Prajatantra: मंडल बनाम कमंडल पर होगा 2024 का चुनाव! Caste Census से किसका फायदा

By अंकित सिंह | Aug 03, 2023

बिहार सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में जाति-आधारित सर्वेक्षण कराने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय पटना उच्च न्यायालय द्वारा सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली सभी रिट याचिकाओं को खारिज करने के बाद आया है, जिससे इसके जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। बिहार में जाति सर्वेक्षण इस साल 7 जनवरी को शुरू हुआ, जिसे मई के अंत तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। हालाँकि, 4 मई को पटना उच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश के बाद सर्वेक्षण को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, जिसने राज्य सरकार को पहले से एकत्र किए गए डेटा को संरक्षित करने का निर्देश दिया था। सर्वेक्षण फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बीजेपी का सधा हुआ सुर 

बीजेपी ने पटना हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। साथ ही साथ कई सवाल भी खड़े कर दिया। भाजपा ने कहा कि जातिगत सर्वे से हमें कोई दिक्कत नहीं। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रदेश में इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरेगी? भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा? इसके साथ ही भाजपा ने यह भी कहा है कि अगर सरकार की मंशा सही है तो रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और गरीबों के लिए नीतियां बनाई जानी चाहिए। भाजपा का आरोप है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार की मंशा जातिगत सर्वे के जरिए समाज को बांटना है। भाजपा के सुशील मोदी ने यह भी दावा किया था कि हमारी सरकार रहने के दौरान ही इस पर फैसला हुआ था। 

नीतीश का बढ़ेगा कद

दरअसल, राजनीतिक दृष्टिकोण से बिहार काफी महत्वपूर्ण राज्य है वहां लोकसभा की 40 सीटें हैं। जातिगत सर्वेक्षण के बाद नीतीश कुमार का विपक्षी दलों के बीच कद बढ़ सकता है। लगातार गठबंधन बदलने वाले नीतीश कुमार की इमेज अस्थिर नेता की बन गई है। फिलहाल नीतीश कुमार की ओर से स्थिरता की कोशिश की जा रही है। ऐसे में जातिगत सर्वे उनके लिए संजीवनी साबित हो सकता है। नीतीश कुमार विपक्षी दलों के बीच कद बढ़ेगा। वह खुद ओबीसी समाज से आते हैं। ऐसे में उनके सहारे बाकी के विपक्षी नेता भाजपा को घेरने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा अगर बिहार में यह पूरा हो जाता है तो ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में जातिगत सर्वे का मामला सामने आ सकता है। संभावना है कि नीतीश अब राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना की मांग उठाएंगे और बीजेपी को घेरेंगे।

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जातीय जनगणना को लेकर बिहार कहीं ना कहीं विपक्षी दलों का मार्गदर्शन करता हुआ दिखाई दे रहा है। इंडिया गठबंधन के कई नेता लगातार जातीय गणना की मांग करते रहे हैं। खुद राहुल गांधी ने भी इसका समर्थन किया है। हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि यह सर्वेक्षण सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए है दावे चाहे जो भी हो रहे दो। भाजपा और महागठबंधन दोनों ही अपने उम्मीदवार इसी रिपोर्ट के आधार पर तय करेंगे। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इसका फायदा जनता को होता है या फिर राजनीतिक दल को। लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव में से मुद्दा बनाया जाएगा और इसी के आधार पर जनता को साधने की कोशिश की जाएगी। यही तो प्रजातंत्र है। 

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