धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ फ्रांस का नया कानून, अब डर पाला बदलेगा

धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ फ्रांस का नया कानून, अब डर पाला बदलेगा

दुनियाभर के लोकतांत्रिक देश इस समस्या से परेशान हो रहे हैं। चाहे वो भारत जैसा देश हो या फिर दूसरे ऐसे देश हो जहां लोकतंत्र इस समय चल रहा है। भारत बड़ी मुस्लिम आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है। भारत में आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है। भारत भी कमोबेश कट्टरता की समस्या से जूझ रहा है।

अगर आप किसी पर तरस खाकर उसे अपने घर में शरण दे देते हैं। शरण पाने पर फिर वो कहे कि ये घर मेरे हिसाब से चलेगा। नहीं चलने पर वो आपके परिवार के लोगों का सिर काट दे। तो फिर क्या आप ताउम्र किसी को अपने घर में शरण देने की हिम्मत कर पाएंगे। अपको इस बात का भी अफसोस रहेगा कि आखिर मैंने इसको शरण क्यों दे दी। आगे से कोई आपके घर में न घुस पाए और अगर घुस चुका है तो आपके हिसाब से ही रहे। इसको लेकर कानून भी बनाएंगे। दरअसल ये कहानी आज तमाम यूरोपीय देशों की है। जिन्होंने मानवता के आधार पर शरण दे दी। देशहित से ऊपर देश को रखा और बदले में उन्हें मिले दंगे और गला काट कट्टरता। तुम मुझे शरण दो मैं तुम्हें दंगा दूंगा। लेकिन अब फ्रांस इसी कट्टरता के खिलाफ कानून बना रहा है। जहां मस्जिदों पर ताला भी लगा, मस्जिदों पर निगरानी भी होगी। सेक्युलरिज्म की पढ़ाई होगी। ऐसे में आज हम बात करेंगे कि क्या है ये बिल और क्यों विवादों में है। इसका फ्रांस और यूरोप पर क्या असर होगा। 

फ्रांस की आबादी 6 करोड़ 70 लाख के आसपास है। फ्रांस बहुत ही नीटो पॉवर कंपनी और न्यूकिल्यर का मेंबर और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में परमानेंट सीट। धार्मिक रुप स देखे तो फ्रांस रोमन कैथलिक और 40 प्रतिशत लोग किसी धर्म को नहीं मानते हैं वहीं। इस्लाम को मानने वाले 5 प्रतिशत लोग फ्रांस में हैं। बताया ये जा रहा है कि आने वाले सालों में फ्रांस की 12 से 13 प्रतिशत आबादी इस्लाम को मानने वाली होगी। कुल मिलाकर कहे तो फ्रांस में किश्चन धर्म के बाद सबसे ज्यादा इस्लाम को मानने वाले हैं। 

सपोर्टिंग रेसपेक्ट फॉर द प्रिंसिपल्स ऑफ द रिपब्लिक इस कानून का नाम है और ये कानून फ्रांस के निचले सदन में पास हो चुका है और इसे एंटी सेप्रेटिज्म लॉ भी कहा जा रहा है। 

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फ्रांस के नए कानून की 10 बड़ी बातें

अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या बच्ची की मेडिकल जांच किसी पुरुष डॉक्टर से कराने से इंकार करता है या शादी के लिए किसी लड़की को मजबूर किया जाता है। एक से अधिक शादियां की जाती है तो करीब 13 लाख रुपये का जुर्मना लगाया जाएगा। बता दें कि शरिया कानून के अनुसार मुसलमान चार शादी कर सकता है। लेकिन फ्रांस में नए कानून  आने के बाद अब ऐसा मुमकिन नहीं है।

