Putin से पहले भारत आ सकते हैं Ukraine के राष्ट्रपति, Zelensky के करीबी ने दिल्ली में Jaishankar और Doval से की मुलाकात

By नीरज कुमार दुबे | Apr 18, 2026

रूस यूक्रेन युद्ध समाप्त करवाने में भारत की कूटनीति काम आ सकती है क्योंकि हाल के घटनाक्रम इस दिशा में नई संभावनाओं की ओर संकेत कर रहे हैं। हम आपको बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव की भारत यात्रा ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य रूस यूक्रेन संघर्ष के बीच स्थायी और न्यायपूर्ण शांति की संभावनाओं पर विचार करना था।

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बैठकों के दौरान भारत ने एक बार फिर अपनी स्पष्ट और संतुलित नीति को दोहराया। भारत ने कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के द्विपक्षीय सहयोग और यूक्रेन संकट पर विचार विमर्श को सकारात्मक बताया। वहीं उमेरोव ने भी कहा कि चर्चा में युद्ध की वर्तमान स्थिति, वार्ता की प्रगति और न्यायपूर्ण तथा स्थायी शांति की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बैठक में भी इसी प्रकार के मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि वह लगातार शांति के प्रयासों का समर्थन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। उमेरोव ने इस साझा समझ के लिए भारत का आभार व्यक्त किया कि सभी पक्षों को मिलकर ऐसे समाधान खोजने होंगे जो दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करें।

देखा जाये तो यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी दर्शाती है। यूक्रेन का भारत के साथ संवाद बढ़ाना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अब एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभर रही है, जो विभिन्न पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर सकती है।

हम आपको याद दिला दें कि रूस यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब तक जारी है। इस दौरान भारत ने संतुलित नीति अपनाई है। एक ओर वह यूक्रेन के साथ संवाद बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ भी अपने पारंपरिक संबंधों को कायम रखे हुए है। हाल के वर्षों में भारत रूस से तेल का एक प्रमुख खरीदार बन गया है, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसमें कुछ कमी भी आई है।

आगे की संभावनाओं पर नजर डालें तो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की भारत यात्रा की भी संभावना जताई जा रही है। इससे पहले अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कीव का दौरा किया था। इसके अलावा भारत और रूस के बीच भी नियमित शिखर सम्मेलन होते रहे हैं, जो इस संतुलन को दर्शाते हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आएंगे। उससे पहले ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए रूसी विदेश मंत्री भी भारत आएंगे।

हम आपको यह भी बता दें कि इसी सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर शांति का संदेश फिर दोहराया था। उन्होंने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ बातचीत के बाद कहा कि वर्तमान समय में दुनिया तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है और इसका प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है। एक दिन पहले भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था कि इजराइल लेबनान संघर्षविराम का हम स्वागत करते हैं और यूक्रेन में भी शांति की उम्मीद करते हैं।

बहरहाल, रुस्तम उमेरोव की भारत यात्रा और उच्च स्तरीय वार्ताएं यह संकेत देती हैं कि वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। भारत न केवल एक संतुलित शक्ति के रूप में उभर रहा है, बल्कि वह ऐसे मंच के रूप में भी सामने आ रहा है जहां विरोधी पक्ष संवाद के जरिए समाधान तलाश सकते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई संकटों से जूझ रही है, भारत का यह दृष्टिकोण वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान साबित हो सकता है।

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