Prabhasakshi Exclusive: America के मन में क्या चल रहा है? China से संबंध सुधारने के लिए 100 साल के Henry Kissinger को क्यों भेजा? मिलने के लिए Xinping क्यों दौड़े चले आये?

By नीरज कुमार दुबे | Jul 21, 2023

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हैनरी किसिंजर चीन होकर आये हैं। दूर दूर दिख रहे अमेरिका और चीन क्या पास आने की राह तलाश रहे हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार पर बिजनेस हाउसों का दबाव है कि चीन के साथ रिश्ते सुधारे जाएं क्योंकि व्यापार में काफी असंतुलन हो रखा है। इसलिए आपने हाल ही में देखा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चीन होकर आये। ब्लिंकन ने चीनी विदेश मंत्री के अलावा चीनी राष्ट्रपति से भी गहन वार्ता की। इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलस बर्न्स भी चीन होकर आये। अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन भी चीन होकर आई हैं। इसके अलावा अमेरिका के शीर्ष जलवायु दूत जॉन कैरी ने भी हाल ही में चीन की यात्रा की। अब इन सबसे बढ़कर अमेरिका ने पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर को चीन भेजा।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि किसिंजर की छवि चीन में दोस्त के रूप में है। किसिंजर का शुरू से ही कहना रहा है कि चीन के साथ दोस्ती बनाकर रखनी चाहिए। 1971 में किसिंजर ने जब विदेश मंत्री के रूप में चीन का दौरा किया था उसी के बाद से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन के साथ रिश्ते सुधारने की शुरुआत की थी। किसिंजर का अमेरिका जाना इस मायने में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह 100 वर्ष के हैं उसके बावजूद देश के लिए चीन की यात्रा की। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन 80 वर्ष के हैं लेकिन उन्होंने चीन मुद्दे पर 100 वर्षीय किसिंजर की सहायता ली। लेकिन यहां अमेरिका के दोहरेपन पर भी सवाल खड़े होते हैं। एक ओर तो वह चीन से संबंध सुधारने की पहल कर रहा है लेकिन दूसरी ओर उसने क्वॉड तथा अन्य कई समूह बनाकर हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन को घेरने के लिए भी रणनीति बनाई हुई है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक किसिंजर की चीन यात्रा की बात है तो इस दौरान चीनी राष्ट्रपति ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। शी जिनपिंग ने अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर से कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ पटरी से उतरे रिश्तों को ठीक करने के लिए चर्चा को तैयार है। उन्होंने बुजुर्ग अमेरिकी राजनयिक से संबंधों को सुधारने में मदद करने का आग्रह किया जैसा उन्होंने 50 साल पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों को स्थापित कर किया था। 


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जिनपिंग चीन की यात्रा पर आए अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से बचते हैं लेकिन वह किसिंजर से मिलने के लिए बीजिंग के दिआओयुताई राजकीय अतिथि गृह पहुंचे और चीन-अमेरिका के रिश्तों में सुधार करने के लिए उनकी मदद मांगी। किसिंजर ने इसी अतिथि गृह में 1971 में बीजिंग की पहली यात्रा के दौरान राजनयिक रिश्ते स्थापित करने के लिए चीनी नेताओं से मुलाकात की थी। तब अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन थे। जिनपिंग ने किसिंजर के साथ मुलाकात के दौरान कहा कि 52 साल पहले चीन-अमेरिका रिश्तों में अहम मोड़ पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष माओ त्से-तुंग, प्रधानमंत्री झोऊ एनलाइ, अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन और किसिंजर ने उल्लेखनीय रणनीतिक दृष्टि के साथ, चीन और अमेरिका के बीच सहयोग का सही विकल्प चुना था। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि इससे न सिर्फ दोनों देशों को फायदा हुआ, बल्कि दुनिया भी बदल गई।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जिनपिंग ने कहा कि भविष्य के मद्देनजर, चीन और अमेरिका के पास एक-दूसरे की सफलता में साथ देने और साझा समृद्धि हासिल करने के तमाम कारण हैं। उन्होंने कहा कि इसमें परस्पर सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और लाभकारी साझेदारी के सिद्धांतों का पालन करना अहम होगा। उन्होंने कहा कि इस आधार पर, चीन दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों और द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है। यह दोनों पक्षों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। जिनफिंग ने उम्मीद जताई कि किसिंजर और वाशिंगटन में अन्य नेता चीन-अमेरिका रिश्तों को वापस पटरी पर लाने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना जारी रखेंगे। किसिंजर से जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी और चीन के रक्षा मंत्री जनरल ली शान्गफू ने भी अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री से मुलाकात की।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यहां यह भी ध्यान रखे जाने की जरूरत है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के खिलाफ सख्त नीतियां अपनाई हैं जिसमें व्यापार और तकनीकी प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ क्वाड और ऑकस जैसे प्रभावशाली रणनीतिक समूहों का गठन शामिल है। क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं जबकि ऑकस में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं। इन्हें लेकर चीन का कहना है कि इन समूहों का मकसद उसके उदय को रोकना है। इस वजह से दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी बिगड़ गए हैं।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हालांकि अब दोनों देशों के संबंधों में सुधार दिखाई दे रहा है। हाल ही में अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना अमेरिका और चीन की साझा जिम्मेदारी है और जब तक दोनों देश सहयोग नहीं करते, तब तक वैश्विक चुनौतियों से निपटने में किसी भी प्रगति की कल्पना करना मुश्किल है। येलेन ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था की सुस्ती वैश्विक अर्थव्यवस्था की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन दुनियाभर के कई देशों के लिए एक बड़ा आयातक है। उन्होंने कहा कि संबंधों में द्विपक्षीय भागीदारी को लेकर हममें से प्रत्येक की चिंताओं को ईमानदारी से एवं स्पष्ट रूप से व्यक्त करने और उन पर चर्चा करने के अलावा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों से निपटना हमारा साझा दायित्व है। और वास्तव में, जब तक अमेरिका और चीन सहयोग नहीं करते, यह कल्पना करना मुश्किल है कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने की दिशा में प्रगति हो सकती है। येलेन ने बताया कि चीन के अपने हालिया दौरे के दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्षों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि चीन के नेताओं ने उन्हें बताया कि उसके यहां कारोबारी माहौल खुला एवं मैत्रीपूर्ण है और वे देश में विदेशी निवेश चाहते हैं। येलेन ने कहा कि निर्यात के साथ-साथ चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती दर्शाती है कि देश में कोविड-19 की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन की समाप्ति के बाद उपभोक्ता खर्च में उतनी वृद्धि नहीं हुई, जितनी कल्पना की गई थी।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है कि यकीनन यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन दुनियाभर के कई देशों के लिए एक प्रमुख आयातक है। ऐसे में चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर कई देशों की वृद्धि दर पर पड़ सकता है और आप सब ने ऐसा होते देखा भी है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि वे निश्चित रूप से यह बताने के लिए उत्सुक हैं कि चीन में कारोबारी माहौल खुला एवं मैत्रीपूर्ण है और वे देश में विदेशी निवेश आता देखना चाहते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह भी बताया है कि मैं अमेरिकी उद्यमियों से भी मिली, जो चीन में निवेश करने की अनुमति पाने के इच्छुक हैं।

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