फ्रांस में बीते वर्ष हाई स्कूल शिक्षक सैमुएल पैटी की हत्या की गई। पैटी पर आरोप था कि उन्होंने कक्षा में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। उसके बाद घर लौटते वक्त उनकी हत्या कर दी गई। पैटी की हत्या एक छात्र द्वारा ही किए जाने की बात सामने आई। जिसके बाद से ही स्कूली शिक्षक क्लास में ऐसी बातें कहने से डरने लगे जिससे मुस्लिम छात्र कहीं नाराज न हो जाए। लेकिन फ्रांस में सैमुएल पैटी नाम से इस कानून में प्रावधान जोड़ा गया। जिसेक तहत कोई भी व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ उससे जुड़ी निजी जानकारियों को सोशल मीडिया पर शेयर करता है तो उस पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और तीन साल की जेल भी होगी। 

इस कानून में तीसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि सभी नागरिकों को फ्रांस की धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करना होगा। 

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कोई व्यक्ति फ्रांस के किसी सरकारी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को डराता है और उसे फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ जाने के लिए मजबूर करता है तो उसे 5 साल तक जेल होगी और करीब 65 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। 

अपने बच्चों को घर पर ही पढ़ाने की चाह रखने वाले लोगों को फ्रांस की सरकार से इस बात की इजाजत लेनी होगी और इसके पीछे के ठोस वजह को भी बताना होगा। 

सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा ये सुनिश्चित किया जाएगा कि खेल-कूद में किसी भी तरह का लिंग भेदभाव न हो। लड़कियों के लिए अलग स्विमिंग पूल और लड़कों के लिए अलग इस बात की अनुमति फ्रांस की सरकार की तरफ से नहीं होगी। 

नए कानून के तहत फ्रांस के सभी धार्मिक संस्थानों को विदेशों से मिलने वाले चंदे की जानकारी सरकार को देनी होगी। अगर फंडिग 8 लाख से ज्यादा है तो सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। ऐसा नहीं करने की स्थिति में फ्रांस की सरकार द्वारा ऐसे धार्मिक संस्थानों को देश से मिलने वाली आर्थिक मदद को बंद कर दिया जाएगा। 

विभिन्न समूहों और संस्थाों को सरकार से विशेष सहायता मिलती है। उन्हें एक समझौते पर हस्ताक्षर करने होंगे। इस समझौते के तहत फ्रांस के संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान अनिवार्य होगा। 

धार्मिक संस्थानों में दो समुदायों के बीच टकराव और वैमनस्य पैदा हो इस तरह के भाषण नहीं दिए जा सकेंगे।

जिल लोगों पर फ्रांस में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप होगा, ऐसे लोगों पर धार्मिक संस्थानों में हिस्सा लेने पर 10 साल के लिए बैन लगा दिया जाएगा। 

बिल को लेकर फ्रांस का रूख

1905 से सेक्युलर विचार अपनाने वाले फ्रांस ने पिछले कुछ समय से इस्लाम के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। फ्रांस के मुस्लिमों को 'काउंटर सोसायटी' कहा जाता है और यह भी तथ्य है कि यूरोप में फ्रांस वह देश था, जिसने 2004 में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया।

मैक्रों 'इस्लाम में सुधार' संबंधी बयान दे चुके हैं, जिन पर काफी तीखी प्रतिक्रिया हो चुकी है। यह फैक्ट भी कुछ कहता है कि 2012 से फ्रांस में मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने करीब 36 हमले किए हैं।

इस्लाम के खिलाफ लामबंदी को 2022 चुनाव के मद्देनज़र मैक्रों की राजनीति भी माना जा रहा है। मैक्रों एक ऐसा कानून लाने की तैयारी में हैं, जिसके तहत विदेशी फंड से ट्रेंड इमाम फ्रांस में नहीं आ सकेंगे। यह भी प्रस्ताव है कि मस्जिदों को स्टेट फंडिंग मिले और टैक्स ब्रेक्स भी।

मैक्रों खुद 'इस्लाम के संकट' में होने संबंधी बयान देते रहे हैं, तो उनके मंत्री भी 'इस्लामी अलगाववाद' और इस्लाम को केंद्र में रखकर फ्रांस के सामने 'सिविल वॉर' के खतरे होने जैसे बयान देते रहे हैं।

