By रेनू तिवारी | May 01, 2026
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान ने एक बार फिर न्यायपालिका से राहत की गुहार लगाई है। गुरुवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (IHC) में सुनवाई के दौरान, खान के वकील ने उनकी गिरती सेहत और लंबे समय से जारी 'एकांत कैद' का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की। यह अपील उनके वकील सलमान सफदर ने की, जब अदालत खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की 19 करोड़ पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में उनकी सज़ा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
सलमान सफदर, इमरान खान के वकील ने कहा "यह मामला पिछले 16 महीनों से लंबित है और अब तक 17 सुनवाइयां हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि अदालत मानवीयता और अनुकंपा के आधार पर निर्णय ले।"
पिछले साल जनवरी में इस्लामाबाद की एक जवाबदेही अदालत ने 73 साल के खान को नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) की जांच वाले भ्रष्टाचार के मामले में 14 साल और बुशरा बीबी को सात साल जेल की सज़ा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान, सफदर ने अदालत से सज़ा निलंबित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि मामला 16 महीने से ज़्यादा समय से लंबित है और अपील में पहले ही 17 सुनवाई हो चुकी हैं। द डॉन अखबार ने यह खबर प्रकाशित की।
यह मामला पाकिस्तान की राजनीति के सबसे हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
ब्रिटेन से आई राशि: 2019 में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने पाकिस्तान सरकार को लगभग 190 मिलियन पाउंड (करीब 50 अरब रुपये) लौटाए थे।
आरोप: आरोप है कि इमरान खान सरकार ने इस पैसे को राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के बजाय, एक प्रमुख रियल एस्टेट टाइकून की कानूनी देनदारियों को निपटाने के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी।
क्विड प्रो क्वो (बदले में लाभ): जांचकर्ताओं का दावा है कि इसके बदले में इमरान खान और बुशरा बीबी के 'अल-कादिर ट्रस्ट' को विश्वविद्यालय बनाने के नाम पर सैकड़ों कनाल की कीमती जमीन दान में दी गई।
सजा: जनवरी 2025 में जवाबदेही अदालत ने इस मामले में इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
गुरुवार को हुई सुनवाई में खान और बुशरा बीबी की सजा के खिलाफ अपील पर बहस शुरू हुई, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई तत्काल राहत नहीं मिली है।
सुरक्षा कारणों से देरी: यह सुनवाई पहले 22 अप्रैल को होनी थी, लेकिन इस्लामाबाद के 'रेड जोन' में सख्त सुरक्षा पाबंदियों के कारण इसे टालना पड़ा था।
अदालत की सख्ती: इस्लामाबाद हाई कोर्ट पहले ही इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जता चुका है। अदालत ने मामले को लटकाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी (NAB) के अभियोजकों पर जुर्माना भी लगाया था।
बचाव पक्ष का तर्क: इमरान खान लगातार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रस्ट एक जनहितकारी संस्था है और इससे उन्हें कोई व्यक्तिगत वित्तीय लाभ नहीं हुआ है।
फिलहाल यह जोड़ा रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद है। हालांकि इमरान खान की टीम सजा के निलंबन के लिए जोर दे रही है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि खंडपीठ दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों की जांच करने के बाद ही कोई फैसला सुनाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला पाकिस्तान की राजनीति और न्यायपालिका के बीच चल रहे तनाव का केंद्र बना रहेगा।
इसके अलावा गुरुवार को एक पाकिस्तानी हाई कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी द्वारा हाई-प्रोफाइल अल-कादिर ट्रस्ट मामले में अपनी सज़ा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई शुरू की। सुनवाई अभी भी जारी है और उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिली है।
जनवरी 2025 में एक जवाबदेही अदालत द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में क्रमशः 14 साल और 7 साल की जेल की सज़ा सुनाए जाने के बाद इस जोड़े ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। इस मामले की जांच नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने की थी। वे फिलहाल अदियाला जेल में बंद हैं, जहां खान 2023 से ही कई मामलों में कैद हैं।
यह सुनवाई पहले 22 अप्रैल के लिए तय की गई थी, लेकिन इस्लामाबाद के 'रेड ज़ोन' में सुरक्षा पाबंदियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब मुख्य न्यायाधीश सरफराज डोगर और न्यायमूर्ति मुहम्मद आसिफ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
इस मामले को '190 मिलियन पाउंड' वाले मामले के नाम से भी जाना जाता है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि 2019 में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी द्वारा पाकिस्तान को लौटाए गए लगभग 50 अरब रुपये (जो 190 मिलियन पाउंड के बराबर थे) का गलत तरीके से निपटारा किया गया। राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के बजाय, कथित तौर पर इन पैसों का इस्तेमाल एक रियल एस्टेट कारोबारी की देनदारियों को चुकाने के लिए किया गया।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इसके बदले में, अल-कादिर ट्रस्ट के फायदे के लिए ज़मीन के बड़े-बड़े टुकड़े (जिनमें सैकड़ों कनाल ज़मीन शामिल है) हस्तांतरित किए गए। अल-कादिर ट्रस्ट एक कल्याणकारी संस्था है, जिसे खान और उनके सहयोगियों ने इस्लामाबाद के पास एक विश्वविद्यालय चलाने के उद्देश्य से स्थापित किया था। 2019 में स्थापित अल-कादिर ट्रस्ट को शिक्षा और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित एक परोपकारी पहल के रूप में पेश किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरी व्यवस्था सत्ता के दुरुपयोग का मामला है और इससे राष्ट्रीय खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। जिस अदालत ने इस जोड़े को दोषी ठहराया था, उसने इस मामले से जुड़ी ज़मीन को ज़ब्त करने का भी आदेश दिया था।
हालांकि, खान लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि इस ट्रस्ट की स्थापना जनहित के लिए की गई थी और न तो उन्हें और न ही बुशरा बीबी को इससे कोई निजी आर्थिक लाभ हुआ है। उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है।
हालिया सुनवाई के दौरान अपील प्रक्रिया में चल रहे तनाव भी खुलकर सामने आए हैं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इससे पहले मामले में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की थी और यहां तक कि मामले को लटकाने की रणनीति अपनाने के लिए भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी के अभियोजन पक्ष पर जुर्माना भी लगाया था। यह इस बात का संकेत है कि अदालत अब लंबी खिंच रही कानूनी कार्यवाही को लेकर अपना धैर्य खो रही है। अपीलें अभी सुनवाई के चरण में हैं, और इनसे जुड़े आवेदन—जिनमें सज़ा को निलंबित करने की मांग वाले आवेदन भी शामिल हैं—अभी भी लंबित हैं। उम्मीद है कि यह मामला कई सुनवाइयों तक चलेगा, क्योंकि अदालत दोनों पक्षों की दलीलों की जांच करेगी।