कांग्रेस की रैली - ‘खाली खाली कुर्सियां, खाली खाली तम्बू हैं’ और भेजा...?

By राकेश सैन | Nov 03, 2026

फिल्म मेरा नाम जोकर के गीत ‘खाली-खाली कुर्सियां हैं खाली खाली तम्बू हैं’ के गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ अगर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली को देखते तो वहां की खाली कुर्सियां व खाली तम्बू देख कर वैचारिक पक्ष से लिख रहे होते कि ‘खाली खाली भेजा है।’ रैली में किसी भी नेता द्वारा ऐसी कोई तथ्यात्मक बात नहीं कही गई जिससे यह साबित होता हो कि वोटों की चोरी हुई है और एसआईआर में गड़बड़ी है। जो जो बातें बोली गईं, चुनाव आयुक्त, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को लेकर जो जो अपशब्द बोले गए वो सब पिछले कई महीनों से गढ़े जा रहे झूठे नैरेटिव के प्रयासों से अतिरिक्त कुछ नहीं था। शायद यही कारण है कि न तो देशवासियों ने इस रैली से पहले विपक्ष को गंभीरता से लिया और न ही बाद में इन बातों पर ध्यान दे रहा है।

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रैली के दौरान व इससे पूर्व कथित जनसंसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों को जिस तरीके से अवैध बताया इससे तो उन्होंने अपने नेता पद को भी अवैधानिक घोषित कर दिया है। दुनिया के राजनीतिक  इतिहास में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो कि संवैधानिक पद पर विराजमान किसी नेता ने अपने ही पद को अवैध घोषित किया हो। अब प्रश्न है कि अगर उनका पद ही अवैध है तो वे इस पद से अभी तक चिपके हुए क्यों हैं?

वैसे तो नेता प्रतिपक्ष कई महीनों से वोट चोरी का झूठ फैला रहे हैं परंतु कांग्रेस को वोट चोरी का अपना अभियान तेज करने का मौका कुछ दिन पहले की उस खबर से मिला, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि एसआइआर के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथपत्र देकर स्पष्ट रूप से कहा कि एसआइआर पर सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए। इसके बाद भी विपक्षी दल अपने इस हठ पर कायम हैं कि वोट चोरी हो रही है। वे इस तथ्य पर भी ध्यान देने के लिए तैयार नहीं कि जिन 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट हटाए गए हैं, वे उनके हैं जो अन्यत्र जा बसे हैं या जिनकी मृत्यु हो गई है अथवा जिनके नाम दो-तीन जगह दर्ज थे। सच यह भी है कि 13 करोड़ लोगों का नाम हटाने का फैसला अंतिम नहीं है और वैध मतदाता अपना नाम वोटर लिस्ट में अभी भी शामिल करा सकते हैं। इतना होने के बावजूद उक्त रैली की कुर्सियां व तम्बू खाली होने के साथ-साथ वैचारिक रूप से भेजा खाली होना न कहा जाए तो क्या कहें?

विडंबना यह भी है कि न्यायालय में एसआइआर के खिलाफ याचिका दायर करने वाले विपक्षी नेता कथित वोट चोरी के खिलाफ कोई प्रमाण अदालत के समक्ष पेश करने के बजाय दिखावटी संसद बुलाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग पारित करने जैसे स्वांग कर अपना ही उपहास ही उड़ा रहे हैं।

रैली की वैचारिकता के साथ-साथ इसमें जुटी भीड़ को लेकर जिस तरह से झूठ का सहारा लेने के आरोप लग रहे हैं वह साफ दर्शाता है कि खुद विपक्ष इस रैली से निराश है और येन केन प्रकारेन रैली को अधिक से अधिक सफल होने के दावे कर रहा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल ने रैली में भारी भीड़ दिखाने के लिए एआई से बनी फर्जी तस्वीरों का सहारा लिया है। किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेलंगाना से कांग्रेस सांसद वामसी गड्डम और अन्य नेताओं द्वारा साझा की गई एक तस्वीर को पोस्ट करते हुए कटाक्ष किया। रिजिजू ने लिखा कि रामलीला मैदान को खचाखच भरा दिखाने के लिए कांग्रेस पार्टी की फेक नैरेटिव टीम एआई से बनी नकली फोटो भी ठीक से नहीं बना पाई। सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस तस्वीर को तुरंत पकड़ लिया और दावा किया कि मंच पर दिख रहे राहुल गांधी और सोनिया गांधी के चेहरे और मूल रैली का मंच असली तस्वीरों से बिल्कुल अलग हैं।

इससे पहले बीजेपी प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा कह चुके हैं कि रैली से पहले कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में 40 फीसदी मैदान खाली रहा। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि रैली में दिखाई गई भीड़ केवल ट्रिक फोटोग्राफी का नतीजा है, और ऐसी ट्रिक्स किसी को प्रधानमंत्री नहीं बना सकतीं।

महात्मा गांधी मानते थे कि हिंसक और असत्य साधनों से कभी कोई संघर्ष नहीं जीता जा सकता। ईवीएम की तरह एसआईआर पर भी कांग्रेस लगातार झूठ पर झूठ बोल रही है और यही कारण है कि यह मुद्दा जनता के बीच कहीं ठहर नहीं पा रहा है। अगर सचमुच में चोरी हुई होती और इसके पक्ष में कांग्रेस के पास कोई प्रमाण है तो उसे संसद में पेश किया जाना चाहिए था और इस पर तथ्यात्मक बहस करनी चाहिए थी, वहां भी बात नहीं बनती तो अदालत का दरवाटा खटखटाना चाहिए था परंतु इसके विपरीत कांग्रेस ने नक्सलवादी हल्ला बोल शैली में जन संसद व रैली का आयोजन किया। अदालत का दरवाजा तो खटखटाया परंतु अभी तक उसमें अपने पक्ष में एक भी तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाई। कांग्रेस स्मरण रखे कि जब तक वैचारिक रूप से भेजा खाली रहेगा तब तक कुर्सियां व तम्बू भी समर्थकों को तरसते रहेंगे।

- राकेश सैन

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