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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[Uttarakhand के Jim Corbett से MP के Panna Tiger Reserve तक, इन 4 जगहों पर करें Safari]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/jim-corbett-and-ranthambore-among-top-wildlife-parks-to-visit-near-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हर एक नेचर लवर को पहाड़, हरे-भरे जंगल और नदियों के आसपास रहना किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता है। हरियाली के आसपास बैठे रहना हर किसी को काफी पसंद होता है। प्रकृति के गोंद में हम जब होते हैं, तो पंछियों की चहचहाहट काफी सुनाई देती है। सुबह के समय आपके हाथ में एक चाय का कप है, तो आपकी ट्रिप तो शानदार बन ही जाएगी।</p><p>यदि आप इस मोमेंट को इसी विंटर सीजन में एंजॉय , तो आपके लिए जंगल सफारी सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकता है।</p><p><strong>पीलीभीत टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश</strong></p><p>अगर आप शानदर जंगल सफारी को मजा लेना चाहते हैं, तो आप पीलीभीत टाइगर रिजर्व वन्यजीव अभयारण्य जा सकते हैं। इसको साल 2014 में तैयार किया गया। इधर आपको रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुए, बारासिंगा समेत कई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलेगी। इस टाइगर रिजर्व का सबसे मुख्य आकर्षण चूका बीच है। अक्तूबर से फरवरी के बीच का समय यहां घमने के लिए सबसे बढ़िया जगह है।</p><p><strong>रणथंभौर नेशनल पार्क, राजस्थान</strong></p><p>राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले ममें स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क प्रकृति प्रेमियों की बकेट लिस्ट में सबसे होता है। तीन महीने पहले ही इस नेशनल पार्क को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। यह जगह बाघों का प्राकृतिक आवास मानी जाती है, क्योंकि दिन में भी बाघ जंगल में घूमते नजर आ जाते हैं। अक्तूबर से लेकर मार्च तक के लिए यह समय बेहद खास है।</p><p><strong>जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड</strong></p><p>उत्तराखंड के नैनीताल जिले में जिम कॉर्बेट स्थित है। भारत का पहला और सबसे पुराना नेशनल पार्क है, जिसकी स्थापना साल 1936 में हेली नेशनल पार्क के नाम से की गई थी। यहां पर आपको रॉयल बंगाल टाइगर, हाथी, तेंदुए, भालू और हिरण और अन्य वन्यजीव देखने को मिल जाएंगे। यहां पर 500 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलती है। जिम कॉर्बेट जाने का सबसे सही समय अक्तूबर से फरवरी और फिर मार्च से जून है।</p><p><strong>पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश</strong></p><p>मध्य प्रदेश में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व भारत का 22वां और एमपी का पांचवां बाघ अभयारण्य है। इस महीने में यह टाइगर रिजर्व भी 3 महीने के लंबे गैप के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है। यहां पर पर्यटकों की जिप्सी सफारी से बाघ के साथ ही तेंदुआ, भालू, चिंकारा और बाकी वन्यजीवो को देख सकते हैं। यहां पर आने का समय अक्टूबर से जून तक का समय घूमने के लिए बेस्ट है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 16:32:00 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/gaya-pind-daan-travel-guide-and-rituals-for-pitru-paksha]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इस बार 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष की शुरूआत हो रही है। आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दौरान पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रतिपदा तिथि से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।</p><p>धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वीलोक पर अपने वंशजों पर कृपा बरसाने हैं। इस दौरान विधि-विधान से किए गए श्राद्धकर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर पितर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। इसलिए श्राद्धकर्म नियमों के साथ पूर्ण किए जाते हैं। अगर आप पहला श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों को जान लेना चाहिए।</p><h2>गया में पिंडदान का महत्व</h2><p>सनातन परंपरा में गया को पितृकर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक माना गया है। यहां पर श्राद्ध और पिंडदान का संबंध पितरों के स्मरण, श्रद्धा और पितृ ऋण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गया में पितृकर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह सिर्फ दोष दूर करने का उपाय नहीं बल्कि इसको पितरों के प्रति कर्तव्य के रूप में समझना चाहिए।</p><h2>ऐसे पहुंचे गया</h2><p>गया जाने के लिए सबसे पहले आपको राजधानी पटना तक रेल या हवाई यात्रा से जाना होगा। फिर पटना और उसके आसपास के शहरों से बड़ी आसानी से गया तक के ट्रेन मिल जाती है। अगर आप पटना से जा रही हैं, तो गया जाने में 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। फिर गया जंक्शन पर उतरकर टैक्सी या ऑटो की सहायता से पिंडदान स्थलों तक जाएं।</p><p>पटना से सड़क के रास्ते गया तक जाने के लिए बस, टैक्सी या प्राइवेट कार कर सकते हैं। इसके बाद स्थानीय परिवहन की सहायता से पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से जाने वाले यात्रा भी पटना के बाद प्राइवेट टैक्सी से गया तक जा सकते हैं।</p><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>पितृपक्ष में गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए होटल, ट्रेन और स्थानीय परिवहन की बुकिंग पहले करना उपयोगी साबित हो सकता है। पूजा-पिंडदान से जुड़ी दक्षिणा और सामग्री की कीमत पहले ही स्पष्ट करें। किसी भी पैकेज की बुकिंग करने से पहले इसमें शामिल सुविधाओं और ताजा मूल्यों की पुष्टि कर लें।</p><p>पिंडदान की विधि और जरूरी सामग्री परिवार की परंपरा और संबंधित पुरोहित के मार्गदर्शन के हिसाब से अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित/पुरोहित से पहले सही जानकारी ले लें।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 18:16:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/gaya-pind-daan-travel-guide-and-rituals-for-pitru-paksha</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[IRCTC लाया Kochi से Amazing Hyderabad Tour Package, 12 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kochi-to-hyderabad-four-day-air-tour-package-announced-by-irctc]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घुमक्कड़ लोग घूमने के लिए नई-नई जगहों को खोज में लगे रहते हैं। अगर हैदराबाद आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में है, तो IRCTC का नया टूर पैकेज, आपकी छोटी यात्रा की प्लानिंग को आसान बना सकता है। 'अमेजिंग हैदराबाद' नाम का यह चार दिन का पैकेज कोच्चि से 12 से 15 अक्टूबर, 2026 के लिए तय किया गया है। इस पैकेज की कीमत 27,150 रुपये प्रति व्यक्ति है।</p><p><strong>4 दिन के टूर पैकेज</strong></p><p>- इस यात्रा की शुरुआत 12 अक्टूबर को कोच्चि से हैदराबाद के लिए सुबह की फ्लाइट से है। यहां पहुंचने के बाद, यात्री रात के लिए होटल में चेक-इन करने से पहले 'स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी', चारमीनार और गोलकुंडा फोर्ट जाएंगे।</p><p>- दूसरे दिन रामोजी फिल्म सिटी घूमाया जाएगा। ब्रेकफास्ट के बाद यात्री को फिल्म स्टूडियो के विशाल कॉम्प्लेक्स जाएंगे।</p><p>- तीसरे दिन पर्यटकों को मक्का मस्जिद और चौमहल्ला पैलेस ले जाएगा। जिसके बाद उन्हें हैदराबाद की आर्किटेक्चरल और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई जाएगी। दोपहर का समय यात्रियों के लिए खाली होगा ताकि वे अपनी मर्जी से धूम सके।</p><p>- चौथे दिन यानी के 15 अक्तूबर को सैलर जंग म्यूजियम और बिड़ला मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। लंच के बाद, यात्री कोच्चि के लिए देर रात की वापसी वाली फ्लाइट से अपने शहर जा सकते हैं।</p><p><strong>IRCTC हैदराबाद टूर पैकेज की कीमत कितनी है?</strong></p><p>सिंगल ऑक्यूपेंसी: ₹34,450 प्रति व्यक्ति<br>डबल ऑक्यूपेंसी: ₹28,200 प्रति व्यक्ति<br>ट्रिपल ऑक्यूपेंसी: ₹27,150 प्रति व्यक्ति<br>5-11 साल के बच्चे: अलग बिस्तर के साथ ₹22,950 और बिना बिस्तर के ₹18,750<br>2-4 साल के बच्चे: बिना बिस्तर के ₹18,750</p><p>₹27,150 प्रति व्यक्ति की शुरुआती कीमत ट्रिपल ऑक्यूपेंसी के लिए है।</p><p><strong>पैकेज में मिलने वाली सुविधाएं</strong></p><p>IRCTC टूर पैकेज में कोच्चि और हैदराबाद के बीच इकॉनमी-क्लास की फ़्लाइट, एयर-कंडीशंड होटल में तीन रात ठहरने की सुविधा, तीन बार नाश्ता और तीन बार डिनर शामिल हैं। यात्रियों को घूमने-फिरने के लिए एयर-कंडीशन्ड गाड़ियां मिलेंगी और कुछ खास दिनों पर गाइड की सुविधा भी उपलब्ध होगी।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kochi-to-hyderabad-four-day-air-tour-package-announced-by-irctc</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Central Railway का 1 अक्टूबर से सख्त नियम, Train Ticket के साथ Original ID Card अनिवार्य]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/train-passengers-must-carry-original-id-card-during-festive-travel-drive]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास 'टिकट चेकिंग अभियान' चलाने जा रहा है।</p><p>आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।</p><p><strong>कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी</strong></p><p>इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है 'वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी'। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।</p><p>उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।</p><p><strong>कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त</strong></p><p>रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी &nbsp;से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।</p><p><strong>जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग</strong></p><p>दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं, &nbsp;जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।</p><p><strong>भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती</strong></p><p>सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-</p><p>- भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।</p><p>- वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।</p><p>- इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।</p><p>- सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।</p><p><strong>चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे?</strong></p><p>इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-</p><p>-आधार कार्ड<br>-वोटर आईडी कार्ड<br>-पासपोर्ट या पैन कार्ड<br>-ड्राइविंग लाइसेंस<br>- केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड<br>- मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड<br>- किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो।<br>- बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।<br>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 16:49:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/train-passengers-must-carry-original-id-card-during-festive-travel-drive</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Punjab Tourism: Dangal से Jab We Met तक Punjab के इन मशहूर Shooting Locations की करें सैर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/famous-bollywood-shooting-locations-to-visit-in-punjab]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पंजाब सिर्फ अपने स्वादिष्ट खाने, मेहमानवाजी और संस्कृति के लिए ही नहीं जाना जाता है। बल्कि यहां पर कई ऐसी खूबसूरत और ऐतिहासिक जगहें भी हैं, जोकि बॉलीवुड फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। कभी बॉलीवुड के सितारे इन खेतों में रोमांस करते दिखे, तो कभी पुरानी हवेलियों और किलों मे फिल्मों की कहानी को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाया। यही कारण है कि फिल्मी लोकेशन पसंद करने वाले लोगों के लिए पंजाब की कुछ जगहें किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं हैं। ऐसे में अगर आप भी पंजाब घूमने का प्लान कर रही हैं, तो हम आपको पंजाब की कुछ बेहद खूबसूरत जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।</p><h2>पटियाला</h2><p>पंजाब का पटियाला शहर अपने ऐतिहासिक महलों, इमारतों और खूबसूरत गलियों के लिए जाना जाता है। फिल्म 'जब वी मेट' और 'बॉडीगार्ड' में शहर की शाही वास्तुकला देखने को मिलती है। ऐसे में आप भी अपने पार्टनर के साथ पटियाला घूमने के लिए जा सकती हैं।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kolkata-travel-guide-for-october-durga-puja-trip-and-top-sightseeing-spots" target="_blank" rel="noopener">October में Kolkata Trip का बनाएं प्लान, Durga Puja के साथ घूमें ये प्रमुख जगहें</a></p><h2>अमृतसर</h2><p>अमृतसर, पंजाब के सबसे फेमस जगहों में से एक है। यहां पर स्वर्ण मंदिर यानी की गोल्डन टेंपल से लेकर पुरानी गलियों तक हर एक कोना अलग है। तापसी पन्नू की फिल्म 'मनमर्जियां' में पंजाब के अमृतसर का खूबसूरत नजारा दिखाया गया है। ऐसे में आप भी यहां जाने का प्लान बना सकती हैं।</p><h2>लुधियाना</h2><p>पंजाब की असली खूबसूरती देखने के लिए आपको लुधियाना और इसके आसपास के इलाकों को एक्सप्लोर करना चाहिए। सरसों के रंग, खेत और पंजाबी माहौल फिल्मों में खूब दिखाए जाते हैं। आपको यहां पर फिल्म 'रब ने बना दी जोड़ी' वाला रोमांटिक माहौल मिलेगा।</p><h2>गुज्जरवाल और नारंगवाल गांव</h2><p>बॉलीवुड की फिल्म दंगल की पंजाब और हरियाणा की कई जगहों पर शूटिंग हुई है। फिल्म में दिखाए जाने वाले कई सीन पंजाब के गांव गुज्जरवाल और नारंगवाल के हैं। ऐसे में अगर आप भी इस गांव के सुंदर नजारे देखना चाहती हैं, तो आप यह गांव घूमने के लिए जा सकती हैं।</p><h2>मोहाली</h2><p>पंजाब की यह जगह तब अधिक लोकप्रिय हुई थी, जब बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर की फिल्म की शूटिंग यहां हुई थी। इसके अलावा एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की फिल्म की भी यहां पर शूटिंग हो चुकी है। ऐसे में आप भी इस जगह को एक्सप्लोर कर सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/famous-bollywood-shooting-locations-to-visit-in-punjab</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[IRCTC लाया Assam और Kerala के लिए खास Tour Package, खाने-रहने का खर्च शामिल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/irctc-launches-tour-packages-for-northeast-india-and-kerala]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घुमक्कड मनुष्य प्रजाति आज के समय में बैग पैक करके कहीं न कहीं चली जाती है। अगर आप भी अक्टूबर में घूमने का प्लान बना रहे है, तो यह लेख आपके लिए है। अब आप शिमला-मनाली का फितूर छोड़ें! पूर्वोत्तर भारत के घने जंगलों और झरनों का मजा लें। वहीं, दूसरी तरफ दक्षिण भारत की शांत झीलों और चाय के बागानों का आनंद लें।