By अनन्या मिश्रा | May 13, 2026
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और राशियों के संबंध से जन्मकुंडली में कई तरह के राजयोग बनते हैं। जन्मकुंडली में बनने वाला राजयोग व्यक्ति के जीवन की दशा और दिशा को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाता है। जिन लोगों की कुंडली में विशेष तरह के राजयोग बनते हैं, वह समाज में ऊंचे पद और मुकाम को हासिल करने में कामयाब होता है। वहीं अतिविशेष राजयोग की श्रेणी में पंचमहापुरुष राजयोग का खास महत्व होता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब भी किसी जातक की कुंडली में मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि में से कोई एक या एक से ज्यादा ग्रह अपनी उच्च या स्वराशि और मूल त्रिकोण राशि में बली होकर कुंडली के केंद्र में बैठते हैं, तो इसको पंचमहापुरुष योग कहा जाता है। जिन लोगों की जन्मकुंडली में पंचमहापुरुष योग बनता है, वह जातक अपने जीवन में बहुत ख्याति प्राप्त करता है।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के संयोग से राजयोग बनता है। तो इसको पंचमहापुरुष राजयोग कहा जाता है। मंगल ग्रह से रूचक नामक पंचमहापुरुष योग, बुध ग्रह से भद्र पंचमहापुरुष योग, गुरु के योग से हंस पंचमहापुरुष योग, शुक्र के द्वारा मालव्य पंचमहापुरुष योग और शनि ग्रह से शश पंचमहापुरुष योग बनता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर किसी जातक की जन्मकुंडली में एक से अधिक अगर पंचमहापुरुष राजयोग बने तो वह जातक बहुत भाग्यशाली, मेहनती और कर्मठ होता है। ऐसे लोगों को कभी धन की कमी नहीं होती है।
अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में दो तरह के पंचमहापुरुष योग बनते हैं, तो वह वयक्ति इस पृथ्वी पर राजा की तरह सुख-सुविधाओं का आनंद उठाने में सफल होता है।
अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में दो या दो से ज्यादा पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण होता है, तो ऐसा जातक अपने जीवन में सर्वोच्च पद प्रतिष्ठा और मान-सम्मान प्राप्त करता है।