मनीष सिसोदिया का बड़ा आरोप, दिल्ली नगर निगम में 6000 करोड़ रुपए का हुआ घोटाला, LG को पत्र लिखकर की CBI जांच की मांग

By अनुराग गुप्ता | Aug 10, 2022

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक चर्चाएं सबसे ज्यादा होती हैं। इसी बीच दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली नगर निगम में 6000 करोड़ रुपए के घोटले का बड़ा आरोप लगा है। इसी के साथ ही मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को पत्र लिखा।

उन्होंने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स से संबंधित मामला है। आप जानते ही हैं कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश अथवा हरियाणा की तरफ से आने वाले वाहन 124 प्रवेश मार्गो से शहर में अंदर आते हैं। रोजाना आने वाले वाहनों में करीब 10 लाख वाहन कमर्शियल होते हैं, जिसमें टैक्सी से लेकर टेंपो, बस और बड़े ट्रक तक शामिल हैं। इन सभी कमर्शियल वाहनों के दिल्ली में प्रवेश करते समय दिल्ली नगर निगम इनसे टोल टैक्स के रूप में 100 रुपए से लेकर 1200 रुपए तक वसूल की जाती है।

मनीष सिसोदिया ने पत्र में लिखा कि दिल्ली नगर निगम ने वर्ष 2017 में टोल टैक्स कलेक्शन के लिए एमईपी इंफ्राट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड नाम की कंपनी को इसका ठेका दिया। वर्ष 2017 में दिए गए ठेके के मुताबिक इस कंपनी को दिल्ली नगर निगम को हर साल 1200 करोड़ रुपए देने थे। इस कंपनी ने पहले वर्ष ममें तो पूरा पैसा नगर निगम को दिया लेकिन उसके बाद नगर निगम के नेतृत्व से मिलीभगत करके इसने नगर निगम को पैसा देने लगभग बंद ही कर दिया। इसमें कभी 20 फीसदी तो कभी 30 फीसदी पैसा ही नगर निगम को दिया गया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों से वसूला गया सारा का सारा पैसा खुद ही नगर निगम के नेतृत्व के साथ मिलकर खा गया। दिल्ली नगर निगम को पैसा न मिलने की स्थिति में तुरंत टेंडर कैंसिल करके कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर देना चाहिए था और नया टेंडर करना चाहिए था लेकिन एमसीडी ने 4 साल तक कुछ नहीं किया।

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि हजारों करोड़ों का गबन होने के बाद दिल्ली नगर निगम में 2021 में नया टेंडर किया और इस बार पुरानी कंपनी के डायरेक्टर्स की ही दूसरी कंपनी शंकर ग्लोबल लिमिटेड को यह टेंडर से 786 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की दर पर दे दिया। दिल्ली में प्रवेश होने वाले वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद 1200 करोड़ रुपए वाला टेंडर 786 करोड़ रुपए में दे दिया गया। यह जांच का विषय है कि जिस टेंडर से आने वाले वर्षों में नगर निगम को और ज्यादा पैसा मिलना चाहिए था वह इतने कम दाम पर किसके दबाव में और किसको फायदा पहुंचाने के लिए दे दिया गया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस कंपनी को कोरोना वायरस 83 करोड़ रुपए की छूट भी दे दी गई और अब पता चला है कि यह कंपनी इतने कम दाम में टेंडर लेने के बावजूद नगर निगम को टैक्स का पूरा पैसा नहीं दे रही है। एमसीडी के नेतृत्व की मिलीभगत के चलते इसे इतनी कम वार्षिक फीस देने में भी लगातार छूट दी जा रही है।

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