कोविड, बाढ़ राहत और प्रवासियों के लिए विदेशों से लिया चंदा और गोवा जाकर किया खर्च, ED ने जब्त की राणा अय्यूब की 1.77 करोड़ की संपत्ति

By अभिनय आकाश | Feb 11, 2022

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पत्रकार राणा अय्यूब के एक करोड़ 77 लाख रुपये जब्त कर लिए हैं। पत्रकार राणा अय्यूब के रुपये जब्त किए जाने के बाद ईडी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कथित तौर पर अभियानों के लिए दिए गए दान का सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया। ईडी ने ये कदम उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उठाया है। ईडी अधिकारियों का कहना है कि राणा अय्यूब ने कोविड, बाढ़ राहत और प्रवासियों के लिए तीन ऑनलाइन अभियान शुरू किए थे। ये एक तरह की क्राउड फंडिंग थी। उन्हें एफसीआरए की मंजूरी के बिना विदेशी योगदान मिला। हालांकि इनकम टैक्स और ईडी की कार्रवाई के बाद पत्रकार राणा अय्यूब ने विदेशी चंदा वापस कर दिया। विदेशी चंदे की वापसी के बाद भी उनके पास लगभग दो करोड़ रुपये थे लेकिन कथित तौर पर केवल 28 लाख रुपये का उपयोग किया गया था। ईडी का कहना है कि उन्होंने गोवा की यात्रा जैसे निजी खर्चों के लिए चंदे का इस्तेमाल किया। 

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इन धाराओं के तहत मुकदमा 

पत्रकार अय्यूब के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में 7 सितंबर 2021 को आईपीसी की धारा 403, 406, 418, 420, आईटी अधिनियम की धारा 66 डी और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट-2002 की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया था। इसमें अयूब पर ये आरोप लगाया गया था है कि उसने चैरिटी के नाम पर गलत तरीके से आम जनता से धन की वसूली की थी। हिंदू आईटी सेल के विकास शाकृत्यायन ने अगस्त 2021 में ये एफआईआर दर्ज करवाया था। 

पत्रकार ने आरोपों को किया खारिज

अय्यूब ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके खिलाफ किए गए जवाब के जवाब में एक बयान जारी किया। राणा अय्यूब द्वारा शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया है, "यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि राहत अभियान कोष का कोई भी हिस्सा बेहिसाब नहीं रहता है, और व्यक्तिगत खर्चों के लिए धन के दुरुपयोग के किसी भी दूरस्थ आरोप की कोई गुंजाइश नहीं है। इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं, पूरी तरह से दुर्भावना से भरे हुए हैं और रिकॉर्ड के आधार पर झूठ हैं, और मेरे बैंक स्टेटमेंट को जानबूझकर गलत तरीके से पढ़ा गया है। 

कौन हैं राणा अय्यूब

तहलका के संपादक तरुण तेजपाल पर यौन शोषण के आरोप लगने के बाद राणा अय्यूब ने वहां से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वो स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिये तमाम अखबारों और मैगजीनों में लेख लिखने शुरू कर दिए थे। यही नहीं कश्मीर में से धारा 370 हटने के बाद अमूल ने एक भाईचारे वाला विज्ञापन बनाया था। जिसको लेकर राणा अय्यूब ने भी अपनी आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने लिखा था कि कोई कैसे विज्ञापन बना सकता है। जहां पर  बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हो, सेना नागरिकों पर अत्याचार कर रही है। सभी लोग घरों में कैद हैं। हाल के दिनों में राणा अय्यूब को जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी है। हालांकि जांच कर रही पुलिस ने भोपाल से धमकी देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया। 

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