मिलावटखोरों के खिलाफ भी करना पड़ेगा देशव्यापी आंदोलन

By संतोष कुमार पाठक | Aug 06, 2026

संसद भवन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है और वहीं देश के तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों पर भी मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। लेकिन इस बीच कई ऐसी खबरें भी लगातार निकल कर सामने आ रही है, जिसपर बड़े पैमाने पर चर्चा, वाद-संवाद और कार्रवाई की जरूरत है। लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि देश के सभी लोगों के जीवन से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मसले पर चर्चा करने का समय किसी के पास नहीं है। सत्ता में बैठने वाली किसी भी सरकार ( चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल की हो) के पास इसके समाधान का कोई स्थायी फॉर्मूला या विज़न नहीं है, विपक्ष के पास भी इस पर बात करने की फुर्सत नहीं है और सरकारी अधिकारी अपने में ही मस्त है। 

इसे भी पढ़ें: उन्नत बचपन की पहली शर्त- स्वस्थ भोजन, स्वस्थ भविष्य

हाल ही में देश के एक बड़े अखबार ने इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जो दावा किया है, उसने सबकी नींदे उड़ा दी है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश की कई आटा मिलों में गेंहू के आटे में सफेद पत्थर का चूरा यानी स्टोन पाउडर मिलाया जा रहा है। मुनाफाखोरी के लालच में ये मिलावटखोर हमें पत्थर वाले आटे से बनी रोटी खाने को मजबूर कर रहे हैं। जबकि ये भी जानते हैं कि इस मिलावटी आटे से बनी रोटी को खाने से लोगों के शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेंगे। 

आजकल लोगों के घरों से लेकर, फ़ास्ट फ़ूड, शादी-ब्याह और पार्टियों तक में सबसे ज्यादा पनीर का इस्तेमाल किया जाता है। कई एक्सपर्ट/ जिम ट्रेनर तो बॉडी को मजबूत बनाने के लिए भी पनीर खाने की सलाह देते हैं। लेकिन पनीर में मैदा या अरारोट मिलाना और स्किम्ड मिल्क पाउडर एवं वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर सिंथेटिक या नकली पनीर बनाना तो आम बात हो गई है। बल्कि ऐसे गंभीर मामले भी कई बार सामने आए हैं, कि डिटर्जेंट या यूरिया से बने दूध का भी इस्तेमाल कर पनीर बनाया और बेचा जाता है। 

महाराष्ट्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही, राज्य में एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि असली पनीर बताकर इसे बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अपने आदेश में सख्त शब्दों में कहा कि नियम तोड़ने  वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार भी एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर को लेकर ऐसा ही फैसला कर चुकी है। 

सबसे अधिक दुःखद और परेशानी में डालने वाला तथ्य तो यह है कि देश की नामी-गिरामी कंपनियां भी उपभोक्ताओं को धोखा देने का कोई मौका नहीं चूकती है। रोजमर्रा की जरूरत का कई सामान बेचने वाली एफएमसीजी कंपनी डाबर को लेकर भी चौंकाने वाली ख़बर सामने आई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने डाबर द्वारा किए जा रहे ' 100% प्योर', '100% ऑर्गेनिक' और '100% नेचुरल' जैसे दावों को भ्रामक बताते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स की बिक्री को तुरंत रोकने का आदेश दे दिया है। इन प्रोडक्ट्स में शहद, गाय का देसी घी, तिल का तेल और नारियल पानी जैसी कई चीजें शामिल हैं। डाबर को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी जमा करने को कहा गया है।

इससे पहले भी कई नामी-गिरामी और बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर गंभीर सवाल उठ चुके हैं। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यही कंपनियां जब विदेश खासकर अमेरिका या यूरोपीय देशों में कोई सामान बेचती है तो उसकी क्वालिटी का खास ध्यान रखती है लेकिन भारतीयों के लिए इनका एटीट्यूड 'सब चलता है टाइप' ही होता है।

लोग पैसे खर्च करने को तैयार हैं ताकि उन्हें शुद्ध आटा, दाल, चावल, मसाले, चीनी, दूध, घी, खाद्य तेल, सब्जियां, पनीर, शहद, पानी और अन्य सामान मिल सके। लेकिन ज्यादा खर्च के बाद भी उनके साथ न केवल ठगी की जा रही है बल्कि लोग गंभीर बीमारियों के भी शिकार होकर मरते भी जा रहे हैं। 

लेकिन क्या सिर्फ कानून बना देने से इस भयावह समस्या का समाधान हो जाएगा, कतई नहीं। इसके लिए युद्धस्तर पर एक मिशन के तहत कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ेगा। नकली सामानों को बनने के स्तर पर ही रोकना होगा, इसके लिए उत्तरदायी विभाग में मैन पावर बढ़ाने के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। इससे जुड़े विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हर महीने अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी ऑनलाइन भरना चाहिए। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर फैसले की समय सीमा भी तय करनी होगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर कई अन्य कदम भी उठाने होंगे। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि क्या हमारी सरकार, अधिकारी, अदालत और नेता..ये सब इसके लिए तैयार हैं? 

- संतोष कुमार पाठक

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं

प्रमुख खबरें

यूपी में आंबेडकर की 151 मूर्तियां क्षतिग्रस्त, केवल 14 गिरफ्तारियां: Akhilesh Yadav

शादी का झांसा देकर यौन शोषण के आरोप में Sourav Gurjar गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा

Russia Parliamentary Election: ड्यूमा चुनाव संपन्न, United Russia की बढ़त के संकेत

Karnataka FDA ने फर्जी दवा गिरोह पर कसा शिकंजा, 16 विक्रेताओं के लाइसेंस किए रद्द