</p><p>इस बीच, भारतीय रेलवे ने दो शानदार टूर पैकेज लेकर आया है। इन पैकेज को बुक करके आप ट्रिप का आनंद लें। IRCTC के इन टूर पैकेज में आपको रुकने, खाने-पीने, घूमने और ट्रैवल इंश्योरेंस का पूरा खर्च पहले से शामिल है। आइए आपको इन टूर पैकेज के बारे में बताते हैं।</p><p><strong>असम और मेघालय टूर</strong></p><p>यदि आपको ऊंचे-ऊंचे पहाड़, गिरते झरने और जंगल सफारी का रोमांचक सफर देखना है, तो आप यह 6 से 7 दिन का यह पैकेज आपको जरुर पसंद आएगा।</p><p><strong>पैकेज का नाम:</strong> असम एंड मेघालय टूर<br><strong>बुकिंग कोड: </strong>WBA106<br><strong>प्रति व्यक्ति खर्च: </strong>₹54,900</p><p><strong>ट्रिप में क्या-क्या होगा खास?</strong></p><p>इस पैकेज में आपको असम के गुवाहाटी और काजीरंगा नेशनल पार्क के साथ ही मेघालय की हसीन वादियों (शिलॉग, चेरापूंजी और मावलिननांग) का लुत्फ उठाएंगे। वहीं, आपको चेरापूंजी और शिलांग में नोहकालीकाई वॉटरफॉल और एलिफेंट फॉल्स घूमाया जाएगा। एशिया का सबसे साफ-सुथरे गांव 'मावलिननांग' जाने और वहां मौजूद पेड़ों की जड़ों से बने अद्भुत पुल को देखने का मौका भी मिलेगा। इस पैकेज में प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन के साथ ही आपकी यह यात्रा पूरी की जाएगी।</p><p><strong>केरल हाउसबोट स्टे पैकेज</strong></p><p>केरल को 'God's Own Country' के नाम से जाना जाता है। यहां की अद्भुत शांति और हरियाली सबके मन को भाती है। IRCTC का यह पैकेज 7 रात और 6 दिन का है।</p><p><strong>टूर का नाम:</strong> मेसमराइजिंग केरल विद हाउसबोट स्टे<br><strong>बुकिंग कोड: </strong>WBA040C<br><strong>प्रति व्यक्ति खर्च: </strong>₹66,700</p><p><strong>ट्रिप में क्या-क्या होगा खास?</strong></p><p>इस टूर पैकेज में आपको कोचीन, मुन्नार, थेक्कडी, कुमारकोम और तिरुवनंतपुरम की हसीन वादियो का नजारा देखने को मिलेगा। मुन्नार के धुंध भरे चाय के बागान और थेक्कडी के पेरियार नेशनल पार्क में मसालों के बगीचे व वन्यजीवन आपको मंत्रमुग्ध कर ही देंगे।</p><p>दरअसल, इस ट्रिप का सबसे बड़ा आकर्षण कुमारकोम है, जहां आपको बैकवाटर्स के शांत पानी में तैरती एक पारंपरिक हाउसबोट में रात बिताने और वहां के लोकल भोजन का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। वहीं, आप कोच्चि, कोवलम बीच की सैर करेंगे और विश्व प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के भी दर्शन करेंगे।</p><p><strong>कैसे बुक करें पैकेज</strong></p><p>- अगर आप टूर पैकेज बुक करना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले IRCTC टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट (irctctourism.com) ओपन करें।</p><p>- इसके बाद सर्च बॉक्स में टूर का कोड डालें। &nbsp;(पूर्वोत्तर भारत के लिए WBA106 और केरल के लिए WBA040C)।</p><p>- फिर अपनी यात्रा की तारीख चूज करें और आपके साथ कितने लोग जा रहे हैं।</p><p>- इसके बाद सभी पर्सनल जानकारी फिल करके, ऑनलाइन पेमेंट का भुगतान करें।</p><p>- आपकी टिकट बुक होते ही ई-टिकट और वाउचर आपके रजिस्टर्ड ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर पर तुरंत भेज दिया जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/irctc-launches-tour-packages-for-northeast-india-and-kerala</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[October में Kolkata Trip का बनाएं प्लान, Durga Puja के साथ घूमें ये प्रमुख जगहें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kolkata-travel-guide-for-october-durga-puja-trip-and-top-sightseeing-spots]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>धूमने के लिए अक्तूबर का मौसम सबसे बढ़िया होता है। इस समय न ज्यादा गर्मी होती है न ज्यादा ठंड होती है। इस समय आप पहाड़ों से लेकर बीच ट्रिप की प्लानिंग कर लेते हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग जगह पर घूमना चाहते हैं, तो आप 'सिटी ऑफ जॉय' कोलकाता घूमने जरुर जाएं। अक्तूबर में यहां मौसम के साथ-साथ शहर का पूरा मौहाल भी बेहतरीन होता है, क्योंकि इस दौरान दुर्गा पूजा की धूम काफी देखने को मिलती है।</p><p>इस बार 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्तूबर से 19 अक्तूबर तक है। इस दौरान आप कोलकत्ता घूमने जरुर जाए। यह सिर्फ टूरिस्ट प्लेस नहीं है, बल्कि बड़े-बड़े पंडाल, सजावट, ढाक की आवाज और बंगाल की फेस्टिवल वाली रौनक भी देखने को मिलेगी। आइए आपको कोलकाता जाने का पूरा ट्रैवल गाइड बताते हैं।</p><p><strong>कोलकाता में कहां-कहां घूम सकती हैं आप?</strong></p><p>असल में कोलकाता शहर में पंडाल देखने के अलावा, यहां पर इतिहास, मंदिर, म्यूजियम, नदी और पुराने इलाको से लेकर मशहूर बाजार तक काफी कुछ है।</p><p><strong>विक्टोरिया मेमोरियल</strong></p><p>कोलकाता का प्लान बना रही हैं, तो आप विक्टोरिया मेमोरियल जरुर देखें। यह बेहद ही खूबसूरत है और सफेद पत्थर से बनी यह इमारत शहर की पहचान है। इसकी खासियत यह है कि यहां म्यूजियम भी है, जहां आपको इतिहास संबंधित कला भी देखने को मिलेगी। यहां की अलग-अलग गैलरी में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक चीजें देखने को मिलेगी।</p><p><strong>हावड़ा ब्रिज</strong></p><p>कोलकाता जा रहे हैं, तो हावड़ा ब्रिज, तो जरुर जाएं। ऐसा ही नहीं हो सकता है। हावड़ा ब्रिज भी कोलकाता की पहचान है। यहां जाकर आप हुगली नदी और आसपास के शहरों नजारा देख सकते हैं। अगर आपकी फोटोग्राफी पसंद है, तो भी यह जगह आपकी लिस्ट में जरुर चाहिए।</p><p><strong>कालीघाट मंदिर</strong></p><p>नवरात्र के दिनों में कालीघाट मंदिर के पास अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इसलिए आप कालीघाट मंदिर के जरुर दर्शन करें। यह कोलकत्ता की प्रसिद्ध धार्मिक जगहों में से एक है। दुर्गा पूजा के समय तो यह और भी दिव्य नजर आता है।</p><p><strong>दक्षिणेश्वर काली मंदिर</strong></p><p>कोलकाता की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक जगहों में से एक है दक्षिणेश्वर काली मंदिर है। यहां पर आपके पास ठीक-ठाक समय है, तो कालीघाट के साथ इसे भी प्लान में शामिल कर सकते हैं।</p><p><strong>बेलूर मठ और इंडियन म्यूजियम</strong></p><p>हुगली नदी के पास स्थित बेलूर मठ भी काफी सुंदर है। यहां रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का हेडक्वार्टर है। इस जगह पर आपको काफी शांति महसूस होगी। इसके अलावा, आपको इतिहास और पुरानी चीजों में ज्यादा दिलचस्प है, तो आप इंडियन म्यूजियम जा सकती हैं। यहां पर कई तरह की पुरानी और ऐतिहासिक चीजें देखने को मिल जाएंगी।</p><p><strong>3 दिन का बनाएं कोलकाता घूमने का प्लान</strong></p><p><strong>पहला दिन</strong></p><p>घूमने की शुरुआत आप पहले दिन विक्टोरिया मेमोरियल, हावड़ा ब्रिज और आसपास की जगहों को एक्सप्लोर करें। शाम के समय दुर्गा पंडाल देखने जरुर जाएं।</p><p><strong>दूसरा दिन</strong></p><p>सुबह-सुबह कालीघाट और फिर दक्षिणेश्वर काली मंदिर का दर्शन करें। फिर बचे हुए समय में बेलूर मठ जा सकते हैं।</p><p><strong>तीसरा दिन</strong></p><p>इंडियन म्यूजियम और शहर के पुराने इलाकों को जरुर एक्सप्लोर करें। फिर आप स्ट्रीट या किसी लोकल मार्केट में घूमें और शॉपिंग व खाने का मजा लें।</p><p><strong>कोलकाता जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान</strong></p><p>- दुर्गा पूजा के दिनों में होटल और ट्रांसपोर्ट की डिमांज सबसे ज्यादा होता है, इसलिए अभी से बुकिंग कर लें।</p><p>- नवरात्र के दौरान सड़कों पर काफी भीड़ देखने को मिल सकती है, इसलिए अपने सामानों की रक्षा स्वयं करें।</p><p>- घूमने के लिए आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।</p><p>- वहीं, मंदिर और पंडाल के नियमों का विशेष ध्यान रखें।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 17:31:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kolkata-travel-guide-for-october-durga-puja-trip-and-top-sightseeing-spots</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/champu-khangpok-is-a-floating-village-on-loktak-lake-in-manipur]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं।</p><h2>फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक</h2><p>भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/gaya-ji-pind-daan-travel-route-and-budget-guide-for-pitru-paksha" target="_blank" rel="noopener">Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल</a></p><h2>जानें डगमगाती जमीन का रहस्य</h2><p>चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है।</p><p>वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है।</p><h2>बदलती है घरों की लोकेशन</h2><p>यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।</p><h2>देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क</h2><p>अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 16:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/champu-khangpok-is-a-floating-village-on-loktak-lake-in-manipur</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/gaya-ji-pind-daan-travel-route-and-budget-guide-for-pitru-paksha]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। वहीं, गया जी जाकर पिंडदान भी करते हैं। यदि आप भी गया जी जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस लेख में जान लें कि सफर शुरु करने से पहले रुट और खर्च का अंदाजा लग जाए। बिहार का गया पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने वाली खास जगहों में माना जाता है।</p><p>इस समय गया में काफी संख्या में लोग जाते हैं। असल में गया में पिंजदान के लिए कई जगहें हैं और कुछ वेदियों को खास माना जाता है। ऐसे में आपके लिए पूरा गाइड लेकर आए हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं ट्रेन, फ्लाइट, रहने और पिंडदान से संबंधित खर्च की जानकारी आपको बताने जा रहे हैं।</p><p><strong>गया जी में पिंडदान के लिए हैं 48 प्रमुख वेदियां</strong></p><p>बिहार टूरिज्म के मुताबिक, गया में पिंडदान के लिए कुल 48 मुख्य वेदियां है। इसमें विष्णुपद मंदिर, गया शिरोमणि मंदिर, फल्गु नदी, पंचतीर्थ, अक्षय वट, प्रेतशिला, रामशिला और सीता कुंड सबसे खास माने जाते हैं। श्राद्ध के समय यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है।</p><p><strong>दिल्ली से गया कैसे पहुंचें?</strong></p><p>यदि आप दिल्ली से गया जी जाना चाहते हैं, तो पहले पटना तक पहुंचना होगा। आप पटना ट्रेन या फ्लाइट से भी पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना और आसपास के शहरों से गया जाने के लिए ट्रेन आसानी से मिल जाती है। पटना से गया पहुंचने के लिए आपको करीब 2 घंटे का समय लग सकता है। जब आप गया जी जंक्शन पहुंच जाएं तो पिंडदान वाली जगह तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी।</p><p><strong>फ्लाइट से जाने का क्या तरीका है?</strong></p><p>आपके पास समय की दिक्कत है, तो आप फ्लाइट के जरिए आप पटना पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना से गया जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी लेना होगा। लेकिन इससे आपका कुल खर्चा हो सकता है। फिर आप पटना से गया जा सकते हैं, इसके लिए आपको बस, टैक्सी या अपनी कार भी बुक कर सकते हैं।</p><p><strong>दिल्ली से ट्रेन का कितना खर्च आएगा?</strong></p><p>दिल्ली से ट्रेन गया जाती है और टिकट करीब 500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक हो सकता है। वैसे ट्रेन की टिकट क्लास के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो इसका खर्चा करीब 5000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का हो सकता है।</p><p><strong>गया में रुकने का किचना खर्चा आएगा?</strong></p><p>गया में रुकने के लिए अपने बजट के हिसाब से रह सकते हैं। आपकी पंसद और सुविधा के अनुसार से ठहरने का खर्च करीब 3000 से 5000 रुपये तक का हो सकता है। इतना ही नहीं, खाने-पीने पर करीब 2000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं।</p><p><strong>पिंडदान और पंडा की फीस क्या है?</strong></p><p>वैसे पिंडदान के लिए यहां का खर्च सभी के लिए एक जैसा नहीं है। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि कितने लोग जा रहे हैं और किस तरह की पूजा कराई जाएगी। बताते चलें कि नॉर्मल पिंडदान और पूजा-पाठ कराने में आपको 5100 से करीब 11,000 रुपये देने होंगे।</p><p><strong>गया जी जाने से पहले बजट ऐसे समझें</strong></p><p>यदि आप गया जा रहे है, तो आपको मोटा-मोटी खर्चा इतना आ सकता है, बजट के कुछ पॉइंट्स को जरुर समझें।</p><p>दिल्ली से ट्रेन: करीब 500 से 3,000 तक<br>फ्लाइट से पटना: करीब 5,000 से 10,000 तक<br>गया में स्टे करना: करीब 3,000 से 5,000 तक<br>खान-पान: करीब 2000 तक<br>पिंडदान और पूजा-पाठ: करीब 5100 से 11,000 तक<br>पटना से गया: ट्रेन, बस, टैक्सी या प्राइवेट कार का ऑप्शन<br>पितृपक्ष मेला 2026: 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 12:22:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/gaya-ji-pind-daan-travel-route-and-budget-guide-for-pitru-paksha</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Tourism Day 2026: राजस्थान पर्यटन का नया रिकॉर्ड, 6 महीने में पहुंचे 10.92 करोड़ पर्यटक, विदेशी पसंद Jaipur]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/rajasthan-records-over-10-crore-tourist-visits-in-six-months]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आज के समय में राजस्थान के पर्यटन नक्शे की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आप यह जानकार हैरान हो जाएंगे कि जनवरी से लेकर जून 2026 के बीच प्रदेश में 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज की गई हैं। इनमें 10.83 करोड़ घरेलू और 8.44 लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं।</p><p>आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान के पर्यटन कारोबार की सबसे बड़ी ताकत घरेलू पर्यटक हैं, लेकिन उनकी पसंद पारंपरिक पर्यटन केंद्रों से आगे बढ़ रही है।