300 सेकेंड में 96 ड्रोन, China के Atlas ने क्यों बढ़ाई भारत समते दुनिया की चिंता?

By अभिनय आकाश | Apr 27, 2026

भविष्य में जंग कैसे लड़ी जाएगी इसके कई जवाब हो सकते हैं। मिसाइल से फाइटर जेट से या जंगी जहाजों से ये सभी चीजें अपनी-अपनी जगह बेहतर हैं। लेकिन हालिया युद्धों ने हमें जो सिखाया है उसे देखकर तो यही लगता है कि भविष्य की जंगों की दिशा ड्रोन्स तय कर सकते हैं। कम खर्चे में ज्यादा तबाही, दुश्मन के खेमे में ज्यादा कंफ्यूजन और एयर डिफेंस को चकमा। इन सभी कामों में ड्रोन से बेहतर फिलहाल कुछ नहीं है। अब चीन ने एक नया ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया है जो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इस सिस्टम का नाम एटलस है। एटलस ड्रोन स्वार्म  सिस्टम। पहले आपको बताते हैं कि स्वार्म ड्रोनस क्या होते हैं? स्वार्म शब्द का मतलब होता है एक झुंड। मधुमक्खी के झुंडों के लिए स्वार्म  शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के ड्रोंस एक साथ बड़ी संख्या में हमला करते हैं। इससे फायदा यह होता है कि दुश्मन का एयर डिफेंस कंफ्यूज हो जाता है। वो समझ नहीं पाता कि ड्रोन को पहले रोके। जब तक वह अपना टारगेट चुनता है तब तक और भी ड्रोंस आ जाते हैं। इससे एयर डिफेंस को पहले ही नाकाम करने में मदद मिलती है जिससे मिसाइल्स और फाइटर जेट्स के लिए कोई रुकावट नहीं रह जाती। 

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इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर एटलस को अपने हिसाब से कंफिगर भी किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए पहले जासूसी ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। जबकि दुश्मनों को दबाने के लिए हमलावर ड्रोन से पहले इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले ड्रोन भेजे जा सकते हैं। इससे अलग-अलग स्थितियों के अनुसार खास तरह से जवाब देना संभव हो जाता है। स्वर्म इंटेलिजेंस से लैस लगभग 100 हाई स्पीड ड्रोन मिशन के दौरान बहुत कम समय में सटीक इंफॉर्मेशन बना सकते हैं। वो हवा के बहाव में गड़बड़ी जैसी स्थिति में भी खुद को संभालने में सक्षम होते हैं। अब आपको यह भी बताते हैं कि यह एटलस वर्म ड्रोंस इंडिया और ताइवान के लिए टेंशन की बात क्यों है। एटलस सिस्टम ताइवान और भारत के एयर डिफेंस को कंफ्यूज कर सकता है। इसे नष्ट करने के लिए भारत और ताइवान को इसके कई हिस्सों को बर्बाद करना पड़ेगा जो इसकी स्पीड और कैमोफ्लैश क्षमता को देखते हुए मुश्किल जान पड़ता है। इसके अलावा सिस्टम की एल्गोरिदम से ऑपरेट होने वाली किल चेन और खुद से टारगेट की पहचान करने की क्षमता इसे और घातक बनाती है।

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