कैबिनेट की बैठक में 19 प्रस्तावों पर लगी मुहर, बिहार राज्य में तीन नए विभागों के गठन की मिली मंजूरी

By अंकित सिंह | Dec 09, 2025

नई सरकार के गठन होने के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई दूसरी कैबिनेट की बैठक में 19 प्रस्तावों पर मुहर लग गई। जिसमें तीन नये विभागों के गठन के साथ ही षष्ठम वेतनमान में वेतन और पेंशन पाने वाले सरकारी सेवकों, पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ता में पांच फीसदी की वृद्धि करने की स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार पंचम वेतनमान में वेतन और पेंशन पाने वालों के मंहगाई भत्ता में आठ फीसदी की वृद्धि करने की स्वीकृति दी गई है।

तीन विभागों का नाम बदला

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि तीन विभागों के नाम बदलने की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, श्रम संसाधन विभाग को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग और कला संस्कृति एवं युवा विभाग का नाम कला एवं संस्कृति विभाग करने की स्वीकृति दी गई है। 

गया जी और मुंगेर नागरिक सुरक्षा जिला घोषित

एसीएस ने बताया कि गया जी एवं मुंगेर जिला प्राकृतिक एवं मानवनिर्मित आपदाओं के साथ-साथ सामरिक एवं आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। गया जी शहर भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली होने, पितृपक्ष मेला तथा बौध महोत्सव आयोजित होने के कारण सालों भर देशी एवं विदेशी अतिथियों से भरा रहता है। इसी प्रकार मुंगेर जिला में कई प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान यथा-जमालपुर रेल इंजन कारखाना, ब्रिटिश गन फैक्ट्री एवं अन्य आई० टी० सी० फैक्ट्री स्थापित है। युद्ध/ शत्रु हमले की स्थिति में इन जिलों को लक्षित कर देश को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इन दोनों जिला में प्राकृतिक आपदाओं की भी संभावना हमेशा बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखकर नागरिक सुरक्षा कोर के लिये पूर्व से स्वीकृत 28 जिलों के अतिरिक्त गया जी एवं मुंगेर जिला को भी नागरिक सुरक्षा जिला घोषित किया जाना आवश्यक है। इसको देखते हुए गया जी एवं मुंगेर जिला को नागरिक सुरक्षा जिला घोषित करने तथा उनमें नागरिक सुरक्षा जिला इकाईयों के लिए कुल 14 (चौदह) पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई है।

पटना जू का पार्क प्रवेश शुल्क समेत अन्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए समिति का गठन

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि पटना जू में पार्क प्रवेश शुल्क, दंड शुल्क, आयोजन, अनुदान एवं दान दत्तक निधि सहित अन्य संसाधनों को बढ़ाया जाना आवश्यक है। इसके लिए समिति के गठन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा भारत सरकार की ओर से दिए गए दिशा निर्देश के अनुसार बिहार में पूर्व से घोषित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के लिए वाल्मीकि व्यग्र आरक्षण फाउंडेशन का गठन किया गया है। इसके लिए 15 करोड़ की राशि को कॉरपस फंड के गठन की स्वीकृति का निर्णय लिया गया है।

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30 जून को सेवानिवृत होने वाले कर्मियों को भी मिलेगा वेतन वृद्धि का लाभ

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि एक जुलाई से वेतन वृद्धि होती है। अगर कोई कर्मी 30 जून को सेवानिवृत होता है तो उसे भी पेंशन में वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। कैबिनेट में इसकी भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड के माध्यम से राज्य की विभिन्न परियोजनाओं में सहायता प्रदान करने हेतु मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू) पर स्वीकृति का निर्णय लिया गया है। इसी तरह बिहार के युवाओं के सशक्तिकरण एवं हुनर विकास हेतु विद्यार्थी कौशल कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन वेबिनार और ऑफलाइन सेमिनार के माध्यम से निवेशक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों, लाभुकों एवं व्यवसायिक लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाया जाएगा। इसके लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड मुम्बई ने राज्य के युवाओं के सशक्तिकरण एवं हुनर विकास हेतु विद्यार्थी कौशल कार्यक्रम संचालित करने के लिए बिहार सरकार के साथ एमओयू करने की स्वीकृति प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। एसीएस ने बताया कि बिहार दस्तावेज लेखक अनुज्ञप्ति (संशोधित) नियमावली 2025 लागू की गई है। अब लेपर प्रभावित व्यक्तियों को भी अनुज्ञप्ति मिलेगी। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना संचालित है। इस योजना के तहत महिला भिक्षुकों के लिए 'शांति कुटिर' एवं पुरुष भिक्षुकों के लिए 'सेवा कुटिर गृह का संचालन किया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में बिहार भिक्षावृति निवारण नियमावली 1954 के नियम 6 (2) (ख) में उल्लेखित संबंधित शब्दों को प्रतिस्थापित करते हुए निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है। इसके बाद कोढ़ या पागल शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

नगर निकायों के विद्युत बकाया के लिए 400 करोड़ रुपये स्वीकृत

कैबिनेट में राज्य के नगर निकायों के पास विद्युत कंपनियों के बकाये विद्युत विपत्रों के भुगतान के लिए स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अंतर 400 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

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