By नीरज कुमार दुबे | Feb 04, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और कानून व्यवस्था पर अपनी सरकार का रुख एक बार फिर साफ किया है। उन्होंने पुलिस की ओर से अपराधियों के खिलाफ बल प्रयोग का बचाव करते हुए कहा है कि यदि अपराधी को गोली चलाने की स्वतंत्रता है तो पुलिस को भी कानून के तहत जवाब देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुलिस को हथियार इसीलिए दिए जाते हैं कि वह अपराधी का सामना कर सकें और कानून का पालन करा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार अपराधियों को कानून उसी भाषा में समझाना होता है जिसे वे समझते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती दौर में कानून का भय स्थापित करना आसान नहीं था, पर लगातार कार्रवाई और कानूनी दायरे में रहते हुए सख्त रुख अपनाने से स्थिति बदली। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में बड़े त्योहार शांति से सम्पन्न हुए, उपद्रव, फिरौती, दंगे और अराजकता में कमी आई तथा राज्य निवेश के लिए आकर्षक स्थान के रूप में उभरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने दंगे और अव्यवस्था की छवि से बाहर निकल कर विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया है।
इसी बीच, योगी सरकार ने राज्य में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आरक्षी नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती 2025 के तहत लिखित परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी हैं। यह परीक्षा 8, 9 और 10 जून को आयोजित होगी और हर दिन दो पालियों में परीक्षा कराई जाएगी। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 32,679 पद भरे जाएंगे। परीक्षा केंद्र, प्रवेश पत्र और दिशा निर्देश से जुड़ी सभी सूचनाएं बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होंगी।
अभ्यर्थियों को राहत देते हुए सरकार ने अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष की छूट भी दी है। यह निर्णय आयु सीमा शिथिलीकरण नियमों के तहत लिया गया है ताकि वे युवा भी अवसर पा सकें जो आयु सीमा के कारण अब तक बाहर रह जाते थे। इससे बड़ी संख्या में युवाओं के लिए पुलिस सेवा में आने का मार्ग खुला है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी बड़ी संख्या में कांस्टेबल भर्ती की गई थी और उनमें से बीस प्रतिशत पद महिलाओं के लिए सुरक्षित रखे गए थे। इससे पुलिस बल में महिला भागीदारी बढ़ाने का प्रयास भी दिखता है।
देखा जाये तो कानून व्यवस्था किसी भी राज्य की प्रगति का आधार होती है। सरकार का यह तर्क समझ में आता है कि पुलिस को अपराध से सख्ती से निपटने के लिए सक्षम होना चाहिए। आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें, यह राज्य का मूल कर्तव्य है। साथ ही यह भी उतना ही जरूरी है कि हर कार्रवाई कानूनी मानदंडों के भीतर, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से हो। कानून का भय तभी टिकाऊ होता है जब उसके साथ कानून पर भरोसा भी जुड़ा हो।
साथ ही पुलिस भर्ती का बड़ा अभियान और आयु सीमा में राहत युवाओं के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पुलिस बल की क्षमता भी मजबूत होगी। पर संख्या बढ़ाने के साथ साथ प्रशिक्षण, संवेदनशीलता और नागरिक अधिकारों के प्रति समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। एक आधुनिक राज्य की पहचान केवल सख्ती से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और संतुलित व्यवस्था से होती है। यदि सख्त कानून व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती और निष्पक्ष पुलिसिंग साथ-साथ चलें, तो उत्तर प्रदेश वास्तव में शांति और विकास की दिशा में स्थायी कदम बढ़ा सकता है।