By अभिनय आकाश | Aug 10, 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY) एक अहम पहल है, जिसका मकसद उत्तराखंड के युवाओं और निवासियों को स्वरोजगार के मौकों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सोलर एनर्जी जैसे सेक्टर में स्थानीय स्तर पर एंटरप्रेन्योरशिप और रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए काम कर रही है। यह पहल न सिर्फ़ ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पहाड़ी इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को भी मज़बूत कर रही है और पहाड़ों से होने वाले पलायन की समस्या को हल करने में मदद कर रही है। इस दिशा में, उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप से जोड़ने के मकसद से शुरू की गई मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (MSSY), राज्य में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के नए मौके पैदा करने के लिए एक अहम पहल के तौर पर उभर रही है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक उत्तराखंड में कुल 1,132 सोलर पावर प्लांट लगाए गए, जिनकी कुल क्षमता 2,10,420 kW यानी लगभग 210 MW थी। बाकी प्रोजेक्ट्स पर लगाने का काम अभी चल रहा है। इस योजना के तहत लगाए गए सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के मामले में टिहरी ज़िला राज्य में सबसे आगे है। वहाँ कुल 369 सोलर प्लांट लगाए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 69,050 kW है। उत्तरकाशी में 227 प्लांट हैं जिनकी कुल क्षमता 43,660 kW है, जबकि चंपावत में 144 प्लांट हैं जिनकी क्षमता 28,200 kW है।
इसी तरह, हरिद्वार में 86 प्लांट हैं जिनकी कुल क्षमता 16,900 kW है, पौड़ी में 88 प्लांट हैं जिनकी क्षमता 15,440 kW है, चमोली में 72 प्लांट हैं जिनकी क्षमता 11,725 kW है, और अल्मोड़ा में 32 प्लांट हैं जिनकी क्षमता 5,600 kW है। इस योजना के तहत देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर ज़िलों में भी सोलर प्रोजेक्ट्स लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री सौर स्वरोज़गार योजना सिर्फ़ सोलर पावर बनाने तक ही सीमित नहीं है। इसे ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में स्वरोज़गार और उद्यमिता के मौके बढ़ाने के एक अहम ज़रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस योजना के तहत लगाए गए प्रोजेक्ट्स से अभी लगभग 3,500 लोगों को सीधा और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिल रहा है।