</p><p><strong>घरेलू पर्यटन में सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा</strong></p><p>सबसे दिलचस्प बात यह है कि सीकर का शीर्ष पर पहुंचना राजस्थान के पर्यटन में बदलती पसंद का संकेत है। जिले में धार्मिक पर्यटन खासतौर पर खाटूश्यामजी आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने फुटबॉल बढ़ाया है। साल 2026 की पहली छमाही में सीकर की घरेलू पर्यटक यात्राएं 1,56,18,987 रहीं।</p><p>घरेलू पर्यटकों में चित्तौड़गढ़ की ऐतिाहासिक विरासत, जैसलमेर का रेगिस्तानी पर्यटन और सवाई माधोपुर का वन्यजीव पर्यटन भी बड़ी संख्या में सैलानियों को आकर्षित कर रहा है। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि पर्यटन अब सिर्फ जयपुर, उदयपुर और जोधपुर जैसे पारंपरिक केंद्रों तक सीमित नहीं रह गया है।</p><p><strong>विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद जयपुर</strong></p><p>आपको बताते चलें कि विदेशी पर्यटकों के मामले में तस्वीर काफी अलग है। जयपुर 2,56,293 विदेशी पर्यटकों यात्राओं के साथ सबसे अलग है। फिर उदयपुर में 1,84,045, जोधपुर में 82,846 और जैसलमेर में 66,433 विदेशी पर्यटकों ने यात्राएं की हैं।</p><p>इतना ही नहीं, सवाई माधोपुर, अजमेर, दौसा, पाली, झुंझुनूं और बीकानेर भी विदेशी पर्यटकों की पसंद रही है। घरेलू सैलानी जहां धार्मिक, ऐतिहासिक, वन्यजीव और क्षेत्रीय पर्यटन स्थलों की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं विदेशी पर्यटकों का बड़ा हिस्सा अभी भी राजस्थान के मुख्य हेरिटेज शहरों से संबंधित है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/rajasthan-records-over-10-crore-tourist-visits-in-six-months</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Delhi से 8 घंटे की ड्राइव पर है खूबसूरत Chakrata, बजट ट्रिप और होमस्टे के बेहतरीन विकल्प]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/beautiful-chakrata-an-8-hour-drive-from-delhi-offering-options-for-budget-trips]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घूमना-फिरना तो लगभग हर किसी को पसंद होता है। जैसे ही काम से छुट्टी मिलती है, तो लोग कुछ दिनों के लिए शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून की तलाश में अच्छी और खूबसूरत जगहें तलाश करने लगते हैं। ऐसे में लोगों के मन में सबसे पहले शिमला, मसूरी, नैनीताल, धर्मशाला और मनाली जैसी जगहों का नाम आता है। लेकिन यह सभी फेमस टूरिस्ट प्लेस हैं, यहां पर भीड़ के साथ-साथ बजट भी ठीक-ठाक देखना पड़ता है। ऐसे में अगर आप बजट में ट्रिप प्लान करना चाहती हैं, तो आप चकराता जाने का प्लान बना सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चकराता जाने, रुकने, घूमने और खाने तक की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।</p><h2>चकराता ट्रिप</h2><p>चकराता, उत्तराखंड के देहरादून जिले में &nbsp;है, जोकि समुद्र तल से करीब 6,948 फीट की ऊंचाई पर है। यह जगह दिल्ली वालों के लिए परफेक्ट है। वहीं चकराता में आपको सिर्फ पहाड़ नहीं बल्कि व्यू पॉइंट, ट्रेकिंग, जंगल, झरने और आसपास घूमने के लिए कई जगहें मिल जाएंगी।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/delhi-weekend-getaways-to-morni-hills-and-parwanoo-offer-budget-friendly-trips" target="_blank" rel="noopener">Delhi के पास 2-Day Weekend Trip के लिए बेस्ट हैं ये जगहें, कम बजट में मिलेंगे होमस्टे</a></p><h2>क्यों जाएं चकराता</h2><p>अगर आप भी वह जगहें पसंद हैं, जहां पर ज्यादा भीड़ न हो, तो यकीनन आपको चकराता जरूर पसंद आएगा। क्योंकि यहां पर आपको चारों ओर जंगल और पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां पर चीड़, देवदार, ओक और अन्य पेड़ों के जंगल हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक यह जगह नेचर वॉक और ट्रेकिंग के लिए बेस्ट है।</p><h2>दिल्ली से चकराता की दूरी</h2><p>बता दें कि दिल्ली से चकराता की दूरी करीब 330-350 किमी है। अगर आप यहां अपनी कार से जाना चाहती हैं, तो 7-8 घंटे का समय लग सकता है। लेकिन ट्रैफिक, रास्ते में रुकने और पहाड़ी सड़कों की स्पीड देखते हुए अधिक समय भी लग सकता है। ऐसे में अगर आप वीकेंड पर जाने का प्लान कर रही हैं, तो आपको सुबह जल्दी निकलना चाहिए।</p><h2>चकराता में कहां घूमें</h2><h2>टाइगर फॉल्‍स</h2><p>यह चकराता की सबसे फेमस जगह है। टाइगर फॉल्स चकराता से करीब 20 किमी दूर है। यहां पर ऊंचाई से पानी गिरता है। साथ ही यहां पर आसपास की हरियाली देखने लायक होती है। वहीं मानसून में झरने का नजारा और भी अधिक खूबसूरत हो जाता है। लेकिन बारिश के दौरान यहां पर लैंडस्लाइड और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन का खतरा रहता है। इसलिए मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यहां पर जाएं।</p><h2>चिलमिरी नेक</h2><p>अगर आप भी पहाड़ों का खुला नजारा देखना चाहती हैं, तो आपको चिलमिरी नेक जाना चाहिए। यह चकराता का एक बेहद खूबसूरत व्यू पॉइंट हैं। यहां से आसपास के जंगल और पहाड़ साफ दिखते हैं। वहीं अगर मौसम साफ हो, तो पहाड़ों का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है।</p><h2>मोइला टॉप</h2><p>अगर आपको भी एडवेंचर और ट्रैकिंग पसंद है, तो मोइला टॉप जाने का प्लान कर सकती हैं। यह चकराता के ऊंचे हिस्सों में से एक हैं और यहां पहुंचने के लिए आपको ट्रेक करना होगा। इस ट्रेक को पूरा करने में आपको कई घंटे लग सकते हैं।</p><h2>बुधेर गुफा</h2><p>चकराता के आसपास बुधेर गुफा भी घूमने के लिए जा सकते हैं। इसको देखने के लिए आपको ट्रेकिंग करनी पड़ेगी। अगर आपको थोड़ा एडवेंचर पसंद है, तो आप इस जगह को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकती हैं।</p><h2>देवबन</h2><p>यह चकराता के आसपास खूबसूरत जंगल वाला इलाका है। देवबन समुद्र तल से करीब 9,279 फीट की ऊंचाई पर है। अगर आपको भी ऐसी जगह और प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है, तो आप यहां पर जा सकते हैं।</p><h2>चकराता में क्या खाएं</h2><p>चकराता कोई बड़ा शहर नहीं है, इसलिए यहां पर आपको दिल्ली जैसे बहुत सारे फूड या रेस्टोरेंट नहीं मिलेंगे। आमतौर पर यहां पर खाने में लोकल फूड, इंडियन खाना और कुछ चाइनीज फूड मिल सकता है। वहीं ट्रिप के दौरान आप दाल-चावल, पराठे, गर्म चाय और दूसरे पहाड़ी खाने खा सकती हैं। वहीं अगर आप होमस्टे में रुक रही हैं, तो आपको घर का बना खाना भी मिल सकता है।</p><h2>चकराता में स्टे</h2><p>यहां पर आपको लग्जरी होटल नहीं मिलेंगे। इसकी जगह पर आपको होमस्टे, रिजॉर्ट और कैंपिंग जैसे विकल्प मिल जाएंगे। अगर आप अपने परिवार के साथ जा रही हैं, तो मार्केट के पास स्टे करना अधिक सही होगा। लेकिन अगर आपको शांति चाहिए, तो चकराता से थोड़ा बाहर पहाड़ों और जंगल के बीच बने होमस्टे या फिर रिजॉर्ट में स्टे कर सकती हैं।</p><h2>मानसून में इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>अगर आप भी अगस्त या सितंबर के महीने में चकराता ट्रिप प्लान कर रही हैं, तो आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बारिश के मौसम में पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड और सड़कें बंद होने की समस्या हो सकती है। इसलिए निकलने से पहले मौसम का अपडेट लेना न भूलें। वहीं बारिश अधिक हो, तो झरने या ट्रेक के पास जाने की जल्दबाजी न करें। साथ ही नीचे बताई गई कुछ चीजों को अपने साथ जरूर रखें।</p><p>जैकेट या गर्म कपड़े<br>छाता या रेनकोट<br>अच्छे ग्रिप वाले शूज<br>जरूरी दवाइयां&nbsp;<br>पानी की बॉटल<br>पावर बैंक<br>ड्राई स्नैक्स</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:17:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/beautiful-chakrata-an-8-hour-drive-from-delhi-offering-options-for-budget-trips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Delhi के पास 2-Day Weekend Trip के लिए बेस्ट हैं ये जगहें, कम बजट में मिलेंगे होमस्टे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/delhi-weekend-getaways-to-morni-hills-and-parwanoo-offer-budget-friendly-trips]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>क्या आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। अगर आप दिल्ली के आसपास रहते हैं, तो अपने दोस्तों या परिवार के साथ इन जगहों पर घूमने जरुर जाएं। हर कोई चाहता है कि ऐसी ट्रिप पर जाएं, जहां भीड़भाड़ कम हो और शांति के पल बिता सकते हैं।</p><p>यदि आप भी वीकेंड पर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां भीड़ कम मिले और आपके बजट में एक शानदार ट्रिप हो जाए, तो इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि दिल्ली के पास की दो ऐसी खूबसूरत जगहों के बारे में, जहां आप कम खर्चे में आसानी से 2 दिन की ट्रिप का प्लान कर सकती हैं।</p><p><strong>2 Day वीकेंड गेटवे डेस्टिनेशन</strong></p><p>दिल्ली से नजदीक खूबसूरत पहाड़ियों से लेकर ऐतिहासिक स्थलों तक, कुछ डेस्टिनेशंस ऐसी होती है, जहां जाने के बाद असली सुकून प्राप्त होता है। यदि आप कम पैसों में आरामदायक होमस्टे, लोकल जायके और शांति से ट्रिप को एन्जॉय करना चाहते हैं, तो यह पॉकेट-फ्रेंडली 2-डे वीकेंड गेटवे आपके लिए बेस्ट रहने वाली है।</p><p><strong>मोरनी हिल्सी, हरियाणा</strong></p><p>हरियाणा में स्थित यह इकलौता हिलस्टेशन मोरनी हिल्स है, जो कि दिल्ली वालों के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। यह चंडीगढ़ के पास और दिल्ली से करीब 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां कम समय में पहाड़ों की ठंडी हवा का आनंद लिया जा सकता है।</p><p>यहां पर स्थित टिक्कर ताल झील पर आप बोटिंग और पिकनिक का मजा ले सकते हैं। परिवार के साथ घूमने के लिए भी यह जगह बेहद खास है। यहां पर आप लोकल व्यंजनों का आनंद उठा सकते हैं। इसके अलावा, यहां बाकी टूरिस्ट स्पॉट्स के मुकाबले सस्ते होमस्टे आसानी से मिल जाएंगे।</p><p><strong>कैसे पहुंचे- </strong>यहां पर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट &nbsp;है, जो मोरनी हिल्स से करीब 45 किलोमीटर दूर है। वहीं, चंडीगढ़ जंक्शन और चंडी मंदिर रेलवे स्टेशन से बेहद नजदीक है।</p><p><strong>परवाणू और सोलन, हिमाचल प्रदेश</strong></p><p>यदि आप पहाड़ों की दीदार करना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश की तरफ जा सकते हैं। परवाणू और सोलन दोनों ही जगहों बहुत खूबसूरत है। हिमाचल में बसी यह एक सुंदर खूबसूरत और कम भीड़भाड़ वाली जगह है।</p><p>इतना ही नहीं, परवाणू में अपनी केबल कार राइड यानी टिम्बर ट्रेल के लिए काफी मशहूर है। इधर आपको सेब के बागान, चाय के छोटे-छोटे बाग और देवदार के घने जंगल देखने को मिलेंगे। आप यहां पर फोटोग्राफी और फोटोशूट भी कर सकते हैं। यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। आपको यहां पर बजट-फ्रेंडली होमस्टे आसानी से मिल जाएंगे।</p><p><strong>ऐसे पहुंचे- </strong>यहां जाने के लिए आप सबसे निकटम हवाई अड्डा चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो कि परवाणू से करीब 30-35 किलोमीटर दूर है। वहीं, आप दिल्ली से कालका या चंडीगढ़ तक ट्रेन लेकर, वहां से बस के जरिए आप आसानी से परवाणू और सोलन पहुंच सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 11:10:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/delhi-weekend-getaways-to-morni-hills-and-parwanoo-offer-budget-friendly-trips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Festival Capital of the World लुइसियाना में Jazz Fest और Food Culture का लें अनोखा आनंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/louisiana-hosts-over-400-events-as-festival-capital-of-the-world]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हम सभी लोगों को घूमने-फिरने का बहुत शौक होता है। वहीं विदेश जाने का सपना हर किसी का होता है। ऐसे में अगर आप भी इस गर्मी विदेश घूमने का प्लान बना रही हैं और किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर घूमने-फिरने के साथ-साथ वहां का कुजीन, म्यूजिक, कल्चर और कलरफुल फेस्टिवल का भी मजा ले सकें, तो आपको अमेरिका का लुइसियाना राज्य एक्सप्लोर करना चाहिए। बता दें कि हर साल लुइसियाना में 400 से ज्यादा फेस्टिवल और मेलों का आयोजन होता है।</p><p>जिस कारण इसको फेस्‍ट‍िवल कैपि‍टल ऑफ द वर्ल्‍ड भी कहा जाता है। गर्मियों में इस राज्य का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है। कहीं पर म्यूजिक शो चल रहा होता है, तो कहीं पर बुफे सजा होता है। ऐसे में अगर आप भी अपनी ट्रिप को यादगार बनाना चाहते हैं, तो आपको लुइसियाना घूमने जाना चाहिए।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kainchi-dham-visitors-can-explore-beautiful-places-within-10-km-in-nainital" target="_blank" rel="noopener">Nainital के Kainchi Dham के पास जरूर देखें Bhowali, नगरी गांव और श्यामखेत टी गार्डन</a></p><h2>फेस्टिवल कैपिटल है लुइसियाना</h2><p>अमेरिका के राज्य लुइसियाना में साल भर अलग-अलग तरह के फेस्टिवल होते हैं। यहां पर होने वाले फेस्टिवल्स सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं होते हैं, बल्कि खानपान, हिस्ट्री और लोकल कल्चर से भी जुड़े होते हैं। यही कारण है कि यहां पर हर उम्र के लोगों के लिए कुछ खास है।</p><h2>फूड लवर्स के ल‍िए जन्‍नत</h2><p>अगर आपको भी नई-नई चीजें टेस्ट करने का शौक है, तो लुइसियाना आपको जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। यहां पर पीच फेस्टिवल होता है, जहां पर लोगों को पीच से बनी कई डिशेज चखने का मौका मिलता है।</p><p>अगर आपको नई-नई चीजें खाने का शौक है, तो लुइसियाना आपको जरूर जाना चाह‍िए। यहां पर पीच फेस्टिवल होता है। इसमें लोगों को पीच से बनी कई डिशेज को टेस्‍ट करने का मौका मिलता है। इसके अलावा टोमैटो और वॉटरमेलन फेस्टिवल भी लोगों को खूब अट्रैक्‍ट करता है। न्यू ऑरलियन्स में होने वाला क्रियोल टोमैटो फेस्टिवल और ब्यूरेगार्ड वॉटरमेलन फेस्टिवल में आप लोकल फ्रूट्स का स्वाद तो ले ही सकती हैं, साथ ही यहां कई मजेदार एक्‍ट‍िव‍िटीज में भी ह‍िस्‍सा ले सकती हैं।</p><h2>सीफूड फेस्टिवल</h2><p>अमेरिका के इस राज्य को सी फूड के लिए भी जाना जाता है। यहां पर होने वाले सीफूड फेस्टिवल्स में झींगे और दूसरे सी फूड्स का भी स्वाद ले सकते हैं। वहीं कई जगहों पर स्ट्रीट फेयर और कुछ जगहों पर ट्रे़डिशनल डांस भी होता है।</p><h2>म्‍यूज‍िक लवर्स के ल‍िए है खास</h2><p>लुइसियाना का नाम आते ही लोगों को ब्लूज, जैज और काजुन म्यूजिक की याद आती है।</p><h2>जैज और ब्लूज</h2><p>लुइसियाना में गर्मियों में कई बड़े म्यूजिक फेस्टिवल होते हैं, जिसमें दुनिया भर के तमाम आर्टिस्ट्स हिस्सा लेते हैं। वहीं न्यू ऑरलियन्स का जैज कल्चर तो पूरी दुनिया में फेमस है।</p><h2>सैचमो समरफेस्ट</h2><p>सैचमो समरफेस्ट महान जैज कलाकार लुई आर्मस्ट्रॉन्ग की याद में होता है। यहां पर लाइव म्यूजिक के अलावा कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है।