70000 हजार करोड़ वाला 'प्रोजेक्ट 75', गुजरात की गलियों में पतंग उड़ाने वाला ये शख्स मोदी संग मिलकर करने वाला है बड़ा खेल!

By अभिनय आकाश | Jan 12, 2026

भारत और जर्मनी के रिश्तों को आज सिर्फ कूटनीति नहीं संस्कृति और परंपरा भी नई ऊंचाइयों पर ले जाती दिखी है और इसकी सबसे खूबसूरत झलक देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को पतंग उड़ाना सिखाया उसकी वीडियो अब वायरल हो रही। जी हां, यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, यह है भारत की सॉफ्ट पावर और डिप्लोमेसी का वायरल मूवमेंट। दरअसल, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अहमदाबाद पहुंचे। यह उनका भारत का पहला और चांसलर बनने के बाद एशिया का पहला दौरा है। सफर की शुरुआत हुई साबरमती आश्रम से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें महात्मा गांधी की विरासत से परिचित कराया। यहां बातचीत सिर्फ इतिहास की नहीं थी बल्कि अहिंसा, लोकतंत्र और स्वतंत्रता जैसे मूल्यों की थी जिन पर भारत और जर्मनी दोनों विश्वास करते हैं। और फिर आया वो पल जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। साबरमती रिवर फ्रंट पर चल रहे इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज पहुंचते हैं। रंग बिरंगी पतंगे भारत, जर्मनी और रणनीतिक साझेदार देशों के झंडे और तभी पीएम मोदी ने खुद पतंग की डोर थामी और जर्मन चांसलर को पतंग उड़ाने की गुरसुखा दिए। यह था डिप्लोमेसी का सबसे हल्का, सबसे खूबसूरत और सबसे वायरल पल। लेकिन इसके साथ ही भारत जर्मनी के साथ मिलकर डिफेंस सेक्टर में खलबली मचाने वाला है।

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7000 करोड़ की डील

ना रडार पर, ना सरफेस पर और ना ही अमेरिका की पकड़ में। यह कोई आर्म डिफेंस डील नहीं है। यह अंडर वाटर पावर बैलेंस को रिसेट करने की तैयारी है। अब तक दुनिया एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर चिट और मिसाइल्स की बात करती थी। लेकिन असली गेम समंदर के नीचे खेला जाता है। जहां ना सेटेलाइट काम करता है ना रडार और ना ही अमेरिका की नजर और यहीं पर भारत ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। दरअसल 12 से 13 जनवरी को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दौरे पर हैं।। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद अहमदाबाद के एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। ऐसे में सवाल उठता है क्या यह सिर्फ डिप्लोमेटिक शिष्टाचार है? नहीं। असली वजह है प्रोजेक्ट 75i भारत का अब तक का सबसे महंगा सबसे टेक्नोलॉजिकली एंबिशियस और सबसे बड़ा साइलेंट नेवल प्रोजेक्ट

प्रोजेक्ट 75 है क्या?

दरअसल इसके तहत इंडियन नेवी चाहती है सिक्स नेक्स्ट जनरेशन कन्वेंशनल अटैक सबमरींस। लेकिन यह कोई साधारण सबमरीन नहीं होगी। इसकी सबसे बड़ी ताकत है एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी कि एआईपी दरअसल साधारण सबमरीन को बार-बार सतह पर लाना पड़ता है। ध्यान से सुनिए। ऑक्सीजन और बैटरी चार्ज के लिए। लेकिन एआईपी सबमरीन हफ्तों तक पानी के नीचे रह सकती है। नो सरफेसिंग एक्सट्रीमली लो नॉइस और ऑलमोस्ट इनविज़िबल टू एनमी सुनार। यानी कि एक लाइन में समझे तो यह सबमरीन शिकार नहीं होती। यह शिकार करती है।

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मॉडर्न सुनार भी कंफ्यूज हो जाएगा

इस सबमरीन की नॉइस सिग्नेचर इतनी कम होती है कि मॉडर्न सुनार भी कंफ्यूज हो जाए। मतलब दुश्मन का युद्धपोत चलता रहेगा और उसे पता भी नहीं चलेगा कि मौत उसके नीचे इंतजार कर रही है। यही वजह है कि अंडर वाटर वॉरफेयर को नेवल पावर का अंतिम स्तर माना जाता है।

जर्मनी को क्यों चुना गया

अब सबसे बड़ा सवाल फ्रांस था, रूस था, अमेरिका भी था तो जर्मनी ही क्यों? क्योंकि प्रोजेक्ट 75 में सिर्फ सबमरीन नहीं चाहिए, टेक्नोलॉजी भी चाहिए। इस प्रोजेक्ट में मुख्य रूप से स्पेन, साउथ कोरिया, जर्मनी शामिल है। लेकिन स्पेन बाहर हुआ क्योंकि एआईपी टेक्नोलॉजी फुल्ली प्रोवेन नहीं था। रिस्क इंडिया नहीं ले सकता है और यहीं पर जर्मनी आगे निकल गया। जर्मनी के पास असली एडवांटेज है। डीप टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए वो तैयार है। यहीं पर अमेरिका खेल से बाहर होगा क्योंकि अमेरिका बेचता है लेकिन टेक्नोलॉजी नहीं देता है। बल्कि अगर किसी को देता है तो उसमें भी किल स्विच लगा के देता है।

सबमरीन बिल्डिंग नेशन बनने जा रहा भारत

मेड इन इंडिया सिंबॉलिक नहीं स्ट्रेटेजिक हो चुका है। यह डील सिर्फ खरीददारी नहीं सिर्फ कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट नहीं यह स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है। मतलब भारत सबमरीन बायर नहीं सबमरीन बिल्डिंग नेशन बनने जा रहा है। अभी तक अमेरिका हथियार बेचकर अपनी आत्मनिर्भरता दूसरे देशों पर बनाता है। लेकिन भारत ने डिपेंडेंसी ही यानी आत्मनिर्भरता ही खत्म कर दी उसके ऊपर। ना अमेरिका की सबमरीन ना अमेरिका की टेक्नोलॉजी और ना ही अमेरिका की दो मुंह ही शर्तें। यानी कंप्लीट स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी। ये डील सिर्फ जर्मनी के साथ नहीं।

चीन-पाक को क्या संदेश

ये डील चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश है। चीन तेजी से सबमरीन फ्रीड पड़ा रहा। पाकिस्तान को सबमरीन भी चीन दे रहा। भारत का जवाब है क्वालिटी ओवर क्वांटिटी साइलेंट बट लेथल पावर। अगर यह डील जनवरी के बाद फाइनल हो जाती है तो यह होगा इंडियन नेवल हिस्ट्री का सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक लीप और इंडियन ओसियन बैलेंस रिसेट और सबसे बड़ी बात बिना युद्ध, बिना शोर, बिना अमेरिका की अनुमति, बिना अमेरिका की शर्तों के भारत ने बड़ा खेल कर दिया है। 

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