योगी सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार, 23 मंत्रियों ने ली शपथ

By अंकित सिंह | Aug 21, 2019

आज उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कैबिनेट का पहला विस्तार किया। इस कैबिनेट विस्तार में 23 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने छह कैबिनेट मंत्रियों, छह राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और 11 राज्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले मंत्रिमण्डल विस्तार के तहत बुधवार को 23 मंत्रियों को शपथ दिलायी गयी।राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने छह कैबिनेट, छह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 11 राज्यमंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।मंत्रिमण्डल विस्तार में भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। स्वतंत्र प्रभारी के राज्यमंत्रियों महेन्द्र सिंह (ग्राम्य विकास), सुरेश राणा (गन्ना विकास), भूपेन्द्र सिंह चौधरी (पंचायती राज) और अनिल राजभर (खाद्य प्रसंस्करण) को प्रोन्नति देते हुए कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलायी गयी। भोगांव से विधायक राम नरेश अग्निहोत्री तथा घाटमपुर से विधायक कमल रानी वरुण को सीधे कैबिनेट में जगह दी गयी है।वाराणसी (दक्षिण) से विधायक सूचना राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी को भी प्रोन्नति दी गयी है। उन्हें स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी। 

इसके अलावा कपिलदेव अग्रवाल, सतीश द्विवेदी, अशोक कटारिया, श्रीराम चौहान और रवीन्द्र जायसवाल जैसे नये चेहरों को भी स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी।इसके अलावा अनिल शर्मा, महेश गुप्ता, आनन्द स्वरूप शुक्ला, विजय कश्यप, गिर्राज सिंह धर्मेश, लाखन सिंह राजपूत, नीलिमा कटियार, चौधरी उदयभान सिंह, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, रमाशंकर सिंह पटेल और अजित सिंह पाल को राज्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी।माना जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री पद पर प्रोन्नत किये गये सुरेश राणा को बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान जैसे जटिल विषय पर अच्छा काम करने का इनाम मिला। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिन्दूवादी राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। महेन्द्र सिंह पिछले लोकसभा चुनाव में असम में भाजपा के प्रभारी थे। माना जा रहा है कि मंत्रिमण्डल में उनकी तरक्की असम में पार्टी की कामयाबी के इनाम के तौर पर दी गयी है। 

साथ ही उन्हें योगी मंत्रिमण्डल का तेजतर्रार सदस्य माना जाता है। माना जा रहा है कि अनिल राजभर को भाजपा की सहयोगी रही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की मंत्रिमण्डल से बर्खास्तगी के बाद राजभर मतों का समीकरण साधने के लिये प्रोन्नत किया गया है।मंत्रिमण्डल विस्तार से ठीक एक दिन पहले सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच  समन्वय बैठक  भी हुई थी।मंत्रिमण्डल विस्तार में भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। उसके आठ विधायक और एक विधान परिषद सदस्य हैं। इस वक्त सरकार में अपना दल के जय कुमार सिंह (कारागार राज्यमंत्री) ही शामिल हैं।मंत्रिमण्डल विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की गयी है। सपा के गढ़ माने जाने वाले इटावा, मैनुपरी और कानपुर को खास महत्व दिया गया है।प्रदेश सरकार के तीन मंत्री एसपी सिंह बघेल आगरा लोकसभा सीट से, रीता बहुगुणा जोशी इलाहाबाद सीट से और सत्यदेव पचौरी कानपुर सीट से सांसद चुने जा चुके हैं। उनके इस्तीफा दे देने से ये मंत्री पद खाली हो गए थे। वहीं, ओमप्रकाश राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने के बाद मंत्रिमंडल में एक जगह और बन गई थी। 

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