Kabul Airport पर उतरा भारत के झंडे वाला 2.5 टन सामान, गदगद हुआ अफगानिस्तान

By अभिनय आकाश | Mar 21, 2026

ईरान, इजराइल, अमेरिका में युद्ध है। खाड़ी देशों पर सीधा असर है। क्योंकि ईरान लगातार खाड़ी में हमले कर रहा है खाड़ी देशों में। भारत उस मोर्चे पर पूरी ताकत के साथ डिप्लोमेसी पर लौट आने की अपील कर रहा है। बातचीत कर रहा है। 24-4 घंटे के अंदर भारत के प्रधानमंत्री पांच राष्ट्र अध्यक्षों से बात कर रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ हार्मोस को सुरक्षित रखा जाए इसके लिए भारत अपने युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी तरफ दुनिया में कोई और मोर्चा भी है जिस पर भारत जुटा हुआ है। यह मोर्चा है पाकिस्तान बनाम अफगानिस्तान का। अफगानिस्तान पाकिस्तान में हुए युद्ध में जिसमें अभी हाल में एक सीज फायर का ऐलान किया गया जिसकी जानकारी आगे देंगे। उसमें भारत जो है रोल निभाने से पीछे नहीं है। 

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भारत ने ढाई टन मेडिकल सामग्री पहुंचाई है। मेडिकल डिस्पोजेबल्स हैं। किट्स हैं, मेडिकल किट्स यानी कि इक्विपमेंट जो हैं जो जिससे इलाज किया जा सके या जिससे बेहतर इलाज हो सके वो है। इसके अलावा इमरजेंसी मेडिसिंस हैं। यानी कि राहत देने वाली दवाइयां हैं। ढाई टन भारत ने यह भेजा है और साथ में भारत ने कहा है कि इंडिया स्टैंड्स इन सॉलिडेरिटी विद अफगान पीपल एंड विल कंटिन्यू टू एक्सटेंड ऑल पॉसिबल ह्यूमनिटेरियन सपोर्ट इन दिस डिफिकल्ट टावर। इसका मतलब है कि भारत ने कहा है कि वो अफगानिस्तान के लोगों के साथ पूरे ताकत के साथ पूरे हमदर्दी के साथ इस मुश्किल घड़ी में जब पाकिस्तान आम नागरिकों पर बम गिरा रहा है उस वक्त में भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और वो भारत की तरफ से भारत ने कहा है कि जो कुछ भी संभव होगा मानवीय सहायता के रूप में हम आप तक पहुंचेंगे पहुंचाएंगे। यानी कि अफगानिस्तान को इस बात का विश्वास भी भारत ने दिलाया है कि तुम्हारी जितनी मदद की जा सकती है उतनी तुम्हारी मदद हम देते रहेंगे ताकि लोग जल्दी स्वस्थ लाभ हो जाए। जो इलाजरत हैं उनको बेहतर इलाज मिल पाए। तो देखिए एक तरफ यह मोर्चा है, युद्ध है, बमबारी है, तमाम चीजें हैं और दूसरी तरफ अफगानिस्तान भी है जहां पाकिस्तान अफगानिस्तान में युद्ध चल रहा था। ईद को लेकर टेंपरेरी सीज फायर हुए। वहां भारत भूला नहीं मोर्चा। यही जो है वो बताता है कि आपको एक बार में एक जगह काम नहीं करना होता। आपको मल्टीपल मोर्चों पर तैनाती रखनी पड़ती है कि कोई आपका मोर्चा कमजोर ना पड़ने पाए। यही वजह है कि उधर भी अगर डिप्लोमेसी है तो इधर भी डिप्लोमेसी है और देखिए ईद ईद उलफितर से पहले अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने जो ये तय किया कि भई चलो टेंपरेरी सीज फायर कर लेते हैं और हाल में जो काबुल के अस्पताल पर जो हमला हुआ था उसके बाद से ये हालात बहुत खराब है। पाकिस्तान बहुत अजीबोगरीब तर्क दे रहा है अपनी गर्दन बचाने के लिए कि उसे जिम्मेदार ना माना जाए। 

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