</p><h2>जैज फेस्ट</h2><p>यह लुइसियाना का सबसे फेमस फेस्ट होता है। इसमें दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग शामिल होने के लिए आते हैं।</p><h2>करीब से जान सकेंगे कल्‍चर</h2><p>लुइसियाना के फेस्टिवल सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए ही नहीं बल्कि यहां के कल्चर को भी देखने का मौका मिलता है।</p><h2>श्रिम्प और पेट्रोलियम फेस्टिवल</h2><p>लोकल फ‍िशरमैन और ऑयल कंपनी से जुड़े लोगों के सम्मान में यह फेस्टिवल मनाया जाता है। यहां पर पानी में होने वाली परेड भी देखने को मिलेगी। इसके अलावा यहां पर शुगर केन फेस्टिवल भी बेहद स्पेशल तरीके से मनाया जाता है। इस फेस्टिवल में गन्ने के खेती से जुड़े कई कलरफुल प्रोग्राम दिखाए जाते हैं और परेड भी निकलती है।</p><h2>डक फेस्टिवल</h2><p>लुइसियाना का डक फेस्टिवल भी बेहद दिलचस्प और अलग माना जाता है। इस फेस्टिवल में कई फनी कॉम्पटीशन होते हैं और लोग इनमें हिस्सा भी लेते हैं।</p><h2>ESSENCE Festival</h2><p>अमेरिका का सबसे बड़ा कल्‍चर और म्‍यूजि‍क फेस्‍ट एसेंस फेस्‍ट‍िवल है। यहां पर वर्कशॉप, शॉपिंग, लाइव म्यूजिक और कई तरह के प्रोग्राम होते हैं। कुल मिलाकर म्यूजिक लवर के लिए यह फेस्ट बेस्ट है।</p><h2>परिवार और दोस्तों के साथ जाएं</h2><p>लुइसियाना के फेस्टिवल्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर हर उम्र के लोगों के लिए काफी कुछ है। यह एक एंटरटेनमेंट का हब है। इसलिए यह कपल्स ट्रिप और फैमिली ट्रिप दोनों के लिए बेस्ट ऑप्शन है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 14:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/louisiana-hosts-over-400-events-as-festival-capital-of-the-world</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jodhpur-Jaisalmer छोड़िए! राजस्थान के इस जगह पर कम खर्च में मिलेगी Night Jungle Safari]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/bera-town-in-rajasthan-offers-budget-friendly-leopard-night-safari-near-jawai-bandh]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>क्या आपको भी जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव लेना काफी पसंद है, तो यह लेख आपके लिए है। गौरतलब है कि रेतीले टीले और एतिहासिक महलों के लिए राजस्थान बेहद ही खूबसूरत है। जब लोगों की छुट्टी मिलती है, तो कई बार राजस्थान की फेमस जगहों को घूमने के लिए निकल जाते हैं।</p><p>यदि आप राजस्थान में कम भीड़-भाड़ वाली जगह को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आप शांति से नाइट जंगल सफारी का आनंद जरुर लें। आपको बता दें कि, पाली जिले में बसा छोटा-सा कस्बा 'बेरा' घूमने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है।</p><p><strong>तेंदुओं के लिए प्रसिद्ध राजस्थान की खास जगह</strong></p><p>इस इलाके में अरावली की ग्रेनाइट पहाड़ियों और जवाई बांध के आसपास फैला हुआ है, जो पूरे देश में तेंदुओं की आबादी के लिए काफी फेमस है। अब आप जोधपुर या जैसलमेर के महंगे टूर पैकेज को भूल जाइए और कम बज</p><p>में शानदार नाइट जंगल सफारी के लिए आप राजस्थान की इस मशूहर जगह बेरा जरुर जाएं।</p><p><strong>बजट-फ्रेंडली नाइट जंगल सफारी का अनुभव</strong></p><p>अब आपको महंगे नेशनल पार्कों और कोर टाइगर रिजर्व्स में जाते हैं, हालांकि उनके मुकाबले बेरा में सफारी का एक अलग ही मजा आता है। कम खर्चा में आप अपनी ट्रिप को बेहद खास बना सकते हैं। रणथंभौर या जैसलमेर की मंहगी सफारी बुकिंग के चक्कर में पड़ने बजाय, आप बेरा में स्थानीय गाइडों के साथ खुली जीप में आसानी से नाइट सफारी का आनंद ले सकते हैं। अन्य जगहों के तुलना में आपको यहां पर सरकारी सफारी की एडवांस बुकिंग को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा।</p><p><strong>किफायती विलेज होमस्टे और कैंपिंग का आनंद</strong></p><p>जैसा कि आप जोधपुर या जैसलमेर जैसी जगहों पर जाते हैं, तो वहां के महंगे हेरिटेज होटल आपकी जेब पर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, आप बेरा और उसके आसपास के गांवों में आपको कई तरह के होमस्टे देखने को मिल जाएंगे, जो कि आपके बजट में आसानी से आ जाएंगे। यहां पर आपको कम से कम 800 से 1,500 रुपये तक में रहने के लिए शानदार कमरे मिल जाएंगे। रात के समय आप कैंपफायर का मजा ले सकते हैं। वहीं, राजस्थानी भोजन का स्वाद जरुर लें।</p><p><strong>जवाई बांध और समृद्ध प्राकृतिक नजारे</strong></p><p>जब आप यहां पर रात के समय जाएंगे, तो आपको तेंदुए के अलावा लकड़बग्घा, जंगल कैट, लोमड़ी और सियार जैसे जानवर देखने को मिलेंगे। यहां पर आप खूबसूरत प्राकृतिक नजारों का आनंद उठा सकते हैं। वहीं, यहां पर फेमस जलाशय 'जवाई बांध' भी मौजूद है, जहां आप सैकड़ों मगरमच्छों को पानी के किनारे धूप सेकते हुए देख सकते हैं।</p><p><strong>राजस्थान के बेरा गांव में कैसे पहुंचे?</strong></p><p>सबसे पहले यहां पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है, जो कि बेरा गांव यहां से करीब 150 किमी दूरी पर है। जोधपुर हवाई अड्डा से करीब 170 किमी दूरी पर बेरा गांव पड़ता है। इसके अतिरिक्त बेरा पहुंचने के लिए आप नजदीकी रेलवे स्टेशन 'जवाई बांध' और 'फालना' हैं। रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से बेरा के लिए सीधी टैक्सी या बसें आसानी से मिल जाएंगी।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:12:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/bera-town-in-rajasthan-offers-budget-friendly-leopard-night-safari-near-jawai-bandh</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Imphal Trip: Kangla Fort से लेकर Ima Market तक, Imphal में देखने लायक हैं ये प्रमुख स्थल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/imphal-tourist-attractions-include-kangla-fort-ima-market-and-loktak-lake]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इंफाल एयरपोर्ट को देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा और बेहद खूबसूरत एयरपोर्ट इतना सहज है कि विमान से उतरकर पैदल ही आप भवन में दाखिल हुआ जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर इस शहर की अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा है। यहां के युवा जहां आधुनिक लिबास में नजर आता है, तो वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे अपने पारंपरिक परिधानों में दिखते हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।</p><h2>इमा मार्केट</h2><p>समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक शहर के बीचों-बीच बनी इमा मार्केट है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला बाजार। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं।</p><p>यहां पर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे- ब्लाउज, शॉल, चादर, दुपट्टे, गमछे और भी कई तरह की चीजें हैं। वहीं मार्केट के एक हिस्से में सिर्फ पूजा का सामान है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/man-kidnapped-from-imphal-airport-rescued-in-bishnupur-manipur-driver-arrested" target="_blank" rel="noopener">Imphal Airport से अगवा पश्चिम बंगाल का युवक Bishnupur से सुरक्षित बचाया गया</a></p><h2>एक्सप्लोर करें कांगला किला</h2><p>इंफाल में दो जगहें आपको जरूर देखनी चाहिए। जिसमें पहला कांगला किला है और दूसरा लोकताक लेक है। कांगला फोर्ट या किला शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे स्थित है।</p><p>मणिपुरी भाषा की भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। वहीं आज भी मणिपुर के निवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।</p><p>इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां बनी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/manipur-kangpokpi-protest-ends-after-security-forces-release-seven-kuki-villagers" target="_blank" rel="noopener">मणिपुर के Kangpokpi में 7 ग्रामीणों को हिरासत में लेने पर बवाल, रिहाई के बाद शांत हुआ प्रदर्शन</a></h3><h2>सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर</h2><p>इसके साथ ही आप सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर देख सकते हैं। सानामाही मेतेई वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी है। इसको मेतेई लोग बेहद शुभ और पवित्र स्थल मानते हैं। यहां पर आपको कई और दर्शनीय स्थल भी देखने को मिल जाएंगे, जैसे महाराज नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति, राजा बोधचंद्र की समाधि आदि। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर बनवाया गया है, जोकि इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।</p><h2>लोकताक लेक</h2><p>अगले दिन आप लोकताक लेक जा सकते हैं। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी फ्रेश वाटर लेक है और इसकी खासियत झील के ऊपर आपको तैरते भूखंड दिखेंगे, जिनको स्थानीय भाषा में 'फुम्डी' कहते है।</p><p>लोकताक झील मोइरांग के पास स्थित है, जहां INA का एक संग्रहालय है। इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना से संबंधित वस्तुएं दिखाई जाती हैं। यहां से लौटने के दौरान आप इंडियन पीस मेमोरियल देख सकते हैं। रेड हिल के पास स्थित यह स्मारक उन भारतीय शहीदों की याद में बनाया गया है। जोकि सेंकेंड वर्ल्ड वॉर में आजाद हिंद फौज के तहत जापानी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। इसी रेड हिल के पास उन्होंने ब्रिटिश सेना को हराया था। इंफाल में कई मंदिर, संग्रहालय, पार्क, झीलें, चिड़ियाघर और दर्शनीय स्थल हैं। अगर समय रहे, तो आप इन सबको भी देख सकते हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/manipur-kangpokpi-protest-over-detention-six-villagers-national-highway" target="_blank" rel="noopener">Manipur के Kangpokpi में 6 ग्रामीणों की हिरासत पर हिंसक विरोध, बाद में हुए रिहा</a></h3><h2>कुछ जरूरी बातें</h2><p>ट्रेन से इंफाल जाने के लिए गुवाहाटी या दीमापुर जाना होगा। यहां पर इंफाल के लिए बस मिल जाएगी। वहीं भारत के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा सीधे पहुंच सकते हैं।</p><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>मणिपुर में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइप परमिट लेना जरूरी है। यह सुविधा अब ऑनलाइन भी मौजूद है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से प्राप्त कर सकते हैं।</p><p>इसके अलावा यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मिल जाएगी। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की कॉपी की जरूरत है। इसका शुल्क 100 रुपए है और विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होगी।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:31:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/imphal-tourist-attractions-include-kangla-fort-ima-market-and-loktak-lake</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Bangkok से Bali तक दिखा भारतीय संस्कृति का असर, विदेशों में स्थापित हैं प्राचीन Ganesh Mandir]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/lord-ganesha-temples-located-across-foreign-countries-from-bali-to-bangkok]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इस समय देशभर में गणेश उत्सव धूम से मनाया जा रहा है। इस दौरान साधक अपने घर में गणेश जी स्थापित करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं और उनका प्रिय भोग अर्पित करते हैं।</p><p>क्या आप जानते हैं कि गणपति बप्पा की आस्था सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। बल्कि दुनिया के कई देशों में भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं और मंदिर देखने को मिलते हैं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि कुछ जगहों पर गणेश जी की पूजा स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के साथ मिलकर एक अलग रुप ले चुकी है।</p><p>दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में सदियों से भारतीय धर्म और संस्कृति का प्रभाव देखने को मिला है। आज नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जापान और श्रीलंका जैसे देशों में गणेश से संबंधित धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल देखने को मिलते हैं। &nbsp;आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि कहां-कहां पर अन्य देशों में श्री गणेश का मंदिर बना हुआ है।</p><p><strong>नेपाल</strong></p><p>- भारत के सबसे नजदीक पड़ोसी देश नेपाल भगवान गणेश जी की पूजा और मंदिरों के लिए जाना जाता है। काठमांडू घाटी में गणेश को समर्पित कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल है।</p><p>- यह पर गणेश जी शुभ शुरुआत और बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रुप में जाने जाते हैं।</p><p>- जब आप काठमांडू यात्रा में पशुपतिनाथ और आसपास के मुख्य धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय गणेश मंदिरों को भी यात्रा सूची में शामिल में कर सकते हैं।</p><p><strong>थाईलैंड</strong></p><p>- अगर आप कभी थाईलैंड जाएं, तो बैंकॉक में गणेश की विशाल प्रतिमा मौजूद है। थाईलैंड में भगवान गणेश को 'फ्रा फिकानेत' के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर कला, रचनात्मकता और सफलता से संबंधित विश्वास के कारण यहां गणेश की प्रतिमाएं विशेष रुप से लोकप्रिय हैं।</p><p>- बैंकॉक में गणेश जी प्रतिमाएं और श्राइन देखने को मिलती है। सबसे व्यस्त शहर के आधुनिक माहौल के बीच ये स्थल थाई संस्कृति और हिंदू धार्मिक प्रभाव के अनोखे मेले भी देखने को मिलते हैं।</p><p><strong>इंडोनेशिया</strong></p><p>- गौरतलब है कि बाली अपनी हिंदू संस्कृति, मंदिरों और अनोखी स्थापत्य शैली के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इंडोनेशिया में हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं।</p><p>- असल में बाली की कला में गणेश की छवि का विशेष स्थान है। कई मंदिरों में प्रवेश द्वार या परिसर में गणेश जी की मूर्तियां नजर आती हैं।</p><p>- यात्रियों के लिए बाली का खास अनुभव लेने के लिए यहां पर मंदिर, प्रकृति, स्थानीय कल और हिंदू परंपराएं एक साथ दिखाई देती हैं।</p><p><strong>जापान</strong></p><p>- जापान में भी गणेश जी को अलग सांस्कृतिक रुप में देखने को मिलेगा। यहां भगवान गणेश को कांगिटेन नाम से जाना जाता है। वहीं, जापान बौद्ध परंपराओं में गणेश से संबंधित स्वरुप का ऐतिहासिक उल्लेख देखने को मिलता है।</p><p>- वैसे जापान में गणेश जी की छवि भारत में दिखाई जाने वाली पारंपरिक रुप से कुछ अलग तरीके से प्रस्तुत हो सकती है। यही अंतर इसे इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए खास बनाता है।</p><p>- असल में जापान में भगवान गणेश से संबंधित मंदिर या स्थल ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यह एक बहुत ही खास और सीमित लोगों की पसंद है। जब वहां जाएं, तो पहले जानकारी इकट्ठा कर लें।