चीरते मिसाइलें। ये उस दहशत की हकीकत है जिसे चीन ने अपने पड़ोसियों के लिए रूस का ढर्रा बना दिया है। ड्रैगन की फितरत बन चुकी है। अपने पड़ोसियों को डराना, 24 घंटे युद्ध का माहौल बनाए रखना। जब दुनिया सो रही होती है तब समंदर की लहरों के बीच चुपचाप साजिशों के नए ढांचे खड़े कर देना। कभी ताइवान को घेर कर लाइफ फायर ड्रिल करना तो कभी वियतनाम और फिलीपींस की सीमा में जबरन घुसपैठ। चीन का मकसद साफ है। इतना खौफ पैदा कर दो कि सामने वाला बिना लड़े ही घुटने टेक दे। और अब इसी खौफनाक स्क्रिप्ट का नया चैप्टर साउथ चाइना सी में खुला है। जहां चीन की एक और बहुत बड़ी चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई है। सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों में चीन की उस करतूत की जो दहशत फैलाने के लिए चोरी छिपे समंदर के सीने पर रच रहा था।

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दरअसल साउथ चाइना सी के लिए सुपर पावर बनने का शॉर्टकट है। दुनिया का लगभग 1/3 यानी 33% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। हर साल करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस इसी रूट से होता है। सिर्फ व्यापार ही नहीं इस समंदर के नीचे अरबों बैरल तेल और ट्रिलियन क्यूबिक फिट प्राकृतिक गैस का अटूट भंडार छिपा है। जिस पर चीन अकेले डाका डालना चाहता है। इसके अलावा दुनिया की कुल पकड़ी जाने वाली मछलियों का 10% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है जो चीन की फूड सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी है। इस पूरे इलाके पर कब्जा करके चीन अमेरिकी नौसेना को एशिया प्रशांत क्षेत्र में सीधी चुनौती देना चाहता है। अगर चीन अपनी इस विस्तारवादी चाल और दहशत फैलाने के एजेंडे में कामयाब हो जाता है तो एशिया के कई देशों का दम घुट जाएगा। चीन का कथित नाइन डैश लाइन का दावा इन देशों के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी समुद्री सीमा को सीधे तौर पर निगल रहा है। वर्तमान में चीन का सबसे तीखा टकराव फिलीपींस के साथ चल रहा है। जहां चीनी कोस्टगार्ड आए दिन फिलीपींस के जहाजों पर वाटर कैनन और मिलिट्री गेट लेजर का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाते हैं। 

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दक्षिण चीन सागर में अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति और इन अस्थाई ढांचों के जरिए चीन असल में ताइवान की समुद्री घेराबंदी यानी नेवल ब्लॉकेट करने की ताकत जुटा रहा है। अगर चीन ने इस पूरे समंदर पर कंट्रोल कर लिया तो ताइवान की ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह कट जाएगी। ताइवान को बाहरी दुनिया से मिलने वाली मदद और हथियार बंद हो जाएंगे और चीन के लिए ताइवान पर हमला करना या उसे घुटनों पर लाना बेहद आसान हो जाएगा। 

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