By अभिनय आकाश | Mar 16, 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता में भाजपा की ऐतिहासिक रैली में विशाल जनसभा को संबोधित किया। बंगाल के पत्रकारों की माने तो पिछले 40 सालों में यह सबसे बड़ी भीड़ थी और भीड़ को रोकने के लिए ममता बनर्जी के प्रशासन ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। जगह-जगह पोस्टर फाड़े गए। बसों को रोका गया। इसके बावजूद अगर 10 लाख से अधिक लोगों ने जनसभा में जुटकर इसे ऐतिहासिक बना दिया है। कहा जा रहा है कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। सिंगूर और नंदी्राम के दौरान भी ऐसी भीड़ नहीं जुटी थी। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भीड़ बदलाव का संकेत है? बीजेपी का संगठनिक कौशल है या फिर कोई और कारण है? ब्रिगेड परेड ग्राउंड भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है और कई महत्वपूर्ण अवसरों पर यहाँ कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
यह ग्राउंड भारतीय सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय के नियंत्रण में है और इसके पीछे प्रतिष्ठित विक्टोरिया मेमोरियल स्थित है। प्रारंभिक रूप से, प्लासी की लड़ाई में विजय प्राप्त करने के बाद फोर्ट विलियम में तैनात ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं के लिए इस ग्राउंड को परेड ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल किया जाना था। औपनिवेशिक भारत के शासनकाल के दौरान देशबंधु चित्तरंजन दास ने रॉलेट एक्ट के खिलाफ मैदान पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद, प्रधानमंत्री नेहरू ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सोवियत नेताओं निकिता ख्रुश्चेव और निकोलाई बुल्गानिन के लिए एक सार्वजनिक स्वागत समारोह आयोजित किया था। इसके बाद, पाकिस्तान के विरुद्ध भारत की विजय के फलस्वरूप बांग्लादेश स्वतंत्र राज्य बना। इस अवसर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मुजीबुर रहमान ने भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निमंत्रण पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। रहमान ने अपने देश की स्वतंत्रता के लिए भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए "जय भारत, जय बांग्ला" का नारा लगाया। उस समय पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे का उदय हुआ। कम्युनिस्टों ने मैदान में कई रैलियां आयोजित कीं और पूरा स्थल खचाखच भर दिया।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड के क्रांतिकारी इतिहास के अनुरूप, ममता बनर्जी ने नवंबर 1992 में युवा कांग्रेस की नेता के रूप में एक ऐतिहासिक रैली का आयोजन किया। 19 साल बाद, वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं। कई वर्षों बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘परिवर्तन’ की महक से भरे वातावरण में एक जनसभा को संबोधित किया। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ब्रिगेड परेड ग्राउंड के उल्लेखनीय इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर कम्युनिस्ट रैलियों तक की विशाल रैलियों का गवाह रहा यह मैदान 'जय श्री राम' के नारों से गूंज रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रैली को संबोधित करते हुए गुंडागर्दी, ममता बनर्जी के राज सब पर कहा। सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कुछ कहा है? वो जान लेते हैं। मोदी ने कहा कि बंगाल सरकार अपराधियों की मदद से चल रही है। तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की वजह से जनसांख्यिकी बदल गई है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, बंगाल में बदलाव अब दीवारों पर भी लिखा जा चुका है और बंगाल के लोगों के दिलों में भी छप चुका है। अब बंगाल से निर्मम सरकार का अंत होकर रहेगा और महाजंगलराज का खात्मा होगा। बंगाल में महाजंगलराज लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। वो दिन दूर नहीं जब बंगाल में फिर से कानून का राज होगा। जो कानून तोड़ेगा और जो अत्याचार करेगा, उसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। चुन चुनकर जुल्मों का हिसाब लिया जाएगा। मोदी ने आरोप लगाया कि रैली को रोकने के लिए राज्य सरकार ने हरसंभव कोशिश की। रैली में लोगों को आने से रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई बाधाएं खड़ी की गई। पुल बंद करवा दिए गए, गाड़ियों को रोका गया, ट्रैफिक जाम कराया गया और बीजेपी के झंडे और पोस्टर तक हटवा दिए गए। कोलकाता के मध्य इलाके में शनिवार को मोदी की रैली से करीब आधे घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी समर्थकों के बीच जोरदार झड़प हो गई। इस हिंसक टकराव में एक पुलिस अधिकारी और बीजेपी के एक नेता घायल हो गए। मोदी ने बंगाल में 18,680 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की।
कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा के साथ ही बीजेपी अवैध घुसपैठ को यहां बड़ा मुद्य बना रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस एसआरआई को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार आरोप जड़ रही है और वोट चोरी का आरोप लगा रही है। बीजेपी जहां बेरोजगारी, उद्योगों की खराब स्थिति की बात कर रही है साथ ही कह रही है कि यहां की खराब स्थिति की वजह ये युवा पढ़ने और नौकरी करने के लिए यहां से पलायन कर रहे हैं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार के कामों की बात कर रही है, साथ ही बंगाल की अस्मिता का मुद्दा बना रही है और केंद्र सरकार पर बंगाल के साथ अन्याय करने का भी आरोप लगा रही है। बीजेपी यह कह रही है कि तृणमूल कांग्रेस की वजह से केंद्र सरकार की योजनाओं का बंगाल के लोगों को फायदा नहीं मिल पा रहा है।
यहां मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस यहां 2011 से लगातार सत्ता में है। 2021 के चुनाव के बाद बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बनकर उभरी। इसके अलावा वाम मोर्चा और कांग्रेस भी मैदान में होगी।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों पर कब्जा किया। बीजेपी को 77 सीटें मिलीं।
बंगाल की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों का मानना है कि शुरुआत में लग रहा था कि शायद ममता बनर्जी आराम से बंगालजीत रही हैं। ममता बनर्जी की योजनाएं, महिलाओं को जो उन्होंने पैसा दिया वह सब लेकिन इसके बावजूद पश्चिम बंगाल में एक अंडर करंट है और ऐसा अनुमान जताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के 70% हिंदू एकजुट हो चुके हैं। ह ऐतिहासिक है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। ना देश के बंटवारे के समय हुआ। ना जब कांग्रेस सरकार उखाड़ फेंकी गई तब हुआ। ना जब ममता बनर्जी आई तब हुआ।
2013 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की के नाम की घोषणा हुई थी, राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी, तो बनारस में एक रैली हुई थी और दावा यह किया जाता है कि उस रैली में 5 लाख से ज्यादा लोग जुटे थे। आसपास के जिलों से पैदल लोग जुट रहे थे। लेकिन कोलकाता के ब्रिगेड मैदान की रैली ने वह सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। 10 लाख से ज्यादा का दावा किया जा रहा है। 10 लाख बंगाल के लिहाज से भी बहुत बड़ा दावा है। चलिए मान लें कि 10 लाख से ज्यादा नहीं जुटे होंगे। 5 लाख या 6 लाख भी जुटे होंगे। फिर भी उस लिहाज से यह रैली ऐतिहासिक है। इसे बंगाल की राजनीति का अंडर करंट कहा जा रहा है। आपको याद होगा अभी कुछ दिन पहले की ही बात है राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू आई उनको प्रोटोकॉल नहीं दिया गया। उसका भी असर देखने को मिल सकता है।