</p><p><strong>श्रीलंका</strong></p><p>- श्रीलंका में भी हिंदू धार्मिक परंपरा देखने को मिलती है। यहां पर भगवान गणेश के कई मंदिर देखने को मिलते हैं।</p><p>- गौरतलब है कि तमिल हिंदू समुदाय की धार्मिक परंपराओं में गणेश पूजा सबसे मुख्य मानी जाती है</p><p>- श्रीलंका की यात्रा के दौरान पर्यटक इन धार्मिक स्थलों को जरुर देखने जाते हैं।<br>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 18:18:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/lord-ganesha-temples-located-across-foreign-countries-from-bali-to-bangkok</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Vietnam के Ha Giang में लगती है अनोखी Love Market, पति-पत्नी साथ आकर मिलते हैं अपने Ex से]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/khau-vai-love-market-in-vietnam-where-ex-lovers-meet-every-year]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आपने हमेशा कपड़े, गहने, डेकोर, राशन और गाड़ियों के काफी बाजार देखें होंगे। लेकिन क्या जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा बाजार भी है, जहां पर पुराने प्रेमी सालों बाद एक दूसरे से मिलते हैं। दरअसल, इस लेख में हम आपको ऐसे बाजार की बात कर रहे है, जहां प्रेमियों को मिलाया जाता है, यह मार्केट अधूरे प्यार को मिलाने के लिए दुनियाभर में फेमस है।</p><p><strong>वियतनाम की लव मार्केट</strong></p><p>आपको बताते चले कि, वियतनाम की उत्तरी पहाड़ियों के बीच &nbsp;हा जियांग प्रांत में ‘खाऊ वाई’ नामक एक गांव है, जो हर साल अनोखी लव मार्केट का होस्ट करता है। इस बाजार में कपड़े-जूते या घर का सामान नहीं, बल्कि पुराने प्रेमी एक दूसरे से मिलने आते हैं। विश्वभर में यह जगह खाऊ वाई लव मार्केट के नाम से मशहूर होती है।</p><p>इतना ही नहीं, साल 2021 में वियतनाम के संस्कृति मंत्रालय ने खाऊ वाई को ऑफिशियल तौर पर एक सांस्कृतिक विरासत के रुप में दर्जा दिया गया था।</p><p><strong>एक्स से मिलना नहीं माना जाता एक धोखा</strong></p><p>असल में इस बाजार में पति-पत्नी एक-साथ पहुंचते हैं और फिर अपने-अपने पुराने लवर्स से मुलाकात करने जाते हैं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि अपने एक्स से इस तरह मिलना लोगों के मन में धोखे जैसी जन्म बिल्कुल नहीं देता। वैसे आज के समय में यह बहुत से रिश्तों को यह भावना लोगों को अंदर ही अंदर तोड़ रही है। इसे एक अलग नजरिए देखा जाता है और माना जाता है कि जीवन में कुछ ऐसे कनेक्शन होते हैं, जिन्हें सम्मान देने की जरुरत है।</p><p><strong>कब आयोजित होती यह लव मार्केट?</strong></p><p>हर साल अप्रैल और मई के महीने में खाऊ वाई में लव मार्केट का आयोजन किया जाता है। वियतनामी कैलेंडर के अनुसार, तीसरे महीने के 27वें दिन यह बाजार लगता है। यह मौसम वहां के पहाड़ी इलाकों में वसंत के अंत और गर्मियों की शुरुआत का होता है। जब लोग अपने खेती के पारंपरिक कामों से मुक्ते होकर इस बाजार में जाने की सोचते हैं।</p><p><strong>क्या है इसके पीछे की मान्यता?</strong></p><p>वैसे यह बाजार सादियों पुराना है। 100 साल पुराने इस बाजार की शुरुआत साल 1919 से आयोजित हुई थी। वहां की लोककथाओं के अनुसार, इसकी कहानी &nbsp;नुंग समुदाय के युवक ‘बा’ और गियाई समुदाय की युवती ‘उत’ से जुड़ी हुई है।</p><p>अब क्योंकि ‘बा’ बांसुरी बजाने वाला एक साधारण सा लड़का था और 'उत' इस कबीले के सरदार की बेटी तो उनका मिलन न हो पाया। ऐसे में दोनों ने तय किया कि हर साल चंद्र कैलेंडर के तीसरे महीने के 27वें दिन वो खाऊ वाई घाटी में मिलने आया करेंगे। तभी से इस बाजार की परंपरा प्रचलित हो गई।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 18:20:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/khau-vai-love-market-in-vietnam-where-ex-lovers-meet-every-year</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nainital के Kainchi Dham के पास जरूर देखें Bhowali, नगरी गांव और श्यामखेत टी गार्डन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kainchi-dham-visitors-can-explore-beautiful-places-within-10-km-in-nainital]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>कैंची धाम को नीम करोली बाबा के आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। हर महीने यहां पर हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित कैंची धाम सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि खूबसूरती और शांति के लिए भी पसंद की जाती है। कैंची धाम नैनीताल जिले में है और यहां पहुंचना भी आसान है। अगर आप भी यहां पर जाने का प्लान कर रहे हैं और दर्शन करने के बाद आपके पास थोड़ा सा समय है, तो वापस लौटने की जगह आसपास की कुछ खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 10 किमी के अंदर की कुछ बेहद खूबसूरत जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।</p><h2>भवाली</h2><p>कैंची धाम से नीचे की ओर जाते हुए भवाली घूमना बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। यह जगह कैंची धाम से करीब 10 किमी अंदर आता है और वापसी के रास्ते में भी पड़ता है।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kodaikanal-princess-of-hill-stations-attracts-tourists-with-scenic-beauty" target="_blank" rel="noopener">Palani Hills की ऊंचाई पर बसा Kodaikanal, जानिए क्यों कहलाता है Princess of Hill Stations</a></p><h2>यहां घूमना क्यों है अच्छा</h2><p>भवाली में आपको खूबसूरत पहाड़ी बाजार घूमने का मौका मिलेगा।</p><p>यहां पर आप पहाड़ी सामान खरीदने के साथ-साथ यहां के स्थानीय व्यंजनों को खा सकते हैं।</p><p>यहां पर आगे जाने से पहले पहाड़ों का नजारा देखते हुए थोड़ा रेस्ट कर सकते हैं।</p><p>अगर अधिक घूमने का समय नहीं है, तो आप यहां रुक भी सकती हैं।</p><h2>नगरी गांव</h2><p>भवाली घूमने के बाद अगर आपके पास समय है, तो आप नगरी गांव को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। यह गांव कैंची धाम से करीब 10 किमी दूर है। भवाली से नगरी गांव की दूरी करीब 3 किमी है।</p><h2>यहां घूमना क्यों अच्छा</h2><p>नगरी गांव एक बेहद सुंदर और शांत जगह है। यह गांव प्रकृति प्रेमियों को काफी पसंद आएगी।</p><p>यहां के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और हरियाली आपका मन मोह लेगी।</p><p>यहां पर आप छोटे रास्ते पर सैर कर सकते हैं और स्थानीय लोगों का रहन-सहन देख सकते हैं।</p><h2>श्यामखेत</h2><p>श्यामखेत एक चाय का बागान है, जोकि भवाली से करीब 2 किमी दूर है। कैंची धाम से यहां तक आने के लिए आपको करीब 10 किमी की दूरी तय करनी होगी।</p><h2>यहां घूमना क्यों अच्छा</h2><p>यहां पर आपको एकदम शांत माहौल मिलेगा और दूर-दूर तक जहां आपकी नजर जाएगी, आपको सिर्फ हरा-भरा नजारा देखने को मिलेगा।</p><p>मानसून में इस जगह की खूबसूरती अधिक बढ़ जाती है, यहां चारो ओर हरियाली होती है, जिससे यह जगह और भी खूबसूरज नजर आती है।</p><p>पैदल वॉक और फोटोग्राफी के लिए यह एक परफेक्ट जगह है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 11:46:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kainchi-dham-visitors-can-explore-beautiful-places-within-10-km-in-nainital</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mountain Trekking पर जा रहे हैं तो बैग में जरूर रखें ORS और First-Aid Kit समेत ये 4 चीजें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/mountain-trekking-four-essential-items-to-carry-for-a-safe-journey]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>माउंटेन लवर्स हमेशा कहीं न कहीं पहाड़ियों की वादियों में ट्रैकिंग करना रोमांचक अनुभव को काफी पसंद करते हैं। गौरतलब है कि सितंबर-अक्तूबर के महीने में ज्यादातर लोग चोपता से तुंगनाथ या हिमाचल प्रदेश का हम्पटा पास में ट्रेकिंग की योजना बनाते हैं।</p><p>अगर आप बिना तैयारी के पहाड़ों पर ट्रेक के लिए जाते हैं, तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है। कई बार होता है कि जल्दबाजी में जरुरी सामान ले जाना भूल ही जाते हैं। अक्सर देखा गय है कि पहाड़ों पर अचानक मौसम बदलने या रास्ते में रुकने पर परेशानी होना तय हो जाता है।</p><p>आइए आपको बताते हैं उन 4 सबसे महत्वपूर्ण चीजों के बारे में, जिनके बिना ट्रैकिंग की शुरुआत कभी न करें।</p><p><strong>पर्याप्त हाइड्रेशन के लिए ओआरएस</strong></p><p>- अक्सर पहाड़ो पर चढ़ाई करते समय शरीर से तेजी से पसीना निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।</p><p>- अपने बैग में पीने के पानी के साथ ओआरएस (ORS) या ग्लूकोज के पैकेट जरुर रखें।</p><p>- यह आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का लेवल को बनाए रखता है और थकान से तुरंत राहत मिलेगी।</p><p><strong>एनर्जी स्नैक्स और ड्राई फ्रूट्स</strong></p><p>- अक्सर लंबी ट्रैकिंग के दौरान शरीर की ऊर्जा बहुत जल्दी खत्म हो जाती है।</p><p>- ऐसे में अपने साथ भुने हुए चने, ड्राई फ्रूट्स, खजूर, डार्क चॉकलेट और प्रोटीन बार रखें।</p><p>- इन सामान को आप आसानी से कैरी कर सकते हैं और जरुरत पड़ने पर आपको तुरंत ताकत देता है।</p><p><strong>फर्स्ट-एड किट और अपनी जरूरी दवाएं</strong></p><p>-पहाड़ी रास्तों पर फिसलने, चोट लगने या पेट खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</p><p>- अपने साथ बैंडेज, डेटॉल, पेनकिलर, क्रेप बैंडेज और एंटीसेप्टिक क्रीम वाली एक छोटी फर्स्ट-एड किट साथ रखें।</p><p>- यदि आपकी कोई नियमित दवा चल रही है, तो उसको पर्याप्त मात्रा में रख लें।</p><p><strong>टॉर्च या हेड लैंप</strong></p><p>-पहाड़ों पर शाम बहुत जल्दी होती है और घने जंगलों या रास्तों पर रोशनी का कोई अन्य साधन नहीं होता है।</p><p>- रात के समय सुरक्षित रास्ता देखने के लिए एक अच्छी टॉर्च या हेड लैंप साथ रखें।</p><p>- अतिरिक्त बैटरी या पावर बैंक रखना बेहद जरुरी है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/mountain-trekking-four-essential-items-to-carry-for-a-safe-journey</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Palani Hills की ऊंचाई पर बसा Kodaikanal, जानिए क्यों कहलाता है Princess of Hill Stations]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kodaikanal-princess-of-hill-stations-attracts-tourists-with-scenic-beauty]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>जब भी पहाड़ों पर घूमने की बात होती है, तो लोग सबसे पहले हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का नाम लेते हैं। लेकिन इन जगहों पर तो लगभग हर कोई घूम चुका है। वहीं साउथ इंडिया के कई खूबसूरत हिस स्टेशंस पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसा की एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन कोडाइकनाल है। जोकि तमिलनाडु में है और इसको 'प्रिंसेस ऑफ हिल स्टेशंस' यानी की पहाड़ों की राजकुमारी कहते हैं।</p><p>यहां पर दूर-दूर तक फैली हरियाली और खूबसूरती लोगों का मन मोह लेती है। यहां पर आपको कोडाई लेक से लेकर डॉल्‍फ‍िन्‍स नोज, पाइन फॉरेस्‍ट, कोकर्स वॉक और कई खूबसूरत वॉटरफाल्‍स तक एक्सप्लोर करने को मिलेंगे।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/char-dham-temple-in-vrindavan-offers-darshan-of-four-dhams-in-one-place" target="_blank" rel="noopener">Vrindavan Trip में शामिल करें छटीकरा का अनोखा Temple, एक जगह मिलेंगे चार धाम</a></p><h2>क्यों कहा जाता है 'प्रिंसेस ऑफ हिल स्टेशंस'</h2><p>तमिलनाडु के पलानी हिल्स के ऊपरी हिस्से में करीब 2,133 मीटर की ऊंचाई पर कोडाइकनाल बसा है। यहां के पहाड़, मौसम, पहाड़ों पर छाई धुंध, झील, झरने और हरी-भरी वादियां इस जगह को बेहद खूबसूरत बनाती हैं। एक जगह पर इतनी खूबसूरती होने की वजह से इसको 'प्रिंसेस ऑफ हिल स्टेशंस' कहा जाता है। कोडाइकनाल नाम का मतलब जंगलों का तोहफा होता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।</p><h2>कोडाइकनाल का इतिहास</h2><p>साल 1845 में ब्रिटिश ऑफ‍िसर्स और ईसाई मिशनरियों ने कोडाइकनाल बनाने की शुरुआत की थी। अंग्रेजों के समय में वह लोग यहां पर छुट्टियां बिताने के लिए आते थे। लेकिन यह जगह सिर्फ अंग्रेजों तक सीमित नहीं है। पुराने 'साहित्य संगम' में भी इस जगह का जिक्र मिलता है। जिससे यह जानकारी मिलती है यह जगह सदियों पुरानी है।</p><h2>कोडाइकनाल में कहां घूमें</h2><h2>कोडाई झील</h2><p>यह यहां की सबसे बड़ी खूबसूरत झील है। इसको कोडाइकनाल और कोडाई झील भी कहा जाता है। यह मैनमेड लेक है और कोडाइकनाम शहर के बीचो बीच है। इस झील के चारों ओर पलानी हिल्स का खूबसूरत नजारा देख सकती हैं।</p><h2>कोकर्स वॉक</h2><p>अगर आपको भी पहाड़ों पर पैदल वॉक करना पसंद है, तो आपको कोकर्स वॉक जरूर आना चाहिए। यह करीह 1 किमी लंबा वॉकिंग एरिया है, जो पहाड़ों के किनारे बनाया गया है। साल 1872 में इसको लेफ्टिनेंट कोकर ने बनवाया था। यहां से आसपास वैली और पहाड़ों के बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे।</p><h2>डॉल्फिन्स नोज</h2><p>यहां चट्टान का एक हिस्सा दूर से डॉल्फिन की नाम जैसा दिखता है। इस कारण इस जगह का नाम डॉल्फिन्स नोज पड़ गया। यहां पहुंचने के लिए करीब 3 किमी की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रास्ते में आपको चट्टानों और पाइन के पेड़ों के बीच से जाना होगा।</p><h2>ग्रीन वैली व्यू</h2><p>इसको पहले सुसाइड पॉइंट कहा जाता था। यहां से नीचे देखने पर पहाड़ों के नजारे और वैली दिखेगी, जोकि काफी खूबसूरत दिखते हैं। यहां से आप वैगई डैम का नजारा भी देख सकती हैं।</p><h2>बेयर शोला फॉल्स</h2><p>अगर आपको भी वॉटरफॉल्स देखना पसंद है, तो आपको बेयर शोला फॉल्स आना चाहिए। यह कोडाइकनाल लेक से करीब 2 किमी दूर है। मानसून में यहां पर पानी का फ्लो काफी ज्यादा बढ़ जाता है। जिससे इस जगह की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है। बताया जाता है कि यहां पर पहले एक भालू पानी पीने के लिए आता है, इस कारण से इसका नाम बेयर शोला फॉल्स पड़ गया।</p><h2>पाइन फॉरेस्ट</h2><p>लंबे-लंबे पाइन के पेड़ों के बीच घूमने का एक्सपीरियंस काफी मजेदार हो सकता है। यह जगह फोटो क्‍ल‍िक करवाने और नेचर के बीच समय बिताने के लिए बेस्ट है। यहां पर कई साउथ इंडियन फिल्मों की शूटिंग भी हुई है।</p><h2>गूना केव्स</h2><p>इसको डेविल्स किचन भी कहा जाता है। यहां पर तीन बड़ी चट्टानों के बीच कई गुफाएं हैं। जगह की चट्टानी बनावट और पेड़ों से बाहर निकली जड़ें यहां की खासियत हैं।</p><h2>बेरिजम झील</h2><p>अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी शांत जगह पर सुकून के पल बिताना चाहती हैं, तो आपको बेरिजम लेक जाना चाहिए। यह जंगल वाले इलाके में है और आपको यहां जाने के लिए जंगलों के बीच से होकर जाना होगा। इसके लिए आपको जिला वन कार्यालय से परमिट लेना हो सकता है।