370 के साथ RPC से भी मुक्त हुआ कश्मीर, IPC के तहत अब यह धाराएं भी होंगी लागू

By अभिनय आकाश | Aug 05, 2019

“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा उंचा रहे हमारा” यह वो गीत है जिसे हम हिन्दुस्तानी बचपन से गाते और सुनते आए हैं। तिरंगे की आन बान और शान के लिए भारत के न जाने कितने लोगों ने अपना बलिदान दिया होगा। यह तिरंगे की ही गरिमा है जिसकी वजह से भारत के 133 करोड़ लोग एक सूत्र में बंध कर रह रहे हैं। झंडा किसी भी देश का चेहरा होता है जिस तरह किसी भी इंसान या देश के कई चेहरे नहीं हो सकते उसी तरह एक ही देश में कई ध्वज नहीं हो सकते। आज राज्यसभा में मोदी सरकार के जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव के बाद अब कश्मीर का अलग झंडा नहीं रहेगा। साथ ही कश्मीर का अलग संविधान नहीं होगा और अब पूरे देश की भांति कश्मीर में भी एक ही कानून चलेगा।

धारा 370 के विरोध में जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में एक नारा दिया था ‘एक देश, दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे। जनसंघ संस्थापक के दिए गए नारे ने आज सच्चाई का रुप ले लिया। बता दें कि जम्मू कश्मीर में अलग झंडे के साथ ही कानून भी अलग थे। जम्मू कश्मीर में रणबीर दंड संहिता लागू थी। जिसे रणबीर आचार संहिता भी कहा जाता था। भारतीय संविधान की धारा 370 के मुताबिक जम्मू कश्मीर राज्य में भारतीय दंड संहिता का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था। यहां केवल रणबीर दंड संहिता का प्रयोग होता था। ब्रिटिश काल से ही इस राज्य में रणबीर दंड संहिता लागू थी।

इसे भी पढ़ें: कश्मीर पर सरकार के 4 बड़े फैसले, धारा 370 हटने के क्या हैं मायने?

दरअसल, भारत के आजाद होने से पहले जम्मू कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत थी। उस वक्त जम्मू कश्मीर में डोगरा राजवंश का शासन था। महाराजा रणबीर सिंह वहां के शासक थे। इसलिए वहां 1932 में महाराजा के नाम पर रणबीर दंड संहिता लागू की गई थी। यह संहिता थॉमस बैबिंटन मैकॉले की भारतीय दंड संहिता के ही समान थी, लेकिन इसकी कुछ धाराओं में अंतर था।

इसे भी पढ़ें: गृह मंत्री ने राज्यसभा में J&K से धारा 370 हटाने का बिल किया पेश


IPC के तहत अब यह धाराएं भी कश्मीर में होंगी लागू 

  • अब सार्वजनिक सभाओं या जमावड़ों के दौरान जान बूझकर शस्त्र लाने को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 सीएए के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।
  • झूठी गवाही या बयान देने के लिये प्रताड़ित करने वालों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 195ए के तहत सजा का हकदार माना जाएगा।
  • भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 4 कंप्यूटर के माध्यम से किए गए अपराधों को व्याख्यित और संबोधित होगी।
  • दहेज के कारण होने वाली मौत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304-बी के तहत कार्रवाई होगी।

प्रमुख खबरें

Stray Dogs की अंधाधुंध हत्या का डर, Supreme Court के आदेश पर NGO ने उठाए गंभीर सवाल

IPL 2026 में Arjun Tendulkar का परफेक्ट यॉर्कर, बेटे की सफलता पर Sachin का दिल छू लेने वाला Post

FIFA World Cup 2026 Schedule: Mexico में उद्घाटन मैच, जानें USA-Canada कब शुरू करेंगे अभियान

Delhi High Court का बड़ा फैसला, Vinesh Phogat के Asian Games Trials का रास्ता हुआ साफ।