बिल पर राजनीति

फ्रांस की सरकार का मानना है कि इस बिल के कानून का शक्ल लेने के बाद चरमपंथ से लड़ने की सरकार की कोशिशों को बल मिलेगा। हालांकि विरोध करने वालों की अपनी आशंकाएं हैं। उनका कहना है कि जिन उपायों की बात हो रही है वो मौजूदा कानूनों में शामिल हैं। विरोधी पक्ष बिल के पीछे राजनीतिक मंशा को तलाश रहे हैं। सरकार का मानना है कि होम स्कूल के माध्यम से बच्चों को धार्मिक विचारों की शिक्षा दी जाती है जिसे रोकने की मंशा है। किसी भी सरकारी कर्मचारी को धमकी देने वाले को जेल की सजा हो सकती है। इसे भी सैमुअल पैटी से जोड़ कर देखा जा रहा है। अगर किसी कर्मचारी को धमकी मिली है तो उसके बॉस को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी होगी बर्शर्ते कर्मचारी इसके लिए सहमत हो। 

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फ्रांस को ऐसा करने की  नौबत क्यों आई

दूसरे देशों से आए शरमार्थी और फ्रांस में बढ़ती कट्टर इस्लामिक आतंकवाद की घटानाओं की वजह से फ्रांस ने अपनी जमीन से धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंक दिया है। फ्रांस में बॉर्डर एरिया से बड़ी संख्या में शरणार्थी अन्य देशों से आकर बस गए। 2012 में गृह युद्ध के मुहाने से सीरिया गुजर रहा था। उस दौर में फ्रांस में शरण लेने वाले मुसलमानों की गिनती एक लाख तक पहुंच गई थी।आतंकी संगठन आईएसाईएस के इराक, सीरिया और लीबिया के इलाकों को कब्जा करने के बाद यूरोप में शरण लेने वाले मुसलमानों की संख्या में बढोत्तरी हुई। 2017 में फ्रांस में रिकॉर्ड डेढ़ लाख लोगों ने शरण ली। 2019 आते-आते ये संख्या दो लाख हो चुकी थी। 13 नवंबर 2015 को फ्रांस में सुनियोजित तरीके से कई आतंकवादी हमले हुए जिसमें 130 लोग मारे गए थे। 14 जुलाई 2016 को फ्रांस के नीस शहर में एक आतंकवादी ने भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया था जिसमें 84 लोग मारे गए थे। 3 अक्टूबर 2019 को एक आतंकवादी ने तीन पुलिस अफसर और एक आम नागरिक को अपना निशाना बनाया। 16 अक्टूबर को सैमुएल पैटी की एक अलगाववादी द्वारा हत्या कर दी गई। 

भारत में कट्टरता की समस्या

दुनियाभर के लोकतांत्रिक देश इस समस्या से परेशान हो रहे हैं। चाहे वो भारत जैसा देश हो या फिर दूसरे ऐसे देश हो जहां लोकतंत्र इस समय चल रहा है। भारत बड़ी मुस्लिम आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है। भारत में आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है। भारत भी कमोबेश कट्टरता की समस्या से जूझ रहा है। कुछ वक्त पूर्व ही गृह मंत्रालय ने भारत में कट्टरता की स्थिति पर अपनी तरह के पहले शोध अध्ययन को मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से विधिक रूप से कट्टरता को परिभाषित करने का प्रयास किया जाएघा और उसी आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 में संशोधन किया जाएगा। मंत्रालय का ये भी दावा है कि यह अध्ययन पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष होगा और भारत में अभी भी कट्टरता को कानूनी रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। जिसकी वजह से पुलिस और प्रशासन द्वारा इस स्थिति का दुरुपयोग किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक कट्टरता के संदर्भ में केरल और कर्नाटक में इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के सदस्यों के बढ़ते गतिविधियों के बारे में आगाह किया गया है। - अभिनय आकाश






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