50 साल पुरानी डाक सुविधा अब बनेगी इतिहास, 1 सितंबर से नहीं कर पाएंगे रजिस्टर्ड पोस्ट

By अंकित सिंह | Aug 07, 2025

भारतीय डाक विभाग 1 सितंबर, 2025 से अपनी पंजीकृत डाक सेवा बंद करने की योजना बना रहा है। यह निर्णय 50 वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही एक सेवा के अंत का प्रतीक है और डाक संचालन को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए स्पीड पोस्ट के साथ रणनीतिक एकीकरण का एक हिस्सा है। विभाग पंजीकृत डाक सेवा को स्पीड पोस्ट के साथ विलय करने की योजना बना रहा है। पंजीकृत डाक की कीमत 25.96 रुपये और प्रत्येक अतिरिक्त 20 ग्राम के लिए 5 रुपये अतिरिक्त थी, जबकि स्पीड पोस्ट की शुरुआती कीमत 50 ग्राम तक के पार्सल के लिए 41 रुपये है, जिससे यह 20-25 प्रतिशत महंगा हो जाता है। 

यह कदम पंजीकृत डाक की मांग में लगातार गिरावट के बाद उठाया गया है, जिसका कारण डिजिटल माध्यमों का बढ़ता उपयोग और निजी कूरियर सेवाओं व ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स से प्रतिस्पर्धा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पंजीकृत वस्तुओं की संख्या में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है—2011-12 में 24.44 करोड़ से घटकर 2019-20 में 18.46 करोड़ रह गई। हालाँकि स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग और डिलीवरी की पावती जैसी प्रमुख सुविधाएँ प्रदान करता रहेगा, लेकिन इस निर्णय ने उपयोगकर्ताओं, विशेष रूप से पुरानी पीढ़ियों और ग्रामीण समुदायों में पुरानी यादें ताज़ा कर दी हैं। पंजीकृत डाक को लंबे समय से विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है, जो अपनी कानूनी वैधता, सामर्थ्य और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।

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ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान शुरू हुई पंजीकृत डाक ने सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेज़ वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बैंकों, विश्वविद्यालयों, न्यायालयों और सरकारी विभागों द्वारा इसके साक्ष्य मूल्य के कारण इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था, और डाक और वितरण का प्रमाण अक्सर कानूनी कार्यवाहियों में स्वीकार्य होता था। इसका बंद होना भारत के संचार ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

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