By रेनू तिवारी | Mar 23, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं ‘सप्त क्रांति’ के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सामाजिक न्याय, समता एवं राष्ट्रहिंदी के प्रति उनका समर्पण हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु सदैव प्रेरित करता रहेगा।’’ लोहिया का जन्म 1910 में आज ही के दिन हुआ था। लोहिया एक स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी विचारों को मानने वाले थे। उन्होंने वंचित समुदायों के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए भी काम किया और कांग्रेस के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने का काम किया। उनका निधन 1967 में हुआ था।
23 मार्च, 1910 को जन्मे डॉ. लोहिया भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा दिग्गजों में से एक थे, जिन्होंने वैचारिक धरातल पर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ उठाई।
गांधीवादी विचारधारा: वे महात्मा गांधी के विचारों से गहरे प्रभावित थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
विपक्ष की एकजुटता: डॉ. लोहिया ने कांग्रेस के प्रभुत्व वाले दौर में विपक्षी दलों को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया, ताकि लोकतंत्र में एक मजबूत विकल्प बना रहे।
सामाजिक सशक्तिकरण: उन्होंने पिछड़ों, दलितों और वंचित समुदायों के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर संघर्ष किया।
सप्त क्रांति का विचार: समाज में व्याप्त असमानता को दूर करने के लिए उन्होंने 'सप्त क्रांति' का सिद्धांत दिया, जो आज भी भारतीय समाजवाद का आधार माना जाता है।
1967 में दुनिया को अलविदा कह देने वाले डॉ. लोहिया की विरासत आज भी उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में अत्यंत प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री के संबोधन ने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर, डॉ. लोहिया का राष्ट्र के प्रति समर्पण और समतावादी समाज का सपना हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।