'Organic' और 'Zero Maida' प्रोडक्ट्स खरीदने से पहले सावधान! FSSAI ने कई Brands को भेजा नोटिस।

By Ankit Jaiswal | Jun 14, 2026

अगर आप बाजार से कोई खाद्य उत्पाद खरीदते समय उसके पैकेट पर लिखे “स्वास्थ्यवर्धक”, “जैविक”, “शून्य मैदा” या “शाकाहारी” जैसे दावों पर भरोसा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने कई खाद्य उत्पाद कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए उनके ब्रांड नाम, व्यापारिक नाम और उत्पाद संबंधी दावों पर सवाल उठाए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार जिन कंपनियों और उत्पादों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें “हेल्दी मास्टर”, “विजन टू सर्व हेल्दी”, “न्यूहर्ब्स ट्रू विटामिन”, “प्लान बी प्लांट बेस्ड वीगन”, “द हेल्थ फैक्टरी जीरो मैदा होल व्हीट ब्रेड”, “द हेल्थ फैक्टरी जीरो मैदा पिज्जा बेस”, “ट्रूवी द हेल्दी मिक्स वेजी चिप्स”, “द हेल्दी रागी चिप्स”, “द हेल्दी मूंग दाल चिप्स”, “हेल्दी चॉइस हेल्दी फूड फॉर हेल्दी लाइफ पोहा”, “इमामी हेल्दी एंड टेस्टी”, “हेल्थ एड”, “ऑर्गेनिक विजडम”, “शाइन ऑर्गेनिक”, “टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स”, “वर्ल्ड ऑफ ऑर्गेनिक”, “स्टोरिया जूस अनार” और “आयोटा वाटर फील द डिफरेंस” जैसे नाम शामिल हैं।

गौरतलब है कि प्राधिकरण ने कई उत्पादों के नाम में प्रयुक्त “स्वास्थ्यवर्धक” शब्द पर आपत्ति जताई है। नियामक का मानना है कि केवल नाम के आधार पर किसी उत्पाद को स्वास्थ्य के लिए बेहतर बताना उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है। इसी तरह “ट्रू विटामिन” जैसे शब्दों को भी नियमों के अनुरूप नहीं माना गया है, क्योंकि यह शब्द आधिकारिक रूप से परिभाषित नहीं है।

“प्लान बी प्लांट बेस्ड वीगन” नामक उत्पाद पर भी सवाल उठाया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि उत्पाद को आधिकारिक रूप से शाकाहारी प्रमाणन नहीं मिला है, इसलिए इस तरह का दावा उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है।

वहीं “द हेल्थ फैक्टरी जीरो मैदा” नाम से बेचे जा रहे कुछ उत्पादों में गेहूं से जुड़े अन्य तत्व मौजूद पाए गए हैं। ऐसे में “जीरो मैदा” का दावा नियमों के अनुरूप नहीं माना गया है। इसी तरह “स्टोरिया जूस अनार” के मामले में भी प्राधिकरण ने कहा कि उत्पाद में केवल चार प्रतिशत अनार का सघन रस मौजूद है, जबकि नाम से ऐसा प्रतीत होता है कि यह पूरी तरह अनार का रस है।

जैविक उत्पादों से जुड़े मामलों में भी कई कंपनियां जांच के दायरे में आई हैं। “ऑर्गेनिक विजडम”, “शाइन ऑर्गेनिक”, “टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स” और “वर्ल्ड ऑफ ऑर्गेनिक” जैसे नामों वाले उत्पादों के पास आवश्यक जैविक प्रमाणन, “जैविक भारत” चिह्न और अन्य अनिवार्य स्वीकृतियां नहीं पाई गईं। ऐसे में इन नामों को भी संभावित रूप से भ्रामक माना गया है।

इसके अलावा “आयोटा वाटर फील द डिफरेंस” के मामले में खनिज तत्वों से जुड़े दावों पर सवाल उठाया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि केवल प्रसंस्करण के दौरान खोए पोषक तत्वों की भरपाई करने पर अतिरिक्त पोषण का दावा नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि हाल के वर्षों में “स्वास्थ्यवर्धक”, “जैविक”, “शाकाहारी” और “विटामिन युक्त” जैसे शब्दों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार ऐसे दावे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किए जाते हैं। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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