Mumbai Attack के गुनहगारों को नहीं बचा पाएंगे Pakistan के 'सुरक्षित ठिकाने', भारत में मुकदमे का रास्ता साफ

By नीरज कुमार दुबे | Aug 18, 2026

मुंबई पर 26 नवंबर 2008 को हुए उस खूनी हमले के गुनहगारों के लिए अब पाकिस्तान की सरजमीं कोई ऐसी सुरक्षित पनाहगाह नहीं रह जाएगी जहां बैठकर वह भारत के खिलाफ साजिशें रचते रहें और कानून की पहुंच से बाहर होने का भ्रम पालते रहें। भारत ने साफ कर दिया है कि अपराधी पाकिस्तान में छिपा हो या किसी जेल की चारदीवारी के पीछे बैठा हो, न्याय की प्रक्रिया उसे कठघरे में खींच कर लायेगी।

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मुंबई पुलिस और विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अदालत के सामने साफ कहा है कि इन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। 26 नवंबर के हमले में जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने पूछताछ के दौरान इनके किरदार का खुलासा किया था। यही वजह है कि अब पाकिस्तान की ओर से इन आतंकियों को बचाने, टालने या मुकदमे को लटकाने की कोशिश भारत की न्यायिक प्रक्रिया को रोक नहीं सकेगी।

यह मामला केवल छह आतंकियों के खिलाफ मुकदमा नहीं है। यह पाकिस्तान की उस सोच को सीधी चुनौती है जिसमें आतंकवादियों को पहले तैयार किया जाता है, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है, भारत के खिलाफ हमला करने के लिए भेजा जाता है और हमला हो जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई का दिखावा किया जाता है। मुंबई में 26 नवंबर से 29 नवंबर तक चले हमले में 166 लोगों की जान गई थी। ताज महल होटल, ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, नरीमन हाउस, कामा अस्पताल और अन्य स्थानों पर मौत का तांडव रचा गया था। इसके बावजूद हमले के प्रमुख सूत्रधार आज तक भारत की अदालत के सामने खडे नहीं हुए।

सबसे बडा सवाल यह है कि ये आतंकी आखिर हैं कहां?

हाफिज सईद के बारे में पाकिस्तान का आधिकारिक दावा है कि वह जेल में है। उसे लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद बताया जाता रहा है। लेकिन भारत की जांच और खुफिया सूचनाओं ने कई बार इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2025 में सामने आई तस्वीरों और उपग्रह चित्रों के आधार पर उसके लाहौर में कड़ी सुरक्षा वाले ठिकाने में रहने की खबर सामने आई थी। संयुक्त राष्ट्र की सूची में भी उसका लाहौर का पुराना पता दर्ज रहा है।

जकी उर रहमान लखवी के बारे में भी पाकिस्तान की कहानी भरोसा पैदा नहीं करती। उसके पुराने दर्ज पते इस्लामाबाद, ओकरा और पंजाब के दूसरे इलाकों से जुड़े रहे हैं। वह पाकिस्तान में आतंक वित्तपोषण के मामले में सजा पा चुका है, लेकिन उसके वास्तविक आवागमन और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2024 में सामने आए एक वीडियो ने भी उसके पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र जीवन को दर्शाया था।

साजिद मीर के बारे में वर्षों से खबरें आती रही हैं कि उसे रावलपिंडी और लाहौर में बेहद कड़ी सुरक्षा हासिल रही है। उसके संभावित ठिकानों में रावलपिंडी और लाहौर के इलाके का उल्लेख भारतीय सुरक्षा सूत्रों तथा मीडिया रिपोर्टों में हुआ है। अब इन सभी आरोपियों के लिए भारत की अदालत का संदेश बेहद साफ है कि भागते रहो, छिपते रहो, लेकिन मुकदमा रुकेगा नहीं।

कराची का मलिर इलाका भी 26 नवंबर की साजिश का अहम केंद्र था। जांच के अनुसार हमले के दौरान लखवी, अलकामा और काहफा सहित साजिश से जुड़े लोग वहां बनाए गए नियंत्रण कक्ष से आतंकियों की गतिविधियां देख रहे थे। हमले के बाद यही नेटवर्क मुजफ्फराबाद की ओर गया था। यानी मुंबई में गोलियां चलाने वाले केवल दस आतंकी नहीं थे; उनके पीछे पाकिस्तान की जमीन पर बैठा पूरा साजिशी ढांचा था।

अब उस ढांचे के खिलाफ कानून की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। पाकिस्तान ने अगर अपने यहां छिपे इन आतंकियों को भारत को सौंपने से इंकार किया तो भी न्याय की प्रक्रिया नहीं रुकेगी। मुंबई के शिकार लोगों का खून किसी सरकारी फाइल में दबकर नहीं रह सकता। जिन लोगों ने समुद्र के रास्ते भारत में घुसकर निर्दोषों पर गोलियां बरसाईं, उनके आकाओं को यह समझ लेना चाहिए कि सरहद उन्हें भारतीय कानून से हमेशा नहीं बचा सकती।

पाकिस्तान की जेल, सुरक्षित मकान, लाहौर की गलियां, रावलपिंडी के ठिकाने या मुजफ्फराबाद के आतंकी अड्डे, कोई भी जगह इन गुनहगारों के लिए हमेशा की पनाह नहीं है। मुंबई का हिसाब अभी बाकी है और भारत अब उस हिसाब को कानून की किताब में दर्ज करने के लिए पूरी ताकत से आगे बढ़ चुका है।

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