By अनन्या मिश्रा | Aug 17, 2026
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका आदि देशों में आदिशक्ति मां के 52 शक्तिपीठ हैं। इन शक्तिपीठों में से एक पुष्कर की पुरूहोता पहाड़ी की तलहटी में राजराजेश्वरी मणिवेदिका शक्तिपीठ स्थित है। यह 27वां शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक यहां पर मां सती के हाथ की कलाइयां गिरी थीं। यहां पर मां आदिशक्ति और मां गायत्री एक साथ विराजमान हैं। बता दें कि स्थानीय लोग मां को चामुंडा माता के नाम से भी जानते हैं। वहीं स्कंद पुराण में भी इस पावन स्थान के बारे में उल्लेख मिलता है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ था। लेकिन इस विवाह से महाराजा दक्ष प्रसन्न नहीं थे। जब प्रजापति दक्ष ने यज्ञ किया तो ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं को आमंत्रण दिया। लेकिन अपने दामाद और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। लेकिन सती बिना आमंत्रण के अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए जाती हैं। सती के पिता के घर पहुंचने पर दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया। जिससे क्रोधित होकर मां सती ने अग्निकुंड में अपनी देह का त्याग कर दिया।
जब सती ने देहत्याग किया, तो भगवान शिव मां सती की देह को अपने हाथों में उठाकर रौद्र रूप के साथ ब्रह्मांड में इधर-उधर भटकने लगते हैं। जिससे सृष्टि में हाहाकार मच जाता है। ऐसे में श्रीविष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती की देह के टुकड़े कर दिए। मां सती की देह के टुकड़े जहां-जहां धरती पर गिरे, वहां-वहां पर शक्तिपीठ बन गए। पुष्कर में स्थिति पुरुहोता पर्वत पर मां सती के दोनों हाथ के मणिबंध यानी कलाइयां गिरी थीं।