1971 युद्ध के सहारे डूबती नैया पार लगाएगी कांग्रेस

By अभिनय आकाश | Feb 23, 2021

तारीख 25 अप्रैल 1971 तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बड़ी मीटिंग में देश के थल सेना अध्यक्ष से कहा कि पाकिस्तान को सबक सिखाना होगा। 71 की वो जंग जब हिन्दुस्तान ने दुनिया का नक्शा बदल दिया था। जब हिन्दुस्तान ने 13 दिनों में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। जब पाकिस्तान के 93 हजार सैनिक लाचार युद्ध बंदी बने। जब हिन्दुस्तान को बांटने का मंसूबा रखने वाला पाकिस्तान खुद टुकड़े-टुकड़े हो गया। इस युद्ध के पांच दशक बाद कांग्रेस पार्टी अपनी छवि सुधारने और जमीन मजबूत करने के लिए 1971 युद्ध का सहारा लेने की तैयारी में है। कांग्रेस द्वारा 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक समिति का गठन किया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी करेंगे। एंटनी इस दौरान पार्टी की गतिविधियों की योजना और समन्वय की निगरानी करेंगे। इस समिति में पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह, पूर्व स्पीकर मीरा कुमार और संयोजक प्रवीण डावर जैसे दिग्गज शामिल है जो अपने स्तर पर योजना बनाएंगे। इसके अलावा कमेटी में मीरा कुमार का नाम इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि 1971 के युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में जगजीवन राम ही रक्षा मंत्री हुआ करते थे। मीरा कुमार बाबू जगजीवन राम की पुत्री हैं। 

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एंटोनी कमेटी की रिपोर्ट और कांग्रेस की छवि 

साल 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी का हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद पर जोर रहा। वहीं कांग्रेस पार्टी बीजेपी के निशाने पर रही और उसकी छवि एंटी हिंदू की बनती रही। अपनी छवि और हार की समीक्षा के लिए कांग्रेस ने एक कमेटी बनाई थी जिसके अध्यक्ष कांग्रेस के वही दिग्गज नेता एके एंटनी हैं जिन्हें 1971 युद्ध वर्षगांव मनाने वाली समिति की कमान सौंपी गई है। 2014 के चुनाव में कांग्रेस के 44 सीटों पर सिमटने के बाद इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना की यूपीए 1 और 2 की सरकार के दौरान पार्टी के नेताओं के बयान ने पार्टी की छवि एंटी हिंदू बना दी थी। बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद दिग्विजय सिंह सरीखे नेताओं के बयान हो या पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों वाले बोल। जिससे उबरने के लिए ही राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव से पूर्व मंदिर प्लान बनाया, जनेऊधारी हिन्दू भी बने और भगवान शिव के अन्नय भक्त भी। लेकिन जेएनयू में जब भारत के टुकड़े वाले नारे लगने के आरोप लगे तो जेएनयू में जाकर राहुल गांधी का खड़ा होना और 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना। और तो और बालाकोट एयर स्ट्राइक पर भी सवाल उठाना जिसका खामियाजा 2019 के चुनाव में सभी ने देखा। 

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सेल्फी विद तिरंगा अभियान 

5 अगस्त 2020 को जब अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम चल रहा था तो ट्विटर के जरिये हिंदुत्व से भी मजबूती से जुड़ने की काफी कोशिश की। लेकिन सारी कोशिशें नाकाफी साबित होने के बाद तय हुआ कि एक बार वो फॉर्मूला अपना कर देखा जाये जिसके बूते भारतीय जनता पार्टी पहले लोकसभा और फिर पंचायत स्तर तक पर सफलता प्राप्त करने हुए स्वर्णिम काल के सपने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही है। कांग्रेस ने अपनी डूबती नैया को पार लगाने के लिए सेल्फी विद तिरंगा अभियान की शुरुआत की थी। 28 दिसंबर को कांग्रेस के 136वें स्थापना दिवस के अवसर पर ऑनलाइन कैंपेन चलाया गया। गौरतलब है कि बीजेपी भी कई मौकों पर तिरंगा यात्रा जैसे अभियान करती रही है। 

सर्जिकल स्ट्राइक पर बीजेपी का कार्यक्रम 

सर्जिकल स्ट्राइक की वर्षगांठ पर बीजेपी की तरफ से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। सरकार ने इसे पराक्रम पर्व के रूप में मनाया छा। देशभर में कार्यक्रम आयोजित कर भारतीय जवानों की वीरगाथा सुनाई गई। बीजेपी ने सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री मोदी का पाकिस्तान को सख्त लहजे में दिए जा रहे संदेश भी शामिल थे। इसके साथ ही जगह-जगह पोस्टर और होर्डिग्स भी लगवाए गए थे। 

कांग्रेस के लिए इसे विडंबना ही कहा जाएघा कि जिस पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़कर कांग्रेस की इंदिरा गांधी सरकार ने बांग्लादेश को अलग राष्ट्र की मान्यता दी और पूरी दुनिया से दिलायी भी। वो कांग्रेस राजनीति के उस छोर पर खड़े-खड़े लगातार कोशिश कर रही है कि कैसे वो लोगों को समझा पाये कि कांग्रेस पार्टी कभी पाकिस्तान के फायदे की बात नहीं करती। बीते 16 दिसंबर को पाकिस्तान के खिलाफ जंग में जीत का जश्न विजय दिवस के रूप में मनाया गया था। लेकिन इस वर्ष युद्ध जीतने के 50 साल पूरे हो रहे हैं और कांग्रेस विजय दिवस की स्वर्ण जयंती व्यापक पैमाने पर करने की तैयारी में है। कांग्रेस की चाह लोगों को यह समझाने की है कि बीजेपी की मोदी सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक से बरसों पहले कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने पाकिस्तान को सबसे बड़ा सबक सिखाया था। 

बहरहाल, राष्ट्रवाद के सहारे अपनी खोई जमीन पाने की आस लगाए कांग्रेस को इसका लाभ मिलता है या नहीं? क्योंकि कभी सेना पर सवाल तो कभी हिन्दुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा जैसी करतूतों को अंजाम देकर कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी फजीहत ही कराई है।- अभिनय आकाश

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