</p><h2>कोडाइकनाल में क्या करें</h2><p>आप कोडाइकनाल घूमने के दौरान यहां पर कुछ एक्टिविटी भी कर सकती हैं।</p><p>आप यहां पर बेयर शोला फॉल्स, डॉल्फिन्स नोज, पिलर रॉक्स और डेविल्स किचन जैसे रास्तों पर ट्रेकिंग कर सकती हैं।</p><p>वहीं कुछ जगहों पर प्लांटेशन और जंगल वाले इलाकों में आप नाइट सफारी का लुत्फ भी उठा सकती हैं।</p><p>पाइन फॉरेस्ट में वॉक कर पेड़ों के बीच टाइम स्पेंड कर सकती हैं।</p><p>वहीं आसमान और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों के लिए सोलर ऑब्जर्वेटरी एक खास जगह है। यह जगह कोडाई लेक से करीब 4.9 किमी दूर है।</p><h2>ऐसे पहुंचे दिल्ली से कोडाइकनाल</h2><p>अगर आप फ्लाइट से यहां जाना चाहती हैं तो सबसे नजदीकी नियमित फ्लाइट कनेक्टिविटी वाला एयरपोर्ट मदुरै है। यह कोडाइकनाल से करीब 120-134 किमी दूर है। इसके अलावा त्रिची एयरपोर्ट भी है, जो करीब 150 किमी है। यहां आप बस या कैब से आगे जा सकती हैं।</p><p>वहीं ट्रेन से जाने पर पलानी रेलवे स्टेशन सही रहेगा, यह कोडाइकनाल से करीब 64 किमी दूर है। यहां से कोडाइकनाम जाने के लिए आपको कई ऑप्शन मिल जाएंगे।</p><p>सड़क मार्ग से जाने के लिए आपको कोयंबटूर, पलानी, मदुरै, डिंडीगुल, ऊटी जैसी जगहों से बस कनेक्टिविटी मिलती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 15:58:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kodaikanal-princess-of-hill-stations-attracts-tourists-with-scenic-beauty</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Ganeshotsav में Maharashtra जाएं... तो जरूर करें 8 Ashtavinayak मंदिरों के दर्शन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/eight-ashtavinayak-temples-in-maharashtra-to-visit-during-ganeshotsav]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हर साल महाराष्ट्र में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवधि में पूरा राज्य गणपति बप्पा की भक्ति में डूब जाता है। यदि आप भी इस साल गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र जाने की सोच रहे हैं, तो यहां के बड़े-बड़े पंडालों को देखने के अलावा अष्टविनायक के दर्शन जरुर करें।</p><p>दरअसल, अष्टविनायक का मतलब है कि भगवान श्री गणेश के आठ स्वयंभू रुप। आपको बता दें कि, ये सभी दिव्य मंदिर महाराष्ट्र के पुणे,रायगढ़ और अहमदनगर जिलो में स्थित हैं।</p><p><strong>अष्टविनायक के 8 स्वयंभू गणेश मंदिर</strong></p><p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश के इन आठों पीठों की यात्रा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और बप्पा मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। अगर आप महाराष्ट्र जा रहे हैं, तो इन 8 मंदिरों के दर्शन &nbsp;जरुर करें।</p><p><strong>मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव)</strong></p><p>अगर आप अष्टविनायक दर्शन करना चाहते हैं, तो सबसे पहले पुणे जिले के मोरगांव में स्थित मयूरेश्वर मंदिर में जा सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर गणेश ने मयूर यानी मोर पर सवार होकर अवतार लिया था, तभी से मयूरेश्वर के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध है।</p><p><strong>सिद्धविनायक मंदिर (सिद्धटेक)</strong></p><p>इसके बाद आप अहमदनगर जिले में भीमा नदी के तट पर स्थित सिद्धटेक के सिद्धिविनायक मंदिर के दर्शन के लिए भी आप जा सकते हैं। यह अष्टविनायक मंदिरों में से एक ऐसा होता है, जहां बप्पा की सूंड दाईं तरफ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान विष्णु ने सिद्धि प्राप्त की थी।</p><p><strong>बल्लेलेश्वर मंदिर (पाली)</strong></p><p>यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है और यह रायगढ़ जिले के पाली में स्थित है। इसको 'बल्लालेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह एकमात्र ऐसा धाम है, जहां नाम गणेश जी के परम भक्त 'बल्लाल' के नाम पर रखा है।</p><p><strong>वरदविनायक मंदिर (महड)</strong></p><p>वरदविनायक मंदिर रायगढ़ के महड में स्थित है। हर साल गणेशोत्सव के समय यहां पर लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।</p><p><strong>चिंतामणि मंदिर (थेऊर)</strong></p><p>अष्टवियानक मंदिरों में से एक है यह मंदिर, इसे लोग चिंतामणि मंदिर के नाम से जानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान गणेश ने ऋषि कपिला की खोई हुई चिंतामणि वापस लौटाई थी। जो भक्तजन इस मंदिर का दर्शन करते हैं, उसे मानसिक तनाव और चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है।</p><p><strong>गिरिजात्मज मंदिर (लेन्याद्री)</strong></p><p>यह मंदिर पुणे के लेन्याद्री में स्थित है, जो कि भगवान गणेश को समर्पित है। असल में यह मंदिर में एक बौद्ध गुफा के अंदर बना हुआ है। यहां पर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं का करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।</p><p><strong>विघ्नेश्वर मंदिर (ओझर)</strong></p><p>ओझर में स्थित 'विघ्नेश्वर मंदिर' भी अष्टविनायक धामों में शामिल है। इस समय यहां पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर विघ्रासुर नामक दैत्य का संहार करने वाले स्वरुप के लिए जाना जाता है।</p><p><strong>महागणपति मंदिर (रांजणगांव)</strong></p><p>अष्टविनायक मंदिरों में से एक है रांजणगाव का 'महागणपति मंदिर', यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने से पहले गणेश जी की पूजा-अर्चना की थी।</p><p><strong>अष्टविनायको मंदिरों तक कैसे पहुंचें?</strong></p><p>- यदि आप फ्लाइट से आना चाहती हैं, तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट के बाहर आपको किराए की कार या टैक्सी मिल जाएगी, यहां से आप अपनी अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।</p><p>- ट्रेन से आने पर पुणे जंक्शन और शिवाजीनगर रेलवे स्टेशन सबसे पास है। यहां से भी आप मोरगांव, थेऊर, ओझर और लेन्याद्री के लिए सीधी बसें या टैक्सियां ले सकती हैं।</p><p>- वैसे गणेशोत्सव के समय कई प्राइवेट और सरकारी ट्रेवल्स एजेंसियां विशेष अष्टविनायक दर्शन बसें चलाती हैं। वहीं आप मुबंई या पुणे से 2 से 3 दिनों को रोड टूर पैकेज बुक करके इन आठों मंदिर का दर्शन कर सकती हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 12:15:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/eight-ashtavinayak-temples-in-maharashtra-to-visit-during-ganeshotsav</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Delhi के Mayur Vihar में सजा गणपति पंडाल, नोट करें दर्शन और आरती का पूरा शेड्यूल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/darshan-and-aarti-schedule-for-mayur-vihar-ganesh-pandal-in-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>गणेश चतुर्थी पर्व का शुभारंभ हो चुका है। हर साल भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर मुंबई से लेकर पूरे देशभर में गणेश जी के पर्व की धूम देखने को मिलती है। दिल्ली में भी जगह-जगह गणेशोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। अलग-अलग जगहों पर बप्पा के विशाल पंडाल देखने को मिल रहे हैं।</p><p>यदि आप मुबंई के मशहूर लालबागचाराजा के जैसे ही गणपति बप्पा को आप मयूर बिहार में देख सकते हैं। आइए आपको पंडाल की लोकेशन, दर्शन का समय और इसकी खासियत के बारे में बताते हैं।</p><p><strong>मयूर विहार राजा के दर्शन का समय</strong></p><p>श्री गणेश जी के पट सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक खुले रहेंगे। फिर पट बंद हो जाते हैं, फिर शाम 4 बजे से लेकर रात 12 बजे तक पट खुले रहते हैं। अगर आप दर्शन के लिए जाना चाहती हैं, तो समय का विशेष ध्यान रखें-</p><p>दर्शन का समय- सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक<br>दर्शन बंद होने का समय- दोपहरा 12:30 से शाम 4:00 बजे तक<br>दर्शन का समय- शाम 4:00 बजे से लेकर रात 12:00 बजे</p><p><strong>मयूर विहार के राजा की आरती का समय</strong></p><p>इस पंडाल में महा आरती का विशेष आकर्षण है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यदि आप भी भगवान गणेश की आरती में शामिल होना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए समय पर पहुंच जाएं।</p><p><strong>आरती का समय-</strong> सुबह 7 बजे और शाम को 8:30 बजे</p><p><strong>किस थीम पर सजाया है मयूर विहार राजा का पंडाल?</strong></p><p>गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष पंडालों को अलग-अलग थीम पर सजाया जाता है। इस बार मयूर विहार के राज का पंडाल छत्रपति शिवाजी के थीम पर सजाया गया है। बता दें कि, यह पंडाल प्रताप नगर, मयूर विहार (अग्रवाल स्वीट्स कॉर्नर और प्राचीन शिव मंदिर के पास) में सजाया गया है।</p><p><strong>मयूर विहार के गणेश पंडाल कैसे पहुंचें?</strong></p><p><strong>मेट्रो से जाएं-</strong> इसके लिए आपको मयूर विहार फेज-1 मेट्रो स्टेशन सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन है, जो ब्लू लाइन और पिंक लाइन दोनों से जुड़ा हुआ है। स्टेशन से यह पंडाल/मंदिर पैदल या ई-रिक्शा से कुछ ही मिनटों की दूरी पर पॉकेट-4 में स्थित है।</p><p>वहीं, नोएडा लिंक रोड या खिदिराम बोस मार्ग से आसानी से मयूर विहार फेज-1 पॉकेट-4 पहुंचा जा सकता है। यहां आने के लिए आप कैब ऑटो या अपने निजी वाहन का प्रयोग भी कर सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:14:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/darshan-and-aarti-schedule-for-mayur-vihar-ganesh-pandal-in-delhi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vrindavan Trip में शामिल करें छटीकरा का अनोखा Temple, एक जगह मिलेंगे चार धाम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/char-dham-temple-in-vrindavan-offers-darshan-of-four-dhams-in-one-place]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>घुमक्कड़ लोग कहीं न कहीं घूमने का प्लान बनाते रहते हैं। वैसे आजकल धार्मिक जगहों पर दर्शन के लिए लोग काफी प्लान बनाते हैं। जब वृंदावन का नाम सामने आता है, तो सबके मन में राधा-कृष्णा के मंदिर का ध्यान आता है। गौरतलब है कि मथुरा-वृंदावन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। हालांकि, वृंदावन के छीटकरा इलाके में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां आपको एक ही जगह पर अलग-अलग देवी-देवताओं के दर्शन करने को मिलेंगे। इसे चार धाम मंदिर के नाम से जाना जाता है।</p><p>यहां पर शनि धाम, राधा-कृष्ण धाम, शिव धाम और वैष्णो माता धाम देखने को मिलेंगे। यह मंदिर बड़ा होने के साथ-साथ काफी बड़ा भी है। यदि आप वृंदावन जाने का प्लान कर रहे हैं, तो इस जगह को अपनी ट्रिप में शामिल कर सकती हैं।</p><p><strong>एक ही जगह मिलेंगे चार धामों के दर्शन</strong></p><p>इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि आपको यहां चार अलग-अलग धामों के दर्शन एक साथ ही करने को मिलेंगे।</p><p><strong>शनि धाम</strong></p><p>आपको बताते चलें कि, चार धाम मंदिर के शनि धाम में शनिदेव की प्रतिमा स्थापित की गई है। शनिवार को यहां बड़ी संख्या में भक्तजन आते हैं और तेल चढ़ाकर पूजा करते हैं। परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में स्थिरता की कामना लेकर भी यहां आते रहते हैं।</p><p><strong>राधा-कृष्ण धाम</strong></p><p>राधा-कृष्ण धाम भी इस मंदिर का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। यहां पर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर प्रतिमाएं हैं। यह हम सभी जानते हैं कि वृंदावन का संबंध श्रीकृष्ण की लीलाओं से है, इसलिए यहां बने राधा-कृष्ण धाम को देखने को मिलेंगे।</p><p><strong>शिव धाम</strong></p><p>यहां पर शिवलिंग और भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा खूब बड़ी बनाई गई है। भगवान शिव के मूर्ति की ऊंचाई लगभग 175 फीट है। जो लोग वृंदावन आते हैं, वो यहां आकर दर्शन एक बार जरुर करता है। वहीं, फोटो भी लोग क्लिक करते हैं।</p><p><strong>वैष्णो माता धाम</strong></p><p>इन चार धाम में माता वैष्णो का धाम भी आता है। यहां मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरुपों के दर्शन किए जाते हैं। नवरात्रि के समय यहां खास आयोजन होता है। सबसे खास बात यहां कि यह है कि आपको भगवान शिव के साथ माता की भी 141 फीट ऊंची मूर्ति देखने को मिलेगी।</p><p><strong>चार धाम मंदिर जाने का सही समय और जरूरी जानकारी</strong></p><p>चार धाम मंदिर जाने से पहले इन बातों को नोट कर लें-</p><p><strong>स्थान:</strong> छटीकरा, वृंदावन<br><strong>दर्शन का समय:</strong> सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक<br><strong>शाम का समय:</strong> शाम 4 बजे से रात 8:30 बजे तक<br><strong>एंट्री फीस: </strong>कोई शुल्क नहीं<br><strong>पार्किंग: </strong>उपलब्ध</p><p><strong>मेन अट्रैक्शन:</strong> शनि धाम, शिव धाम, राधा-कृष्ण धाम और वैष्णो माता धाम</p><p><strong>चारधाम से नजदीक अन्य जगहें</strong></p><p>चार धाम मंदिर के दर्शन करने के बाद आप वृंदावन और आसपास की दूसरी धार्मिक जगहों पर भी जा सकते हैं। आपके ट्रिप प्लान में प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर और निधिवन जैसी जगहों को शामिल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आप बरसाना और गोवर्धन भी जा सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:02:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/char-dham-temple-in-vrindavan-offers-darshan-of-four-dhams-in-one-place</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Travel Tips: Karnataka के Hampi में घूमें ऐतिहासिक मंदिर और Stone Chariot, ऐसे बनाएं टूर प्लान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/hampi-tourism-guide-details-historical-monuments-temples-and-travel-routes]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अगर आप भी किसी ऐतिहासिक जगह पर घूमना चाहती हैं, जहां पर आप पुराने खंडहर, मंदिर, इतिहास और खूबसूरत पहाड़ देखना चाहती हैं। तो आपको कर्नाटक के हम्पी जाना चाहिए। कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा हम्पी कभी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। आज भी आपको यहां पर बाजार, राजमहल, पुराने मंदिर और पत्थरों से बनी कई शानदार इमारतों के अवशेष दिखेंगे।</p><p>हम्पी की खासियत यह है कि यहां पर सिर्फ इतिहास नहीं बल्कि बड़े-बड़े ग्रेनाइट पत्थरों से बने बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे। देश-विदेश से लोग यहां घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में ज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यहां जाने से लेकर घूमने तक की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/common-mistakes-to-avoid-while-travelling-abroad-for-the-first-time" target="_blank" rel="noopener">Foreign Travel Mistakes: पहली विदेश यात्रा को आसान बनाने के लिए इन जरुरी नियमों को पहले ही जान लें</a></h3><h2>हम्पी की खास‍ियत</h2><p>हम्पी को देखकर ऐसा महसूस होगा, जैसे आप किसी पुराने शहर के बीच आ चुकी हैं। कभी हम्पी विजयनगर साम्राज्य की बड़ी और अमीर राजधानी थी। 