स्वभाषा को तवज्जो देकर ही कोई देश महाशक्ति और महासंपन्न बन सकता है

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Mar 03, 2023

हमारे राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की बाढ़ आ रही है लेकिन ज़रा रूस की तरफ देखें। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कल एक राजाज्ञा पर दस्तखत किए हैं, जिसके अनुसार अब रूस के सरकारी कामकाज में कोई भी रूसी अफसर अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इस राजाज्ञा में यह भी कहा गया है कि अंग्रेजी मुहावरों का प्रयोग भी वर्जित है। लेकिन जिन विदेशी भाषा के शब्दों का कोई रूसी पर्याय ही उपलब्ध नहीं है, उनका मजबूरन उपयोग किया जा सकता है।

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हमारे बच्चों पर सिर्फ अंग्रेजी नहीं लादी जाए। उन्हें बड़े होकर कई विदेशी भाषाएं सीखने की छूट हो लेकिन यदि प्राथमिक कक्षाओं में उन पर अंग्रेजी थोपी गई तो यह हिरण पर घांस लादने वाली बात हो गई। इसे सीखने में वे रट्टू तोते बन जाते हैं और उनमें हीनता ग्रंथि पनपने लगती है। महात्मा गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया ने इस बात को काफी अच्छी तरह समझा था। लेकिन कैसा दुर्भाग्य है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और अशोक गहलोत जैसे संस्कारवान नेता उसके मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने उन अंग्रेजी स्कूलों का नाम ‘महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल’ रख दिया है। अशोक गहलोत जो कि कांग्रेसी नेता हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो कि भाजपा के नेता हैं, दोनों ज़रा महात्मा गांधी और गुरु गोलवलकर के इन कथनों पर ध्यान देंः- ‘‘यदि मैं तानाशाह होता तो आज ही विदेशी भाषा में शिक्षा देना बंद कर देता। सारे अध्यापकों को स्वदेशी भाषाएं अपनाने को मजबूर कर देता। जो आनाकानी करते, उन्हें बर्खास्त कर देता।’’ गुरु गोलवलकर, ‘‘आज देश की दुर्दशा यह है कि अंग्रेजी प्रमुख भाषा बन बैठी है और सब भाषाएं गौण बन गई हैं। यदि हम स्वतंत्र राष्ट्र हैं तो हमें अंग्रेजी के स्थान पर स्वभाषा लानी होगी।’’

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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