14वीं से 16वीं सदी के दौरान यहां पर अच्छी खासी रौनक देखने को मिलती थी। यहां पर आज भी पुराने बाजार, मंदिर, राजघराने से जुड़ी इमारतें और दूसरी ऐतिहासिक जगहों के अवशेष देखने को मिलेंगे।</p><h2>हम्पी में जरूर देखें ये जगहें</h2><h2>विरुपाक्ष मंदिर</h2><p>यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह यहां के खास मंदिरों में से एक है और आज भी यहां पर पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर का ऊंचा गोपुरम आपको दूर से ही नजर आएगा। यह मंदिर हम्पी बाजार के पास है।</p><h2>विजय विट्ठल मंदिर और स्टोन चैरियट</h2><p>इस मंदिर की गिनती हम्पी के सबसे शानदार ऐतिहासिक जगहों में की जाती है। मंदिर में खूबसूरत नक्काशी वाले कई खंबे देखने को मिलेंगे। इस जगह की सबसे बड़ी खूबसूरती स्टोन चैरियट यानी पत्थर का रथ है। इसको ग्रेनाइट से बनाया गया है, जोकि भगवान विष्णु के वाहन गरुण को समर्पित है। फिर इसके आगे आपको हाथियों की मूर्तियां भी बनी हैं। यह भारत के 50 रुपए के नोट पर भी दिखता है।</p><h2>लोटस महल</h2><p>आप यहां आने के दौरान लोटस महल जा सकते हैं। यह महल रॉयल सेंटर में हैं और इसका डिजाइन खिले हुए कमल की तरह है। इस कारण इसको लोटस महल कहा जाता है। इसकी बालकनी, मेहराब और पूरी डिजाइन ही इसको अन्य इमारतों से एकदम अलग बनाता है।</p><h2>हाथी अस्तबल</h2><p>आप हाथी अस्तबल भी जा सकते हैं। विजयनगर साम्राज्य के दौरान हाथियों को रखने के लिए इस जगह का इस्तेमाल होता था। इसमें लंबी इमारत में 11 बड़े गुंबददार कमरे बने हैं।</p><h2>क्वीन बाथ</h2><p>यह उस दौरान शाही परिवार के लिए एक पर्सनल क्वीन बाथ बनाया गया था। भले ही यह इमारत बाहर से सिंपल लगे, लेकिन अंदर जाने पर बड़ा सा चौकोर पूल, मेहराब और बालकनी देखने को मिलेगी।</p><h2>मातंगा हिल</h2><p>अगर आपको पूरा हम्पी देखना है, तो मातंगा हिल जाने का प्लान कर सकती हैं। यह हम्पी की सबसे ऊंची जगह है। यहां पर आपको तुंगभद्रा नदी, चट्टानों और खंडहर का बेहद शानदार नजारा दिखता है। यहां पर आपको सनराइज या सनसेट के समय पर जाना चाहिए।</p><h2>उग्र नरसिंह प्रतिमा</h2><p>हम्पी में एक ही ग्रेनाइट पत्थर से उग्र नरसिंह की बड़ी सी प्रतिमा बनाई गई है, जिसकी ऊंचाई करीब 6.7 मीटर है। इस प्रतिमा की खासियत यह है कि यह हम्पी की सबसे बड़े एक पत्थर से बनी मूर्ती में से एक है।</p><h2>हेमकूट हिल</h2><p>आप यहां पर हेमकूट हिल भी जा सकती है। यहां पर आपको कई छोटे मंदिर मिलेंगे। यहां से हम्पी के खंडहर और आसपास का इलाका देख सकते हैं। सुबह और शाम के समय यहां जाना बेस्ट है।</p><h2>हम्पी बाजार</h2><p>व‍िजयनगर साम्राज्‍य के समय हम्पी बाजार एक बड़ा व्यापारिक इलाका था। यहां की बाजार वाली सड़क पर आपको आज भी पत्थर के पुराने मंडप देखने को मिलेंगी। उस दौरान हम्पी बाजार में हीरे, मोती, घोड़ों औऱ मसाले आदि का व्यापार होता है।</p><h2>चट्टानों वाला इलाका</h2><p>हम्पी में आपको सिर्फ पुराने मंदिर ही नहीं बल्कि जगह-जगह पर बड़े-बड़े ग्रेनाइट के पत्थर दिखेंगे।</p><h2>हम्पी में क्या-क्या करें</h2><p>आप यहां पर तुंगभद्रा नदी में कोरकल राइड का मजा ले सकते हैं।</p><p>आप साइकिल लेकर यहां की अलग-अलग ऐतिहासिक जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।</p><p>चट्टानों के कारण यहां पर आप बोल्डरिंग और रॉक क्लाइंबिंग भी की जाती है।</p><p>आप मातंगा हिल से सनराइज या फिर सनसेट का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं।</p><p>तुंगभद्रा नदी के दूसरी ओर विरुपापुर गड्डे हैं, इसको हिप्पी आइलैंड भी कहा जाता है।</p><h2>ऐसे पहुंचे हम्पी</h2><p>अगर आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो हम्पी के लिए सबसे नजदीक जिंदल विजयनगर एयरपोर्ट है, जोकि करीब 40 किमी दूर है। वहीं बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अच्छा ऑप्शन हो सकता है।</p><p>अगर आप ट्रेन से जाना चाहती हैं, तो हम्पी के पास रेलवे स्टेशन होसपेट जंक्शन नजदीक है। यह करीब 13 किमी दूर है। यहां से आगे जाने के लिए टैक्सी, बस और दूसरी सवारी से हम्पी पहुंच सकते हैं।</p><p>वहीं सड़क से हम्पी की दूरी करीब 340 किमी है। आपको बस या कार से पहुंचने में करीब 6-7 घंटे का समय लग सकता है। अगर आप बेंगलुरु या आसपास से हम्पी जा रही हैं, रोड ट्रिप भी अच्छा रहेगा।</p><h2>आसपास घूमने की जगहें</h2><p>हम्पी से तुंगभद्रा डैम करीब 15 किमी दूर है।</p><p>तुंगभद्रा नदी के दूसरी ओर अनेगुंडी एक ऐतिहासिक गांव है। जोकि हम्पी से भी पुराना है और इस गांव का संबंध रामायण की कथाओं से है।</p><p>हम्‍पी से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर दारोजी स्लॉथ बियर सेंचुरी स्थित है, ऐसे में आप यहां भी जा सकती है।</p><p>सनापुर लेक का नजारा देखने के अलावा आप कोरकल राइड और सनराइज भी देख सकती हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 14:10:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/hampi-tourism-guide-details-historical-monuments-temples-and-travel-routes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Foreign Travel Mistakes: पहली विदेश यात्रा को आसान बनाने के लिए इन जरुरी नियमों को पहले ही जान लें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/common-mistakes-to-avoid-while-travelling-abroad-for-the-first-time]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>हर किसी का सपना होता है कि एक दिन विदेश घूमने जा रहे हैं। नई संस्कृति, अलग खानपान और खूबसूरत जगहों को देखने का उत्साह अलग ही होता है। कई बार लोग पहली बार फॉरेन ट्रिप पर जाते समय कई सारी गलतियां कर देते हैं।</p><p>इन्हीं गलतियों के कारण विदेशी यात्रा का मजा थोड़ा खराब हो जाता है। आइए आपको बताते हैं आप इन गलतियों से कैसे बचाव करें।</p><p><strong>जरूर डॉक्यूमेंट्स साथ रखें</strong></p><p>अगर आप पहली बार विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, तो पासपोर्ट, वीजा, ट्रैवल इंश्योरेंस और इंपोर्टेंट डॉक्यूमेंट्स की पूरी जांच करनी चाहिए। अक्सर लोग सिर्फ पासपोर्ट लेकर ही यात्रा पर निकल जाते हैं, बल्कि कुछ देशों में एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट भी जरुरी होते हैं। विदेश यात्रा से पहले पासपोर्ट की वैधता, वीजा के नियम और दूसरों जरुरी दस्तावेजों की जांच कर लें। इसके साथ ही उनकी डिजिटल और प्रिंट कॉपी भी अपने पास रख लें।</p><p><strong>बजट की सही प्लानिंग &nbsp;</strong></p><p>गौरतलब है कि विदेश में खर्च अक्सर उम्मीद से ज्यादा होता है। कई बार लोग होटल, लोकल ट्रांसपोर्ट, फूड और शॉपिंग के खर्च का सही अनुमान नहीं लगाते हैं। डेस्टिनेशन पर जाने से पहले खर्चों के बारे में रिसर्च कर लें। इसके लिए एक अनुमानित बजट बनाकर चलें और एक्स्ट्रा खर्च के लिए पैसे अलग रख लें।</p><p><strong>लोकल कल्चर की जानकारी न होना</strong></p><p>हर एक देश की अपनी संस्कृति, नियम और सामाजिक व्यवहार का तरीका होता है। पर्यटक अक्सर अनजाने में गलती कर देते है कि जो वहां असभ्य मानी जाती है। इसलिए किसी भी देश में जाने से पहले वहां की संस्कृति, पहनावे, पब्लिक बिहेवियर और स्थानीय नियमों के बारे में जान लें।</p><p><strong>जरूरत से ज्यादा सामान पैक करना</strong></p><p>जब पहली बार विदेश के लिए जाते हैं, तो जरुरत से ज्यादा कपड़े और सामान पैक कर लिए जाते हैं। इससे आपका बैग भारी हो जाता है और एयरलाइन के बैगेज नियमों की वजह से एक्स्ट्रा फीस देनी पड़ती है। खासतौर पर मौसम और ट्रिप के अनुसार ही जरुरी सामान ही पैक करें। लाइटवेट और स्मार्ट तरीके से पैकिंग करें, जिससे यात्रा आरामदायक बन जाएगी।</p><p><strong>लोकल ट्रांसपोर्ट की जानकारी न होना</strong></p><p>अक्सर लोग यही सोचते हैं कि विदेश जाकर वहां का सब समझ आ जाएगा। लेकिन लोकल ट्रांसपोर्ट, मैप्स और इंटरनेट कनेक्टिविटी की जानकारी न होने से परेशानी हो सकती है। इसलिए पहले से लोकल ट्रांसपोर्ट, मेट्रो कार्ड, ट्रैक्सी ऐप्स और इंटरनेट सिम या इंटरनेशनल रोमिंग के बारे में जानकारी अपने पास रखें।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:56:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/common-mistakes-to-avoid-while-travelling-abroad-for-the-first-time</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi special: Puducherry के Manakula Vinayagar Temple की महिमा और इतिहास]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/manakula-vinayagar-temple-puducherry-guide]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>घूमने के लिहाज से पुडुचेरी बेहद ही खूबसूरत है। यहां पर सुंदर बीचेज के अलावा आध्यात्मिक मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। पुडुचेरी के केंद्र में स्थित अरुलमिगु मनकुला विनयगर मंदिर दक्षिण भारत के प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक हैं। भगवान गणेश को समर्पित यह मंदिर अपनी एतिहासिक कला, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विश्वभर में लोकप्रिय है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अगर आप भी भागदौड़ की जिंदगी से दूर और सुकून चाहते हैं, तो इस मंदिर के दर्शन जरुर करें। यहां पर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने के लिए विशेष स्थान माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में विराजमान भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से सभी विघ्नों को दूर करते हैं और उनकी मनोकामनाएं को पूर्ण करते हैं। आइए आपको इस मंदिर के बारे में पूरी जानकारी बताते हैं और कैसे यहां पहुंचें।</span></div><div><br></div><div><b>मनकुला विनयगर मंदिर का दिलचस्प इतिहास</b></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>फ्रांसीसी शासन और चमत्कार- </b>असल में वर्ष 1688 में जब पुडुचेरी पर फ्रांसीसी शासन था, तब उन्होंने मंदिर के ठीक बगल में एक किले का निर्माण कराया था। किला का वर्चस्व बढ़ाने के लिए फ्रांसीसियों ने गणेश प्रतिमा को समुद्र में फेंकने का प्रयास किया, लेकिन हर बार प्रतिमा चमत्कारिक रुप से अपने मूल स्थान पर वापस प्रकट हो जाती थी। इस अलौकिक घटना के बाद से फ्रांसीसियों ने अपना फैसला वापस ले लिया और वे भी भगवान के प्रति श्रद्धा रखने लगे।</span></div><div><br></div><div><b>संत की समाधि का स्थल-</b> एक और प्राचीन मान्यता के अनुसार, करीब 300 साल पहले एक महान संत ने इसी मंदिर परिसर में अपनी सिद्धियों के माध्यम से समाधि ली थी। इसी कारण से स्थानीय लोग इस स्थान को नवजात शिशुओं के कल्याण के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं।</div><div><br></div><div><b>मंदिर के मुख्य आकर्षण&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- भक्तों के दान से निर्मित इस मंदिर में एक अति सुंदर स्वर्ण रथ है, जो सागौन की लकड़ी पर सोने की प्लेटों से सजा हुआ है। इसको बनाने में करीब 7.5 किलोग्राम सोना का इस्तेमाल किया गया है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इस मंदिर में दीवारों पर आकर्षक नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। भगवान गणेश के अलावा यहां श्री कृष्ण, भगवान शिव, माता पार्वती और मुरुगन की प्रतिमाएं स्थापित हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इस मंदिर की एक और खासियत है कि 'लक्ष्मी' नाम की हथिनी है, जो रोजाना शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालुओं को अपनी सूंड से आशीर्वाद देती हैं।</div><div><br></div><div>इसके अलावा, मंदिर में प्रवेश करते समय पारंपरिक या शालीन वस्त्र ही पहनें, जिससे शरीर पूरी तरह ढका हुआ रहे।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पुडुचेरी के मनकुला विनयगर मंदिर कैसे पहुंचे?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>हवाई मार्ग-</b> पुडुचेरी हवाई अड्डा हैदराबाद और बैंगलोर से सीधा जुड़ा हुआ है। वहीं अन्य शहरों जैसे कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान ली जा सकती हैं, जहां से टैक्सियों के माध्याम से मंदिर पहुंचा जा सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;- रेल मार्ग द्वारा- </b>पुडुचेरी रेलवे स्टेशन शहर का मुख्य का स्टेशन हैं। बता दें कि, स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 1.7 किलोमीटर है, जहां से स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाएंगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:59:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/manakula-vinayagar-temple-puducherry-guide</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Travel Tips: मुन्नार से लेकर Coorg तक, बारिश में स्वर्ग जैसी दिखती हैं ये जगहें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/from-munnar-to-coorg-these-places-look-like-paradise-in-the-rain]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मानसून आते ही घूमने का मजा दोगुना हो जाता है। क्योंकि इस दौरान चारों ओर हरियाली, रिमझिम ठंडी फुहारें, बादलों से ढके पहाड़ और ठंडी-ठंडी हवाएं लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मानसून घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया की कुछ खास जगहों को अपने ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। बारिश के मौसम में प्रकृति की खूबसूरत इस कदर बढ़ जाती हैं, जिसको देखकर ऐसा लगता है, मानों स्वर्ग धरती पर ही उतर आया है।</div><div><br></div><div>साउथ इंड‍िया अपने खूबसूरत हिल स्टेशनों, झरनों, घने जंगलों और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। वहीं यहां की वादियां भी बारिश में खूब हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई-कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं, मानों आप बादलों के बीच खड़े हों। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया के कुछ खूबसूरत हिस स्टेशनों के बारे में...</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/3-best-south-india-hill-stations-for-monsoon" target="_blank">Vagamon से लेकर Araku Valley तक, Monsoon Season में दक्षिण भारत की ये 3 वादियां हैं परफेक्ट Destination</a></h3><div><br></div><h2>मुन्नार, केरल</h2><div>बारिश के मौसम में केरल के मुन्नार को कैसे भुलाया जा सकता है। मुन्नार के चाय के बागान, ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ आपका दिन बना देंगे। मानसून में यहां की हरियाली और भी निखर जाती हैं। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं और आपको भी फोटोग्राफी का शौक है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है।</div><div><br></div><h2>कूर्ग, कर्नाटक</h2><div>प्राकृतिक सुंदरता के मामले में कर्नाटक का कुर्ग किसी से कम नहीं है। इसको भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। बारिश के मौसम में यहां पर पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। वहीं कुर्ग खूबसूरत होने के साथ-साथ शांत है, ऐसे में आप यहां पर प्रकृति के बीच सुकून के पल बिता सकती हैं।</div><div><br></div><h2>चिकमगलूर, कर्नाटक</h2><div>बता दें कि पिछले कुछ सालों में कर्नाटक का चिकमगलूर घुमक्कड़ों की पसंदीदा जगह बन चुका है। मानसून में यहां पर हरी भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने लायक होते हैं। वहीं अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के दो पल बिताना चाहते हैं, तो आपको चिकमगलूर जरूर जाना चाहिए।</div><div><br></div><h2>कोडाइकनाल, तमिलनाडु</h2><div>यह तमिलनाडु का एक फेमस हिल स्टेशन है, जोकि मानसून में बेहद सुंदर लगता है। कोडाइकनाल की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बेहद शानदार लगते हैं। यहां पर पर्यटकों की भारी भीड़ मिलती है। जिनको प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है, उसके लिए यह जगह परफेक्ट है।</div><div><br></div><h2>वायनाड, केरल</h2><div>केरल की खूबसूरती के बारे में तो आपने सुन ही रखा होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। केरल का वायनाड मानसून में बेहद खूबसरत लगता है। यहां के लेक, घने जंगल, गुफाएं और खूबसूरत झरने देखने लायक होते हैं। आप यहां पर नेचर वॉक और ट्रेकिंग आदि भी कर सकती हैं।</div><div><br></div><h2>ऊटी, तमिलनाडु</h2><div>सिर्फ कोडाइकनाल ही नहीं बल्कि ऊटी भी एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। मानसून में यहां के बगीचे, चाय के बागान और पहाड़ आदि की रौनक देखने लौयक होती है। वहीं अगर आप भी ऊटी घूमने का प्लान कर रही हैं, तो पायकारा फाल्स जाना न भूलें।</div><div><br></div><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><div>मानसून में घूमने जाने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें और उसी के हिसाब से ट्रिप प्लान करें।</div><div><br></div><div>छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज अपने साथ रखना न भूलें।</div><div><br></div><div>लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:06:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/from-munnar-to-coorg-these-places-look-like-paradise-in-the-rain</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vagamon से लेकर Araku Valley तक, Monsoon Season में दक्षिण भारत की ये 3 वादियां हैं परफेक्ट Destination]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/3-best-south-india-hill-stations-for-monsoon]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मानसून के समय घूमने का एक अलग ही आनंद होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून भरा मौसम होता है। वहीं, इस मौसम में बारिश की हल्की-हल्की बूंदें और हरी-भरी सुंदर पहाड़ियां आपका मन मोह लेंगी। अगर आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">आमतौर पर इस मौसम के दौरान लोग उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में जाना पसंद करते हैं, लेकिन भूस्खलन और भारी भीड़ के कारण कई बार उनका जाना कैंसिल हो जाता है। यदि आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है, तो आप दक्षिण भारत की इन जगहों पर घूमने का प्लान बना सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>वागामोन हिल स्टेशन, केरल</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आप केरल जाने का प्लान कर रही हैं, तो आप इदुक्की जिले में स्थित वागामोन घूमने जा सकते हैं। यह एकदम खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। मानसून के दिनों में यहां बादलों की धुंध और हरी-भरी वादियां आपका दिल खुश कर देंगी। बता दें कि, यह हिल स्टेशन समुद्र तल के लगभग 1,100 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। बारिश के मौसम में यहां के झरने पूरे उफान पर रहते हैं, जिससे फोटोग्राफी भी शानदार तरीके से कर सकते हैं।</span></div><div><b style="font-size: 1rem;">कैसे पहुंचें-</b><span style="font-size: 1rem;"> यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कोच्चि है। वहीं, निकटम रेलवे स्टेशन कोट्टायम है, जहां से आप टैक्सी या KSRTC बस पकड़ के आसानी से वागामोन पहुंच सकती हैं।</span></div><div><br></div><div><b>वालपराई हिल स्टेशन, तमिलनाडु</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">बरसात का मौसम खत्म होने से पहले आप एक बार इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। अनाईमलाई की पहाड़ियों के बीच बसा वालपराई आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां की सुंदर हरी-भरी पहाड़ियां आपका मन मोह लेगी। इस जगह पर पहुंचने के लिए रास्ता भी बेहद सुंदर है, इसके लिए आपको 40 घुमावदार मोड़ों से होकर जाना होगा। यहां आसपास मौजूद चाय-कॉफी के बागान आपकी ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना देंगे।</span></div><div><br></div><div><b>कैसे पहुंचें- </b>अगर आप वालपराई जाना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले नजदीकी हवाई अड्डा कोयंबटूर है। वहीं नजदीकी रेलवे स्टेशन पोल्लाची जंक्शन और कोयंबटूर जंक्शन हैं।</div><div><br></div><div><b>अराकू वैली हिल स्टेशन, आंध्र प्रदेश</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">आंध्र प्रदेश में स्थित अराकू वैली किसी जन्नत से कम नहीं है। मानसून के लिए यह ट्रिप एकदम परफेक्ट है। यहां पर आप अपने दोस्तों या फैमिली के साथ जा सकती हैं। इस दौरान अराकू वैली में कोहरा, झरनों का बहता पानी और ऑर्गिनक कॉफी के बागान मानसून में सबसे सुंदर नजर आते हैं। शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून के लिए एक बार इस जगह पर जरुर जाएं।</span></div><div><br></div><div><b>कैसे पहुंचें-</b> अराकू वैली जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा विशाखापटनम है। सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन अराकू रेलवे स्टेशन ही है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/3-best-south-india-hill-stations-for-monsoon</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Travel Tips: मणिपुर की सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक है Kangla Fort, जानें कैसे पहुंचे Imphal]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kangla-fort-symbol-of-manipur-cultural-beauty-find-out-how-to-reach-imphal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इंफाल एयरपोर्ट पर उतरते ही खुला आसमान और हवा की ताजगी आपका मोह लेगी। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हवाई अड्डा इतना सहज है कि विमान से उतरने के बाद पैदल भवन में एंटर किया जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर बसा इंफाल शहर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा के लिए जाना जाता है। जहां एक तरफ युवा आधुनिक लिबास में नजर आते हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे पारंपरिक आउटफिट में दिखाई देती हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उन महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देता है।</div><div><br></div><h2>इमा मार्केट</h2><div>यह समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक है। शहर के बीचो-बीच इमा मार्केट स्थित है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला मार्केट। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/irctc-kashi-tirtha-yatra-package-details-and-route" target="_blank">IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर</a></h3><div><br></div><div>पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे ब्लाउज, फनेक, दुपट्टे, शॉल, चादर, गमछे और अन्य कई तरह की चीजें शामिल हैं। वहीं एक हिस्से सिर्फ पूजा का सामान है।</div><div><br></div><h2>कांगला किला की सैर</h2><div>इसके अलावा इंफाल में आपको दो जगहें और देखनी चाहिए। जिनमें पहला कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक है। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे है। मेतेई भाषा में कांगला का अर्थ होता है जमीन का मुख्य भाग। मेतेई वर्तमान मणिपुर का मूल नाम है।</div><div><br></div><div>मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। आज भी मणिपुर के निवासियों के िए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।</div><div><br></div><div>इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद थी। लेकिन हमने पैदल घूमने का फैसला किया। इसके अंदर कई संग्रहालय हैं।</div><div><br></div><h2>कांगला संग्रहालय</h2><div>यहां प्राचीन शासकों से संबंधित वस्तुएं और इसका इतिहास देख सकते हैं।</div><div><br></div><h2>बोट म्यूजियम</h2><div>यहां पर प्राचीन शासकों की नावें और उनसे संबंधित जानकारी देखने को मिलेगी।</div><div><br></div><h2>पुरातत्व संग्रहालय</h2><div>पुरातत्व संग्रहालय को देखने से हमें मणिपुर के इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर</h2><div>सबसे सुंदर सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर लगे। सानामाही मेतेई वास्तुकला का उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी हुई है। जिसको मेतेई लोग शुभ और पवित्र मानते हैं। यहां पर कई और दर्शनीय स्थल है। जैसे - महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति और राजा बोधचंद्र की समाधि है। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट में है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर का निर्माण कराया गया है। यह इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।</div><div><br></div><h2>जरूरी बातें</h2><div>ट्रेन से इंफाल पहुंचने के लिए आपको दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से आप इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी यहां पर आप सीधे पहुंच सकते हैं।</div><div><br></div><div>यहां पर जाने के लिए सिंतबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहावना होता है।</div><div><br></div><div>मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। हालांकि यह सुविधा अब ऑनलाइन भी है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है। यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मौजूद है। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की प्रति जरूरी है। इसका शुल्क 100 रुपए है। विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 14:50:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/kangla-fort-symbol-of-manipur-cultural-beauty-find-out-how-to-reach-imphal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/irctc-kashi-tirtha-yatra-package-details-and-route]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अगर आप भी काफी लंबे समय से बनारस घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। अब आप सिर्फ 20 हजार रुपये के बजट में 9 दिनों की तीर्थ यात्रा पर जा सकती हैं।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">असल में भारतीय रेलवे ने Kashi Tirth Yatra टूर पैकेज देख लें। इस पैकेज में आपको घूमने-फिरने के साथ ही खाने-पीने की तमाम सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, आपको अलग-अलग जगहों पर होटल और यात्रा की खास व्यवस्था की जाएगी।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आइए आपको बताते हैं, इस पैकेज की शुरुआत कहां से हो रही हैं। आइए आपको इस पैकेज में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताते हैं।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>टूर पैकेज से जुड़ी जरुरी जानकारी</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- पैकेज का नाम- KASHI TIRTHA YATRA</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- पैकेज कोड- SZBG43</div><div><br></div><div>&nbsp;- कहां-कहां घूमने को मिलेगा- गया, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज</div><div><br></div><div>&nbsp;- यात्रा की शुरुआत कहां से होगी- तिरुनेलवेली, विरुधुनगर, मदुरै, डिंडीगुल, तिरुचिरापल्ली, विल्लुपुरम, चंगलपट्टू, तांबरम, चेन्नई एग्मोर, गूडूर जंक्शन और विजयवाड़ा</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह पैकेज- 8 रातें और 9 दिन का है</div><div><br></div><div>&nbsp;- पैकेज में आपको ट्रेन से यात्रा करवाई जाएगी।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यात्रा की शुरुआत- 09 सितंबर 2026</div><div><br></div><div><b>KASHI TIRTHA YATRA टूर पैकेज फीस</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इसमें आपको स्लीपर क्लास, 3AC (थर्ड एसी) और 2AC (सेकंड एसी) में मिनट टिकट बुक करने का मौका मिलेगा।&nbsp;</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अकेले यात्रा करने पर आपको 16,900 रुपये देने होंगे।</div><div><br></div><div>&nbsp;- दो लोगों के साथ यात्रा करती हैं, तो प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 31, 000 रुपये है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तीन लोगों के साथ सफर करती हैं, तो प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 43,500 रुपये हैं।</div><div><br></div><div><b>KASHI TIRTHA YATRA टूर पैकेज में शामिल सुविधाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इस पैकेज में सुबह की चाय, नाश्ता, लंच और डिनर केवल शाकाहारी मिलेगा।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके साथ ही यात्रियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस दिया जाएगा।</div><div><br></div><div>&nbsp;- प्रोफेशनल टूर एस्कॉर्ट्स की सेवाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ट्रेन में प्राइवेट सिक्योरिटी।</div><div><br></div><div>&nbsp;- जरुरी मदद के लिए IRCTC के टूर मैनेजर पूरे टूर के दौरान साथ रहेंगे।</div><div><br></div><div>&nbsp;- सभी टैक्स&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लागू</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;होंगे</span><span style="font-size: 1rem;">।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:51:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/touristplaces/irctc-kashi-tirtha-yatra-package-details-and-route</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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